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उम्मीद की मशाल : सिलाई-कढ़ाई पुरानी बात, अब हाईड्रोलिक मशीन संभालती हैं म्हारी छोरियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jun 2022 11:00 PM IST
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Torch of hope: Sewing-embroidery is an old thing, now the hydraulic machine handles my girls
रानियां की फैक्ट्री में लगी मशीन पर काम करती युवतियां। संवाद - फोटो : Sirsa
अमन बांसल
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रानियां (सिरसा)। एक फिल्म का डायलॉग है म्हारी छोरिया छोरों सै कम है के। यह बात रानियां की दो युवतियों पर सटीक बैठती है। छुट्टियों में सिलाई-कढ़ाई सीखने की परंपरा को पुरानी साबित करते हुए लक्ष्मी और मनजीत हाईड्रोलिक मशीन संभाल रहीं हैं। पहले काम पर लेने से इनकार करने वाले फैक्टरी संचालक भी इनके काम को देखकर हैरान है।
आम तौर पर कहा जाता है कि युवतियां पढ़ाई-लिखाई कर या तो कार्यालय में नौकरी करती हैं या फिर सिलाई-कढ़ाई जैसे व्यवसाय में जाती हैं, लेकिन रानियां की लक्ष्मी और मनजीत ने इस धारणा को बदल दिया है। बीए के बाद दोनों ने घर पर रहकर आराम करने या साधारण काम सीखने की बजाय मैकेनिक का काम सीखने की ठानी। उन्होंने रानियां स्थित विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज में काम करने के लिए नौकरी हासिल की। शुरुआत में फैक्टरी संचालक ने युवतियों को ये कहते हुए काम पर लेने से इंकार कर दिया कि लड़कियां क्या काम करेंगी, लेकिन अब काम देखा तो हैरान है। हालांकि दोनों में से एक युवती मनजीत आईलेट्स कर विदेेश जाना चाहती है। संवाद
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मनजीत : छुट्टियों में सीख रही मशीनों का काम, संभालती है कटर
रानियां निवासी मनजीत बताती है कि उसने बीए तक पढ़ाई कर ली है। आगे उसकी आईलेट्स कर भविष्य में विदेेश जाने की योजना है। छुट्टियां थी तो सोचा कि इनका सदुपयोग करते हुए कोई काम सीखा जाए। लेकिन साधारण काम सीखने की बजाय इंजीनियरिंग में जाना उचित समझा। उसने फैक्टरी में काम शुरू किया। मनजीत ने बताया कि इस समय उसकी बड़ी कटर मशीन पर ड्यूटी है। मनजीत बताती है उसका भाई भी शेफ बनने के लिए प्रयास कर रहा है, यानी लीक से हटकर काम करने का जज्बा परिवार में है।
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लक्ष्मी : मशीनें देखीं तो काम सीखने की ठानी
रानियां की विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज में मैकेनिक का काम सीख लक्ष्मी सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक मशीन को चलाती है। हाइड्रोलिक प्रेशर मशीन पर जोखिम पूर्ण कार्य करके लक्ष्मी सभी को चुनौती दे रही है। लक्ष्मी बताती है कि एक दिन वह फैक्टरी में आई थी। मशीनों को देखकर उसने एक अलग सा काम करने की ठानी। इसके बाद उन्होंने फैक्ट्ररी में मैकेनिकल का काम करने के बारे में सोचा। लक्ष्मी ने बताया कि उसने बीए की हुई है। पहले कभी नहीं सोचा था कि मैकेनिक का काम करेगी, लेकिन अब पूरी लग्न और मेहनत के साथ काम सीख रही हैं। उसका दावा है कि वह आने वाले समय में भी मैकेनिक में ही कॅरिअर बनाएगी।
पहले हाइड्रोलिक मशीन के काम को कर दिया था मना : रजत जांगड़ा
विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज के संचालक रजत जांगड़ा ने बताया कि इस कार्य में पहली बार मैकेनिक के पद पर लड़कियां आगे आ रही हैं। हालांकि यह कार्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन लड़कियां बेहतरीन कार्य कर रहीं हैं। शुरुआती दौर में हालांकि हमने हाइड्रोलिक मशीन के कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति करने से इंकार कर दिया था, लेकिन दोनों लड़कियों की कार्य कुशलता को देखते हुए उन्होंने यह कार्य सौंप दिया हैं। इसमें अब वे दोनों काफी निपुण हो चुकी हैं।

पहले जो लोग बनाते थे बातें, अब करते हैं सराहना
जब भी कोई लीक से हटकर काम शुरू करते हैं तो लोग बातें बनाते ही हैं। इन दोनों युवतियों के साथ भी ऐसा ही हुआ। जब लड़कियों ने पहले बार कार्य करना शुरू किया तो आसपास के लोगों ने बहुत सी बातें बनाई, लेकिन आज वहीं लोग लड़कियों की मेहनत को देखकर सराहना करते हैं। संचालक रजत जांगड़ा ने बताया कि जोखिम पूर्ण कार्य को लड़कियां चुनौतीपूर्ण कार्य करती है तो लोग उन्हें देखने व फोटो लेने के लिए आते रहे हैं। असके कारण बेटियों का मनोबल और अधिक बढ़ रहा है।
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