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Hisar News: भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण मामले में आठ वर्ष बाद फिर से शुरू होगी जांच, दो सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशकों सहित चार सदस्यीय टीम पहुंची हांसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 May 2025 12:55 AM IST
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The investigation into the Bhatla social boycott case will resume after eight years, a four-member team including two retired police directors general has arrived in Hansi.
हांसी। हांसी विश्राम गृह में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशकों से मिलने पहुंचे रजत कलसन व अन्य। जाग
हांसी (हिसार)। भाटला में आठ वर्ष पहले हुए सामाजिक बहिष्कार प्रकरण के मामले की वीरवार को फिर से जांच होगी। जांच के लिए दो सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशकों सहित चार सदस्यों की टीम हांसी पहुंची। वहीं जांच को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। जांच सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर की जा रही है।
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उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त डीजीपी कमलेंद्र प्रसाद, वीसी गोयल के साथ दो सेवानिवृत्त डीएसपी बुधवार शाम को जांच के लिए पहुंचे। उनका ठहराव लोकनिर्माण विभाग के विश्राम गृह में करवाया गया। इस दौरान पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की और मामले की जानकारी दी। अब टीम वीरवार को गांव में जाकर मामले की जांच करेगी।
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टीम अनुसूचित जनजाति के लोगों से मामले की जानकारी लेगी। इस दौरान यह भी जांच की जाएगी कि अभी भी कोई बहिष्कार जैसी बात है या नहीं। इस दौरान पुलिस अधिकारी भी साथ रहेंगे।
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सरकार को टीम के ठहराव की व्यवस्था करने के आदेश
अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि 16 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भाटला प्रकरण में दर्ज मुकदमों में फिर से जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित की थी। लेकिन टीम के लिए सरकार की तरफ से व्यवस्था नहीं की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस एमएम सुंदरेश व जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच के समक्ष भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण के मामले में 25 मार्च को सुनवाई हुई थी। तब फिर से जांच के आदेश दिए थे। साथ ही सरकार को जांच टीम के आने-जाने व ठहराव की व्यवस्था करने के लिए कहा था। कोर्ट ने जांच टीम का सहयोग न करने पर इसे कोर्ट की अवमानना मानने की बात कही है।




ये है मामला
वर्ष 2017 में भाटला गांव में नलकूप पर पानी भरने को लेकर सवर्ण समुदाय के युवकों ने दलित समुदाय के युवकों से मारपीट की थी। इस मामले में दर्ज मुकदमे में समझौता न करने पर गांव के सवर्ण समाज के कुछ लोगों ने भाईचारा कमेटी बनाकर गांव के दलित समाज का मुनादी करवाकर सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। इस मामले में सामाजिक बहिष्कार के चलते पीड़ितों ने गांव के सवर्ण समुदाय के लोगों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज कराए थे। परंतु पुलिस की विशेष जांच टीम ने केवल एक आरोपी चंद्र फौजी को दोषी मानते हुए और बाकी छह को निर्दोष मान अदालत में चालान दे दिया था। जिसके बाद मामला कोर्ट में गया तो कोर्ट ने इन छह आरोपियों को मामले में संलिप्त पाया था। इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए एडवोकेट रजत कल्सन सर्वोच्च न्यायालय में गए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के दो पूर्व महानिदेशकों के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन कर मामले की दोबारा जांच करने के आदेश दिए थे।

वर्जन

भाटला प्रकरण मामले में सर्वोच्च न्यायालय की आदेश पर जांच के लिए टीम पहुंची है। हमारी तरफ से जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। - रविंद्र सांगवान, डीएसपी, हांसी
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