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यूक्रेन से लौटी अपनों की खुशी : आंखों के सामने गिर रहे थे बम, भूख मिटाने को खाई फंगस लगी ब्रेड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 12:53 AM IST
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The happiness of loved ones returned from Ukraine: bombs were falling in front of their eyes, ate fungus bread to satisfy hunger
हिसार। दिल्ली एयरपोर्ट पर अपने परिजनों के साथ छात्रा निष्ठा हुड्डा। - फोटो : Hisar
हिसार। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में अभी भी काफी संख्या में भारतीय फंसे हैं। राहत की बात है कि रोजाना यूक्रेन से सकुशल अपनों की खुशी लौट रही है। यहां पहुंचने पर विद्यार्थियों ने अपना दर्द अपनों के साथ साझा दिया तो परिजनों की आंखें भी भर आई। विद्यार्थियों ने कहा कि जंग की भनक लगने पर ही वह घर लौटना चाह रहे थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि हॉस्टल छोड़ा तो फेल कर देंगे। इसके बाद जब जंग शुरू हुई तो आंखों के सामने बमबारी देख सहम गए। बंकरों में दुबक कर बैठे रहे। भूख-प्यास से जान जा रही थी। नौबत यहां तक आ गई कि भूख मिटाने के लिए फंगस लगी ब्रेड खानी पड़ी।
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हॉस्टल के अंदर घुस आए थे रशियन सैनिक : खुशी
यूक्रेन से लौटी सिविल अस्पताल परिसर में रहने वाली स्टाफ नर्स मीनाक्षी की बेटी खुशी ने बताया कि 27 फरवरी का हॉस्टल के अंदर थे। इसी दौरान रशियन सैनिक हॉस्टल में घुस आए। उन्होंने वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरे जांचे। सैनिकों ने पूछा कि यहां पर कोई यूक्रेन निवासी तो नहीं है। जब उन्हें बताया कि यहां पर सभी भारतीय हैं तो वे चले गए। उसके बाद सभी दहशत में आ गए। अलगे दिन 28 फरवरी को सुबह सुबह हॉस्टल से बाहर निकले। दस किलोमीटर तक पैदल चल रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से लवीव पहुंचे और एक कैब बुक कर स्लोवाकिया गए। यहां भारतीय दूतावास ने हमें एक होटल में रखा और हमारे खान-पीने की व्यवस्था। उसके बाद 4 मार्च की रात हवाई जहाज से दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे और रात करीब दो बजे घर पहुंचे। घर आते ही परिजनों से मिलकर सुकून की सांस ली।
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पाकिस्तानी भी तिरंगा लेकर चल रहे थे
जब बमबारी हो रही थी तो हॉस्टल वार्डन के अलावा सभी स्टाफ हमें अकेला छोड़ कर चला गया। हमारे आठ सीनियर हमारी देखरेख कर रहे थे। जब हम हॉस्टल से बाहर निकले तो सभी ने भारतीय तिरंगा हाथों में लिया हुआ था। खुशी इस बात की थी कि पाकिस्तान के रहने वाले नागरिक भी तिरंगा लेकर चल रहे थे। सभी एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए बमबारी के बीच से निकले।
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पटरी पर भाग कर पकड़ी ट्रेन, यूक्रेन वालों ने की धक्का-मुक्की
अर्बन एस्टेट टू में रहने वाले देवेंद्र हुड्डा की बेटी निष्ठा ने बताया कि वह यूक्रेन के खारकीव शहर की मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही है। जंग के दौरान सायरन बजने पर सभी बंकर में चले जाते। हॉस्टल के बाहर बमबारी हो रही थी। दो दिन में ही खाने-पीने की वस्तुएं खत्म हो गई। उसके बाद चार दिन भूखे प्यास रहे। नौबत यहां तक आ गई दिन में दो-दो ब्रेड खाते उसमें भी फंगस लगी हुई थी। एक मार्च को सुबह हॉस्टल छोड़ दिया। दस किलोमीटर तक पैदल चले और रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। भीड़ के कारण पटरी पर भाग कर ट्रेन पकड़ी। ट्रेन के अंदर घुसे तो वहां के स्थानीय लोगों ने धक्का-मुक्की की। कैब बुक कर पोलैंड बॉर्डर पहुंचे। यहां पर भारतीय के साथ भेदभाव किया जा रहा था। जैसे-तैसे बॉर्डर पार किया तो भारतीय दूतावास ने एक होटल में रुकवाया। दो दिन वहीं रुकने के बाद स्वदेश लौटे।

हिसार। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची खुशी शर्मा अपनी मां मिनाक्षी के साथ।

हिसार। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची खुशी शर्मा अपनी मां मिनाक्षी के साथ।- फोटो : Hisar

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