{"_id":"63f125f4c9b026d370002b20","slug":"visionary-plans-will-have-to-be-made-to-avoid-climate-change-hisar-news-c-21-hsr1020-59614-2023-02-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए बनानी होगी दूरदर्शी योजनाएं : डॉ. एके जोशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए बनानी होगी दूरदर्शी योजनाएं : डॉ. एके जोशी
विज्ञापन
हिसार। एचएयू में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न विभागों में 12 विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि से खाद्य सुरक्षा और स्थिरता विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में आए विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु अनुकूल खेती से ही इस संकट से निपटा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय गेहूं व मक्का शोध संस्थान के एशिया प्रमुख डॉ. एके जोशी ने अपने संबोेधन में कहा कि अचानक मौसम का बदलाव फसलों के लिए बहुत ही हानिकारक साबित हो रहा है। इसलिए कार्बन का संरक्षण व दूरदर्शी योजना बनाकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटना होगा।
अमेरिका से आए डॉ. अशोक धवन ने कहा कि वातावरण असंतुलन आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने आशा जताई कि सम्मेलन इससे छुटकारा पाने के उपाय सुझाएगा।
मक्का फसल के वैज्ञानिक डॉ. सांई दास ने कहा कि इस समय वातावरण असंतुलन की वजह से पानी और मिट्टी की गुणवत्ता कम हो रही है। यह सम्मेलन आजकल की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। वातावरण में आए असंतुलन का प्रबंधन, फसल विविधिकरण और प्राकृतिक स्रोत का सही प्रयोग आने वाली पीढि़यों के लिए मददगार साबित होगा।
विज्ञापन
सम्मेलन के संरक्षक व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने बताया कि इस महासम्मेलन में कनाडा, जापान, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, उज्बेकिस्तान, फिलिपींस व पोलैंड सहित कई देशों से विशेषज्ञ आए हैं। सम्मेलन में एक हजार से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कुल 12 विषय निर्धारित किए हैं, जिनमें विशेषज्ञ व्याख्यान व पोस्टर के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान कर रहे हैं। सम्मेलन के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और स्थिरता के लिए भविष्य में होने वाले अनुसंधान की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलेगी।
-- -- -- -
विदेशी मेहमानों ने अनुभव साझा किए
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने बताया कि सम्मेलन में मुख्य रूप से जर्मनी से डॉ. एंड्रियास बॉर्नर दॉ कंजरवेशन एंड यूटिलाइजेशन ऑफ प्लांट जेनेटिक रिर्सोसिज व डॉ. मेनफ्रेड क्लाइमेट रेजिलिएंट एंड एग्रीकल्चर 2025-2050 : क्लाइमेट रेसिटेंट क्रॉप्स प्लस फोसिल फ्यूल फ्री फार्मिंग, पोलैंड से डॉ. लुकाज ड्रेवनिक कन्सट्रक्टिड वेटलैंडस फॉर एग्रीकल्चरल रन ऑफ ट्रीटमेंट व जापान से वैज्ञानिक प्रो. टाकुरो शीनानो रेडियोएक्टिव सीजियम ट्रांसफर फ्रॉम एग्रीकल्चरल सॉइल टू क्रॉप्स, उज्बेकिस्तान से प्रो. डिलफूजा पी. जभोरवा इन्फ्लुएंस ऑफ बॉयोचार एप्लीकेशन ऑन ग्रोथ एंड फिजियोलॉजिकल प्रॉपर्टीज एंड सॉइल एन्जाइमेटिक एक्टिविटीज, आस्ट्रेलिया से डॉ. केदर अधिकारी जेनेटिक वेरियशन एक्जिस्ट फॉर हीट टॉलरेंस इन फाबा बीन व डॉ. सूर्यकांत एडवांस टेक्नोलॉजिस एंड साइंटिफिक इनोवेशन फॉर ब्रिडिंग क्लाइमेट रेजिलियंट क्रॉप्स, डॉ. कुमार प्रणव प्लांट ग्रोथ प्रोमोटिंग बैक्टीरिया एंड फाइटोरेमेडिएशन, स्वीडन से डॉ. मोनिका बागा जीनोमिक्स स्ट्रेटेजिज टू अंडरस्टेंड एंड इम्पू्रव फिल्ड सरवाइवल इन