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Hisar News: तस्वीर भी बदलेगी, तकदीर भी संवरेगी...विकास के आसमान पर हिसार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 11:43 PM IST
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The landscape will change, and fortunes will improve... Hisar rises in the firmament of development
आईएमसी प्रस्तावित प्रोजेक्ट
हिसार। महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट और प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) हिसार के विकास को नई दिशा देने जा रहे हैं। करीब 8 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले ये दोनों प्रोजेक्ट न केवल शहर की तस्वीर बदलेंगे बल्कि रोजगार, उद्योग और निवेश के नए अवसर भी पैदा करेंगे। एयरपोर्ट ने हिसार को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने का रास्ता खोला है जबकि आईएमसी प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक के रूप में विकसित होने की ओर बढ़ रहा है।
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पिछले आठ वर्षों में हिसार के विकास को नई गति मिली है। इनमें महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। अब एयरपोर्ट के माध्यम से हिसार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने की तैयारी चल रही है। वहीं एयरपोर्ट के निकट विकसित होने वाला इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) शहर में औद्योगिक क्रांति का आधार बनेगा।
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आईएमसी की आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए एनआईसीडीसी हरियाणा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर हिसार प्रोजेक्ट लिमिटेड करीब 700 करोड़ रुपये खर्च करेगा। एयरपोर्ट परियोजना पर लगभग 3 हजार करोड़ रुपये और आईएमसी परियोजना पर करीब 5 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस प्रकार दोनों परियोजनाओं में कुल 8 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा।
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आईएमसी के लिए 2,988 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 4,694.46 करोड़ रुपये है। यह क्लस्टर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब के औद्योगिक उत्पादों व कच्चे माल को कांडला बंदरगाह तक तेजी से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आईएमसी में एयरोस्पेस एवं डिफेंस सेक्टर के लिए 343.20 एकड़, फूड प्रोसेसिंग के लिए 172 एकड़, इंजीनियरिंग एवं फैब्रिकेशन के लिए 289.80 एकड़, रेडीमेड गारमेंट उद्योग के लिए 92.20 एकड़, कॉमन रेडी शेड्स के लिए 12.73 एकड़ तथा लॉजिस्टिक पार्क के लिए 70 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है।
परियोजना के प्रथम चरण में 1,605 एकड़ भूमि विकसित की जाएगी। इसमें उद्योग एवं लॉजिस्टिक गतिविधियों के लिए 980.20 एकड़ (61 प्रतिशत), कॉमर्शियल उपयोग के लिए 39.02 एकड़ (2 प्रतिशत), पब्लिक एवं सेमी-पब्लिक सुविधाओं के लिए 48.60 एकड़ (3 प्रतिशत), आवासीय क्षेत्र के लिए 34.90 एकड़ (2 प्रतिशत), सर्विस सेक्टर के लिए 28.50 एकड़ (2 प्रतिशत), ग्रीन एवं वाटर बॉडी के लिए 242.52 एकड़ (15 प्रतिशत) तथा सड़क एवं यूटिलिटी सुविधाओं के लिए 231.26 एकड़ (15 प्रतिशत) भूमि का उपयोग किया जाएगा।
हिसार एयरपोर्ट के तीसरे चरण में करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से नया टर्मिनल बनाया जा रहा है। इसके वर्ष 2027 तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद हिसार से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। साथ ही एयरक्राफ्ट रिपेयर और मेंटेनेंस के लिए एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सुविधा विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
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हिसार महानगर प्राधिकरण ने भी पकड़ी रफ्तार
करीब तीन वर्ष पहले हिसार महानगर विकास प्राधिकरण (एचएमडीए) की अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद तत्कालीन मंडल आयुक्त अशोक गर्ग को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया था। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद यह पद लंबे समय तक खाली रहा। अब मंडल आयुक्त गीता भारती को एचएमडीए का सीईओ बनाया गया है। उन्होंने प्राधिकरण का मास्टर प्लान और क्षेत्रीय नक्शा अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे प्राधिकरण की योजनाओं को जल्द गति मिलने की उम्मीद है।
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पिछले एक वर्ष में मिलीं दो बड़ी सौगातें
1. सुकून का नया ठिकाना बना टाउन पार्क
पिछले एक वर्ष में हिसार को दो महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं। इनमें टाउन पार्क प्रमुख है। रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक फव्वारों से सुसज्जित यह पार्क शहरवासियों के लिए प्रमुख मनोरंजन स्थल बन चुका है। शाम के समय बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने और समय बिताने पहुंचते हैं।
2. ब्लू बर्ड झील भी बनी आकर्षण का केंद्र
टाउन पार्क के बाद ब्लू बर्ड झील भी शहरवासियों के लिए पसंदीदा स्थल के रूप में उभरी है। प्राकृतिक वातावरण और शांत माहौल के कारण यहां लोगों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।
3. सातरोड आरओबी ने शहर को दी नई रफ्तार
इस वर्ष दक्षिण बाइपास पर सातरोड रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण पूरा होने से यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है। आरओबी बनने के बाद भारी वाहनों का शहर के अंदर प्रवेश लगभग समाप्त हो गया है।


निर्माण कार्य के दौरान करीब एक वर्ष तक भारी वाहनों को सेक्टर-9 और सेक्टर-11 क्षेत्र से होकर निकाला जा रहा था, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब आरओबी शुरू होने के बाद भारी वाहन सीधे दक्षिण बाइपास से गुजर रहे हैं, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम हुआ है और लोगों को राहत मिली है।
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