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Hisar News: धान में नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20% की जाए, सरकारी खरीद सुनिश्चित भी सुनिश्चित हो

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:17 AM IST
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The moisture limit for paddy should be raised from 17% to 20%, and government procurement must also be ensured.
सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते धरने पर बैठे किसान यूनियन के नेता। संवाद - फोटो : shiv tripathi
हांसी। अनाज मंडी में धान और बाजरे की सरकारी खरीद में अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए भारतीय किसान मजदूर यूनियन ने बुधवार को मार्केट कमेटी कार्यालय में डेरा डाल दिया।
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यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कोथ ने कहा कि किसानों को फसल बेचने के लिए परेशान होना पड़ रहा है और नमी के नाम पर 200 से 300 जबकि कई जगह 400 रुपये प्रति क्विंटल तक की कटौती की जा रही है। उन्होंने धान में नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की।
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कोथ ने कहा कि प्रदेश की करीब 98 मंडियों में बाजरे की खरीद की व्यवस्था की गई है लेकिन उनके अनुसार 97 मंडियों में एफसीआई ने अभी खरीद शुरू नहीं की है। निजी खरीदार बाजरा 1,800 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास खरीद रहे हैं। सरकार की ओर से 600 रुपये भावांतर देने के बावजूद किसानों को नुकसान हो रहा है। सरकार को सरकारी एजेंसी के माध्यम से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद करनी चाहिए।
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उन्होंने बताया कि प्रदेश की कई मंडियों का दौरा करने के दौरान धान की खरीद सुचारू नहीं मिली। कई जगह किसानों को सेलर नहीं आने की बात कहकर इंतजार करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान का सेलर से कोई लेना-देना नहीं है। एफसीआई, हैफेड या डीएफएससी जिस एजेंसी को खरीद की जिम्मेदारी दी गई है, उसे किसान का पूरा धान खरीदना चाहिए।
किसान नेता धर्मपाल बड़ाला ने कहा कि इस बार बाजरे की फसल में कोई बड़ी गुणवत्ता संबंधी समस्या नहीं है। पिछले साल बेमौसम बारिश से बाजरे में नमी और रंग फीका पड़ने के कारण किसानों को 200 से 300 रुपये तक नुकसान हुआ था। उन्होंने इस बार तत्काल सरकारी खरीद शुरू करने की मांग की।
हरियाणा मंडी एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान रामअवतार तायल ने भी किसानों की मांगों का समर्थन किया। इस दौरान किसानों ने कहा कि सरकारी खरीद और उचित भुगतान सुनिश्चित होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

बाजरे की खरीद शुरू न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी :
कोथ ने कहा कि 17 प्रतिशत नमी की सीमा उस समय तय की गई थी जब धान हाथ से काटा जाता था। अब मशीनों से कटाई होने के कारण नियम में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने मंडियों में डिजिटल कांटे लगाने की भी मांग की। चेतावनी दी कि सभी मंडियों में बाजरे की खरीद शुरू नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
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