ऑटोमन सिडिड सीरियल, यूनाइटेड किंगडम से प्रोफेसर रत्न यादव चैलेंजिज एंड ऑपोरच्युनिटिज फॉर मीटिंग दॉ नीड्स ऑफ 21 फस्ट सन्चुरी प्लांट ब्रिडिंग, कनाडा से डॉ. रविंद्र नाथ छिबर प्लसिज इम्पोरटेंट कोन्ट्रीब्यूटर्स टू इम्प्रूवड ह्यूमन हेल्थ न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी एंड सस्टेनएबल व अमेरिका से डॉ. अशोक कुमार धवन क्लाइमेट चेंज एज सेलेक्शन प्रेसर : एक्ट्रापोलेशन फ्रॉम इवोलुशन ऑफ शुगरकेन एंड अदर सी फॉर प्लांट विषय पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
अमेरिका से आए डॉ. अशोक धवन ने कहा कि वातावरण असंतुलन आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने आशा जताई कि सम्मेलन इससे छुटकारा पाने के उपाय सुझाएगा।
विज्ञापन
मक्का फसल के वैज्ञानिक डॉ. सांई दास ने कहा कि इस समय वातावरण असंतुलन की वजह से पानी और मिट्टी की गुणवत्ता कम हो रही है। यह सम्मेलन आजकल की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। वातावरण में आए असंतुलन का प्रबंधन, फसल विविधिकरण और प्राकृतिक स्रोत का सही प्रयोग आने वाली पीढि़यों के लिए मददगार साबित होगा।
विज्ञापन
सम्मेलन के संरक्षक व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने बताया कि इस महासम्मेलन में कनाडा, जापान, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, उज्बेकिस्तान, फिलिपींस व पोलैंड सहित कई देशों से विशेषज्ञ आए हैं। सम्मेलन में एक हजार से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कुल 12 विषय निर्धारित किए हैं, जिनमें विशेषज्ञ व्याख्यान व पोस्टर के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान कर रहे हैं। सम्मेलन के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और स्थिरता के लिए भविष्य में होने वाले अनुसंधान की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलेगी।
विदेशी मेहमानों ने अनुभव साझा किए
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने बताया कि सम्मेलन में मुख्य रूप से जर्मनी से डॉ. एंड्रियास बॉर्नर दॉ कंजरवेशन एंड यूटिलाइजेशन ऑफ प्लांट जेनेटिक रिर्सोसिज व डॉ. मेनफ्रेड क्लाइमेट रेजिलिएंट एंड एग्रीकल्चर 2025-2050 : क्लाइमेट रेसिटेंट क्रॉप्स प्लस फोसिल फ्यूल फ्री फार्मिंग, पोलैंड से डॉ. लुकाज ड्रेवनिक कन्सट्रक्टिड वेटलैंडस फॉर एग्रीकल्चरल रन ऑफ ट्रीटमेंट व जापान से वैज्ञानिक प्रो. टाकुरो शीनानो रेडियोएक्टिव सीजियम ट्रांसफर फ्रॉम एग्रीकल्चरल सॉइल टू क्रॉप्स, उज्बेकिस्तान से प्रो. डिलफूजा पी. जभोरवा इन्फ्लुएंस ऑफ बॉयोचार एप्लीकेशन ऑन ग्रोथ एंड फिजियोलॉजिकल प्रॉपर्टीज एंड सॉइल एन्जाइमेटिक एक्टिविटीज, आस्ट्रेलिया से डॉ. केदर अधिकारी जेनेटिक वेरियशन एक्जिस्ट फॉर हीट टॉलरेंस इन फाबा बीन व डॉ. सूर्यकांत एडवांस टेक्नोलॉजिस एंड साइंटिफिक इनोवेशन फॉर ब्रिडिंग क्लाइमेट रेजिलियंट क्रॉप्स, डॉ. कुमार प्रणव प्लांट ग्रोथ प्रोमोटिंग बैक्टीरिया एंड फाइटोरेमेडिएशन, स्वीडन से डॉ. मोनिका बागा जीनोमिक्स स्ट्रेटेजिज टू अंडरस्टेंड एंड इम्पू्रव फिल्ड सरवाइवल इन ऑटोमन सिडिड सीरियल, यूनाइटेड किंगडम से प्रोफेसर रत्न यादव चैलेंजिज एंड ऑपोरच्युनिटिज फॉर मीटिंग दॉ नीड्स ऑफ 21 फस्ट सन्चुरी प्लांट ब्रिडिंग, कनाडा से डॉ. रविंद्र नाथ छिबर प्लसिज इम्पोरटेंट कोन्ट्रीब्यूटर्स टू इम्प्रूवड ह्यूमन हेल्थ न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी एंड सस्टेनएबल व अमेरिका से डॉ. अशोक कुमार धवन क्लाइमेट चेंज एज सेलेक्शन प्रेसर : एक्ट्रापोलेशन फ्रॉम इवोलुशन ऑफ शुगरकेन एंड अदर सी फॉर प्लांट विषय पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किया।