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Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Under plot transfer permission, there will be no rounds of HSVP office for biometric, facility will be available sitting at home

प्लॉट ट्रांसफर परमिशन के तहत बायोमीट्रिक के लिए एचएसवीपी कार्यालय के नहीं पड़ेंगे चक्कर, घर बैठे मिलेगी सुविधा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2022 12:45 AM IST
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Under plot transfer permission, there will be no rounds of HSVP office for biometric, facility will be available sitting at home
हिसार। अब सेक्टरों में प्लॉट की ट्रांसफर परमिशन के तहत बायोमीट्रिक के लिए प्लॉट खरीदने व बेचने वाले को एचएसवीपी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्हें यह सुविधा घर पर ही मिल जाएगी। हालांकि इसके लिए उन्हें एक निर्धारित फीस देनी होगी। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने प्लॉटधारकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की है।
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बता दें कि अगर किसी व्यक्ति का सेक्टर में प्लॉट है और वह उसे बेचना चाहता है। इसके लिए उसे एचएसवीपी से ट्रांसफर परमिशन लेनी पड़ती है। इस प्रक्रिया के तहत प्लॉट बेचने वाले व खरीदने वाले दोनों की बायोमीट्रिक हाजिरी एचएसवीपी कार्यालय में लगती है। इसके लिए दोनों पार्टियों को कार्यालय में आना पड़ता है। कई बार किसी तकनीकी समस्या या अन्य कारण से हाजिरी नहीं लग पाती तो दोबारा से उन्हें कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी से छुटकारा पाने के लिए एचएसवीपी ने एक नई व्यवस्था लागू की है।
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4 मरले से छोटे प्लॉट व गंभीर बीमारी वालों के लिए नहीं लगेगी कोई फीस
इस सुविधा के लिए एचएसवीपी ने अलग-अलग फीस निर्धारित की है। 4 से 6 मरले तक के प्लॉट के केस में 15 हजार रुपये व इससे बड़े आकार के प्लॉट के केस में 25 हजार रुपये फीस निर्धारित की गई है। सीनियर सिटीजन के मामले में फीस में 5 हजार रुपये की छूट मिलेगी। वहीं 4 मरले से छोटे प्लॉट व गंभीर बीमारी के केस में यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी।
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दूसरे जिले में भी जाने से मिलेगा छुटकारा
इसके अलावा बायोमीट्रिक हाजिरी के केस में एचएसवीपी ने प्लॉटधारक को एक और सुविधा प्रदान की है। इसके तहत अगर प्लॉट का मालिक अपनी सुविधानुसार प्रदेश में स्थित एचएसवीपी के किसी भी कार्यालय में बायोमीट्रिक हाजिरी लगा सकेगा। इससे पहले तक प्लॉटधारक को उसी जिले के कार्यालय में बायोमीट्रिक हाजिरी करवानी होती थी, जिस जिले में उसका प्लॉट है।

ओटीपी का झंझट किया खत्म
उधर एचएसवीपी ने रि-अलॉटमेंट के केस में प्लॉट बेचने वाले के पास आने वाले ओटीपी के झंझट को खत्म कर दिया जाएगा। अब प्लॉट खरीदने वाले को ऐसे किसी ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ऑनलाइन की पावर ऑफ अटॉर्नी की सुविधा
वहीं एचएसवीपी ने पावर ऑफ अटॉर्नी की सुविधा को भी ऑनलाइन उपलब्ध करवा दिया है। अब इसके लिए प्लॉटधारक को कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
वर्जन
विभाग ने कुछ नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। इनसे प्लॉटधारकों को काफी फायदा होगा।
राजेश खौथ, संपदा अधिकारी, एचएसवीपी
वर्जन
विभाग ने जो फैसला लिया है, वह प्लॉटधारकों के हित को देखते हुए लिया है। प्लॉटधारक काफी समय से इन सुविधाओं को देने की मांग कर रहे थे।
प्रवीण सिंगल, प्रॉपर्टी डीलर
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