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एचएसवीपी के कर्मचारियों से परेशान होकर सहायक ने जहरीला पदार्थ निगल दी जान
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हिसार। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में सहायक के पद पर कार्यरत 52 वर्षीय रतन सिंह ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या कर ली। मंगलवार शाम को खेत में बने चौबारे में उसका शव मिला। आत्महत्या करने से पहले रतन सिंह ने दो पेज का सुसाइड नोट लिया है। नोट में एचएसवीपी के अधीक्षक सुरजीत, जेई अनूप के अलावा सुशील कुमार, अजय गोयल, प्रदीप राय और दीपक को मौत का जिम्मेवार ठहराया है। आजाद नगर थाना पुलिस ने मृतक के भाई मंजीत की शिकायत पर उक्त छह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस को दी गई शिकायत में आर्य नगर निवासी मंजीत ने बताया कि वह नगर निगम में डीसी रेट पर चालक के पद पर कार्यरत है। हम नौ भाई-बहन हैं। बड़ा भाई रतन सिंह एचएसवीपी में सहायक के पद पर कार्यरत था। मंगलवार दोपहर को भाई शाहपुर मार्ग पर खेतों में गया था। मैं और मेरा भतीजा अंकित भी खेत में मौजूद थे। दोपहर बाद करीब 3 बजे भाई ने मुझे कहा कि मेरे ऑफिस के कर्मचारी व अन्य लोग मुझे बार-बार परेशान कर रहे हैं। यह बात कह कर वह चौबारे में चला गया। शाम 5 बजे जब चौबारे पर गया तो भाई अचेत था। इसके बाद भाई को नागरिक अस्पताल लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
भ्रष्टाचार का झूठा केस दर्ज कराने का आरोप
मंजीत ने बताया कि चौबारे में भाई द्वारा लिखा हुआ दो पेज का सुसाइड नोट मिला है। अजय गोयल और दीपक निवासी फतेहाबाद ने मेरे भाई रतन के खिलाफ भ्रष्टाचार का झूठा केस दर्ज करवाया था। सुशील कुमार मेहता, प्रदीप राय के अलावा जेई अनूप और अधीक्षक सुरजीत मेरे भाई को प्रताड़ित और परेशान करते थे। उनकी वजह से मेरे भाई की मौत हुई है। एसआई रमेश कुमार का कहना है कि मृतक के भाई की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पुलिस को दी गई शिकायत में आर्य नगर निवासी मंजीत ने बताया कि वह नगर निगम में डीसी रेट पर चालक के पद पर कार्यरत है। हम नौ भाई-बहन हैं। बड़ा भाई रतन सिंह एचएसवीपी में सहायक के पद पर कार्यरत था। मंगलवार दोपहर को भाई शाहपुर मार्ग पर खेतों में गया था। मैं और मेरा भतीजा अंकित भी खेत में मौजूद थे। दोपहर बाद करीब 3 बजे भाई ने मुझे कहा कि मेरे ऑफिस के कर्मचारी व अन्य लोग मुझे बार-बार परेशान कर रहे हैं। यह बात कह कर वह चौबारे में चला गया। शाम 5 बजे जब चौबारे पर गया तो भाई अचेत था। इसके बाद भाई को नागरिक अस्पताल लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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भ्रष्टाचार का झूठा केस दर्ज कराने का आरोप
मंजीत ने बताया कि चौबारे में भाई द्वारा लिखा हुआ दो पेज का सुसाइड नोट मिला है। अजय गोयल और दीपक निवासी फतेहाबाद ने मेरे भाई रतन के खिलाफ भ्रष्टाचार का झूठा केस दर्ज करवाया था। सुशील कुमार मेहता, प्रदीप राय के अलावा जेई अनूप और अधीक्षक सुरजीत मेरे भाई को प्रताड़ित और परेशान करते थे। उनकी वजह से मेरे भाई की मौत हुई है। एसआई रमेश कुमार का कहना है कि मृतक के भाई की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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