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मानसून से पहले ही सेक्टरवासियों को सताने लगा जलभराव का डर
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हिसार। सेक्टर 33 में बरसात के समय में जलभराव के कारण स्थितियां विषम हो सकती है। सेक्टरवासियों ने एचएसवीपी व सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर रोष प्रकट किया।
सेक्टरवासियों की बैठक रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी आशीष गुप्ता की अध्यक्षता में हुई। इस मौके पर आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजपाल नैन ने बताया कि शहर के सबसे महंगे सेक्टर 33 के निवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। सेक्टर 33 व 14 पार्ट 2 में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही 45 मीटर चौड़ी रोड दो विभागों की आपसी खींचतान के चलते लापरवाही की भेंट चढ़ सकती है।
सेक्टर में आने के लिए सिरसा रोड से जो प्रवेश मार्ग बनाया जा रहा है उस जगह पर थोड़े से टुकड़े को लेकर को लेकर दोनों विभागों के बीच विवाद होने के कारण रोड के निर्माण में बाधा आ रही है। तकनीकी जानकारों के अनुसार यदि नवनिर्मित सड़क बनने उपरांत ही उस पर से कोई वाहन नहीं गुजरेगा तो उसकी गुणवत्ता खत्म हो जाएगी। जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है वह केंद्रीय भैंस अनुसंधान फार्म की थी, जिसको राज्य सरकार ने हुडा विभाग के लिए एक्वायर कर लिया था। मौजूदा समय में इस जमीन की कीमत करीब 400 करोड़ के आसपास है।
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सेक्टर की समस्याओं का समाधान करवाना विधायक का नैतिक कर्तव्य बनता है। सेक्टर की सड़कों की स्थिति काफी खराब है, पार्कों की स्थिति भी खराब है। सेक्टर में सीवरेज व्यवस्था ठप है। खाली प्लाटों में जंगली कीकर उगी हुई हैं। सीवरेज मेन हॉल के ढक्कन टूटे हुए हैं। लावारिस पशुओं की भरमार है। बैठक में डॉ. नागेश महर्षि, देवेन्द्र राणा, सूबेदार बलवान सिंह, जगदीश गोदारा, सुभाष जुगलान, रणदीप दहिया, एसएस चौहान, जगदीश जिंदल, जितेंद्र नरवाल, रतनलाल श्योकन्द, डॉ. विनोद गोयल, डॉ. देशराज व प्रमोद अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।
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सेक्टरवासियों की बैठक रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी आशीष गुप्ता की अध्यक्षता में हुई। इस मौके पर आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजपाल नैन ने बताया कि शहर के सबसे महंगे सेक्टर 33 के निवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। सेक्टर 33 व 14 पार्ट 2 में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही 45 मीटर चौड़ी रोड दो विभागों की आपसी खींचतान के चलते लापरवाही की भेंट चढ़ सकती है।
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सेक्टर में आने के लिए सिरसा रोड से जो प्रवेश मार्ग बनाया जा रहा है उस जगह पर थोड़े से टुकड़े को लेकर को लेकर दोनों विभागों के बीच विवाद होने के कारण रोड के निर्माण में बाधा आ रही है। तकनीकी जानकारों के अनुसार यदि नवनिर्मित सड़क बनने उपरांत ही उस पर से कोई वाहन नहीं गुजरेगा तो उसकी गुणवत्ता खत्म हो जाएगी। जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है वह केंद्रीय भैंस अनुसंधान फार्म की थी, जिसको राज्य सरकार ने हुडा विभाग के लिए एक्वायर कर लिया था। मौजूदा समय में इस जमीन की कीमत करीब 400 करोड़ के आसपास है।
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सेक्टर की समस्याओं का समाधान करवाना विधायक का नैतिक कर्तव्य बनता है। सेक्टर की सड़कों की स्थिति काफी खराब है, पार्कों की स्थिति भी खराब है। सेक्टर में सीवरेज व्यवस्था ठप है। खाली प्लाटों में जंगली कीकर उगी हुई हैं। सीवरेज मेन हॉल के ढक्कन टूटे हुए हैं। लावारिस पशुओं की भरमार है। बैठक में डॉ. नागेश महर्षि, देवेन्द्र राणा, सूबेदार बलवान सिंह, जगदीश गोदारा, सुभाष जुगलान, रणदीप दहिया, एसएस चौहान, जगदीश जिंदल, जितेंद्र नरवाल, रतनलाल श्योकन्द, डॉ. विनोद गोयल, डॉ. देशराज व प्रमोद अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।