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Hisar News: रूठों को मना एक मंच पर लाने में जुटे दिग्गज नेता, अपने पक्ष में माहौल करने की तैयारी

Sun, 15 Sep 2024 05:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sun, 15 Sep 2024 05:19 AM IST
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Veteran leaders engaged in bringing the angry people together on one platform, preparing to create an atmosphere in their favor
भिवानी। विधानसभा चुनावों में अब प्रत्याशियों के मैदान में आने के बाद मुकाबला जहां रोचक होने लगा है वहीं अब रुठों को मनाने के लिए भी मान-मनोव्वल शुरू हो गई है। दिग्गज भी रूठों को मना अपने पक्ष में माहौल करने में जुटे हैं। सबसे अधिक तोशाम और बवानीखेड़ा में चुनावी घमासान मचा है। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर बवानीखेड़ा सीट पर चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक रामकिशन फौजी भी आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वहीं पंचायत कर अपना चुनावी माहौल खड़ा करने में जुटे हैं। जबकि कांग्रेस का प्रत्याशी प्रदीप नरवाल भी इलाके में कड़ी टक्कर देने के लिए मजबूत दावेदारी में है।
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तोशाम में सांसद चौ धर्मबीर सिंह और किरण चौधरी श्रुति चौधरी के नामांकन से पहले ही एक मंच पर आ चुके हैं। धर्मबीर सिंह ने तो तोशाम आवास पर कार्यकर्ता बैठक बुलाकर श्रुति चौधरी को समर्थन दिया है। हालांकि अभी भी बंसीलाल परिवार में आपसी फूट और राजनीतिक महत्वाकांक्षा की वजह से मुकाबला कड़ी टक्कर का बना है। वहीं भिवानी विधानसभा सीट पर मौजूदा विधायक भी पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में उनके प्रति स्थानीय नेताओं और जनता की नाराजगी होना भी लाजमी हैं, वे भी अब रूठों को मनाने में जुटे हैं। वहीं बवानीखेड़ा में तो नेताओं के बीच ही घमासान है, ऐसे में मतदाता भी अब अगला नेता चुनने के लिए चुप्पी साधे बैठे हैंं। यहां पर भाजपा का नया प्रत्याशी कपूर सिंह वाल्मीकि चुनावी मैदान में है।
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लोहारू सीट पर वित्तमंत्री जयप्रकाश दलाल चुनावी मैदान में हैं, जबकि समाजसेवी राजबीर फरटिया भी यहां चुनावी ताल कांग्रेस से ठोक चुके हैं। दोनों के बीच यहां भी मामला दिलचस्प बना है। किसान आंदोलन में वित्तमंत्री की इलाके में काफी नाराजगी भी देखी गई थी, लेकिन अब फिर से चुनाव है। नेता भी जनता के बीच पहुंच रहे हैं, किसानों को मनाना भी बड़ी चुनौती है। भिवानी जिले की चारों विधानसभा में इस बार किस पार्टी का पलड़ा भारी होगा और कौन जीत का नया कीर्तिमान बनाएगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है। मतदाता भी चुप बैठकर चुनावी माहौल में देख रहे हैं कि किसका पलड़ा भारी होगा।
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