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Hisar News: डिजिटल संस्कृति मापन मनोवैज्ञानिक उपकरण को कुलपति ने किया लॉन्च
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जीजेयू एक डिजिटल संस्कृति मापन मनोवैज्ञानिक उपकरण को लॉन्च करते कुलपति प्रो. नरसीराम बिश्नोई के
हिसार। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) की शिक्षा संकाय की अधिष्ठाता प्रो. वंदना पूनिया और उनकी टीम ने डिजिटल संस्कृति मापन (डीसीएस-पीवीआरआरएलएसएसएस) नामक मनोवैज्ञानिक उपकरण तैयार किया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसीराम बिश्नोई ने इस उपकरण को लॉन्च किया है। इस अवसर पर कुलपति के तकनीकी सलाहकार प्रो. संदीप राणा भी उपस्थित रहे। कुलपति ने प्रो. पूनिया और उनकी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और उनके शिक्षा और डिजिटल मनोविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।
डिजिटल संस्कृति मापन विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन करता है, जैसे कि ई-लर्निंग के प्रति दृष्टिकोण, साइबर संस्कृति की जागरूकता, सोशल मीडिया का प्रभाव, साइबर संस्कृति के प्रति अनुकूलन, साइबर उत्पादकता और साइबर कानूनों की जानकारी। यह उपकरण शिक्षकों, विद्यार्थियों और संस्थानों के लिए डिजिटल युग को समझने और उसके अनुकूल होने में सहायक सिद्ध होगा।
प्रो. पूनिया ने बताया कि यह उपकरण डिजिटल संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का आकलन करने के लिए तैयार किया गया है और मनोवैज्ञानिक अनुसंधान व मूल्यांकन के क्षेत्र में टीम का सातवां प्रमुख योगदान है। यह उपकरण डॉ. रीना रानी (बीपीएस महिला विश्वविद्यालय, सोनीपत, हरियाणा), डॉ. स्नेह लता (तिरुपति कॉलेज ऑफ एजुकेशन, फतेहाबाद, हरियाणा) और डॉ. सुरेंद्र सहारण (जीवी कॉलेज, संगरिया, हनुमानगढ़, राजस्थान) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसे नेशनल साइकोलॉजिकल कॉरपोरेशन, आगरा द्वारा प्रकाशित किया गया है।
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डिजिटल संस्कृति मापन विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन करता है, जैसे कि ई-लर्निंग के प्रति दृष्टिकोण, साइबर संस्कृति की जागरूकता, सोशल मीडिया का प्रभाव, साइबर संस्कृति के प्रति अनुकूलन, साइबर उत्पादकता और साइबर कानूनों की जानकारी। यह उपकरण शिक्षकों, विद्यार्थियों और संस्थानों के लिए डिजिटल युग को समझने और उसके अनुकूल होने में सहायक सिद्ध होगा।
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प्रो. पूनिया ने बताया कि यह उपकरण डिजिटल संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का आकलन करने के लिए तैयार किया गया है और मनोवैज्ञानिक अनुसंधान व मूल्यांकन के क्षेत्र में टीम का सातवां प्रमुख योगदान है। यह उपकरण डॉ. रीना रानी (बीपीएस महिला विश्वविद्यालय, सोनीपत, हरियाणा), डॉ. स्नेह लता (तिरुपति कॉलेज ऑफ एजुकेशन, फतेहाबाद, हरियाणा) और डॉ. सुरेंद्र सहारण (जीवी कॉलेज, संगरिया, हनुमानगढ़, राजस्थान) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसे नेशनल साइकोलॉजिकल कॉरपोरेशन, आगरा द्वारा प्रकाशित किया गया है।
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