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प्लॉटधारकों को सेक्टर के आरक्षित कोटे के प्लॉट की 30 दिन बाद भी नहीं मिली एनओसी
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हिसार। सेक्टर में आरक्षित कोटे के प्लॉट की एनओसी के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) प्लॉटधारकों को चक्कर कटवा रहा है। स्थिति यह है कि एक माह बाद भी प्लॉटधारकों को एनओसी नहीं मिल रही है। एनओसी के न मिलने से प्लॉटधारक प्लॉट को बेच नहीं पा रहे हैं।
बता दें कि एचएसवीपी की तरफ से सेक्टरों में प्लॉट आवंटन में कुछ वर्गों के लिए कोटा तय किया हुआ है, जिसमें एडवोकेट, एससी, बीसी, स्वतंत्रता सेनानी, सेना के जवान, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, सरकार कर्मचारी, विधवा, युद्ध वीरांगना का कोटा शामिल है। हालांकि इसमें विभाग की शर्त होती है कि कोटे के तहत एक व्यक्ति को प्रदेश भर में एक ही प्लॉट दिया जाता है। भविष्य में प्लॉटधारक अगर इस प्लॉट को बेचता है तो उसे पहले विभाग ने एनओसी लेनी पड़ती है। एनओसी मिलने के बाद ही उक्त प्लॉटधारक प्लॉट को बेच सकता है।
मैंने एनओसी के लिए आवेदन किया था। मुझे डेढ़ माह बाद एनओसी जारी की गई। उसके लिए भी मैंने कार्यालय के कई बार चक्कर काटे। - प्रवीण
मैंने एनओसी लेने के लिए आवेदन किया हुआ है। आवेदन किए हुए मुझे एक माह से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक मुझे एनओसी नहीं मिली। - रेखा
अब कॉर्नर के बचे हुए प्लॉटों के टुकड़ों की बिक्री करेगा एचएसवीपी
अब विभाग सेक्टरों में कॉर्नर में बचे हुए प्लॉटों के टुकड़ों की बिक्री करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि इसमें सेक्टरवासी भी रुचि दिखा रहे हैं। पॉलिसी आने के साथ विभाग के पास आवेदन आने शुरू हो गए हैं। बता दें कि अक्सर सेक्टरों में छोटे-छोटे जमीन के टुकड़े बच जाते हैं। चूंकि जिन प्लॉट के साथ ये टुकड़े जुड़े होते हैं, उक्त प्लॉटधारक ही इनका इस्तेमाल करते हैं। अब विभाग ने इन टुकड़ों को बेचने का फैसला किया है, जिससे उसे कुछ अतिरिक्त आमदनी हो सके।
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एनओसी जारी करने से पहले सभी जगहों से रिपोर्ट मंगवानी पड़ती है कि उक्त प्लॉटधारक के नाम पर किसी और जगह कोटे का प्लॉट है या नहीं। इस रिपोर्ट को आने में ही 15-20 दिन लग जाते हैं। ऐसे में एनओसी देने में एक माह का समय लग जाता है। प्लॉटों के टुकड़े खरीदने के लिए फिलहाल दो-तीन आवेदन आए हैं। प्लॉटधारक इन पर निर्माण कार्य भी कर सकता है।
- प्रीतपाल सिंह, संपदा अधिकारी, एचएसवीपी
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बता दें कि एचएसवीपी की तरफ से सेक्टरों में प्लॉट आवंटन में कुछ वर्गों के लिए कोटा तय किया हुआ है, जिसमें एडवोकेट, एससी, बीसी, स्वतंत्रता सेनानी, सेना के जवान, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, सरकार कर्मचारी, विधवा, युद्ध वीरांगना का कोटा शामिल है। हालांकि इसमें विभाग की शर्त होती है कि कोटे के तहत एक व्यक्ति को प्रदेश भर में एक ही प्लॉट दिया जाता है। भविष्य में प्लॉटधारक अगर इस प्लॉट को बेचता है तो उसे पहले विभाग ने एनओसी लेनी पड़ती है। एनओसी मिलने के बाद ही उक्त प्लॉटधारक प्लॉट को बेच सकता है।
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मैंने एनओसी के लिए आवेदन किया था। मुझे डेढ़ माह बाद एनओसी जारी की गई। उसके लिए भी मैंने कार्यालय के कई बार चक्कर काटे। - प्रवीण
मैंने एनओसी लेने के लिए आवेदन किया हुआ है। आवेदन किए हुए मुझे एक माह से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक मुझे एनओसी नहीं मिली। - रेखा
अब कॉर्नर के बचे हुए प्लॉटों के टुकड़ों की बिक्री करेगा एचएसवीपी
अब विभाग सेक्टरों में कॉर्नर में बचे हुए प्लॉटों के टुकड़ों की बिक्री करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि इसमें सेक्टरवासी भी रुचि दिखा रहे हैं। पॉलिसी आने के साथ विभाग के पास आवेदन आने शुरू हो गए हैं। बता दें कि अक्सर सेक्टरों में छोटे-छोटे जमीन के टुकड़े बच जाते हैं। चूंकि जिन प्लॉट के साथ ये टुकड़े जुड़े होते हैं, उक्त प्लॉटधारक ही इनका इस्तेमाल करते हैं। अब विभाग ने इन टुकड़ों को बेचने का फैसला किया है, जिससे उसे कुछ अतिरिक्त आमदनी हो सके।
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एनओसी जारी करने से पहले सभी जगहों से रिपोर्ट मंगवानी पड़ती है कि उक्त प्लॉटधारक के नाम पर किसी और जगह कोटे का प्लॉट है या नहीं। इस रिपोर्ट को आने में ही 15-20 दिन लग जाते हैं। ऐसे में एनओसी देने में एक माह का समय लग जाता है। प्लॉटों के टुकड़े खरीदने के लिए फिलहाल दो-तीन आवेदन आए हैं। प्लॉटधारक इन पर निर्माण कार्य भी कर सकता है।
- प्रीतपाल सिंह, संपदा अधिकारी, एचएसवीपी