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Hisar News: केंद्र सरकार की टीम को मंगाली झारा में मिली गुलाबी सुंडी, अभी नुकसान के स्तर पर नहीं
Tue, 22 Jul 2025 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 22 Jul 2025 12:14 AM IST
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कृषि विभाग की टीम गांव मंगाली झारा में गुलाबी सुंडी को लेकर निरीक्षण करते हुए।
हिसार। कपास में गुलाबी सुंडी के प्रकोप की जांच के लिए केंद्र सरकार के कृषि विभाग की टीम सोमवार को हिसार पहुंची। टीम ने गांव मंगाली में पहुंचकर कपास की फसल का निरीक्षण किया। कपास की फसल में गुलाबी सुंडी और हरा तैला मिला।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस स्थिति में किसान को चिंतित होने के बजाय जागरूक होने की जरूरत है। कीट नुकसान पहुंचाने की स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं। टीम ने किसान को कीट प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी।
हरियाणा में पिछले तीन साल से कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के प्रकोप के चलते पिछले तीन साल से कपास का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। जिले में इस बार करीब दो लाख 10 हजार एकड़ में कपास की फसल है।
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केंद्रीय कृषि विभाग की टीम और रीजनल सेंटर इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर फरीदाबाद की टीम सोमवार को हिसार पहुंची। इसमें एपीपीओ लक्ष्मीकांत, केपी शर्मा, सूरज बैनीवाल शामिल थे। कृषि विभाग से पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. अरुण कुमार के साथ गांव मंगाली पहुंचे। कृषि विकास अधिकारी रविंद्र आंतिल भी साथ रहे।
कृषि विभाग की टीम ने मंगाली झारा में नरसी राम खीचड़ के खेत में कपास के पौधों का निरीक्षण किया। वैज्ञानिक ढंग से खेत में दस अलग-अलग क्षेत्र से पत्ते व टींडे तोड़े गए। इन सभी को जांचा गया। इसके बाद औसत निकाला गया। डॉ. अरुण कुमार यादव ने बताया कि कपास में सुंडी और हरा तैला मिला। यह औसत से काफी कम था। जो आर्थिक कगार के लेवल से कम है। अगर एक पौधे में 100 टींडे में 8 से 10 गुलाबी सुंडी मिले तो किसान को स्प्रे करना चाहिए।
इससे कम गुलाबी सुंडी होने पर स्प्रे की जरूरत नहीं है। ऐसे में किसान को अपनी फसल की निगरानी करने की सलाह दी गई है। इनकी संख्या बढ़ी तो किसान को स्प्रे करना होगा। अगर इसका लेवल नहीं बढ़ेगा तो स्प्रे की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि जिस खेत में हरा तैला व सुंडी मिली उस खेत के किनारे पर ही कपास की लकड़ी यानी बनछटी पड़ी थी। किसान से बातचीत कर उसे ढ़कवाया गया।
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सुंडी अभी नुकसान के स्तर पर नहीं है। कपास की बनछटी को खेत में नहीं रखना चाहिए। इससे कपास में गुलाबी सुंडी आने का खतरा सबसे अधिक होता है।
- डॉ. अरुण कुमार, पौध संरक्षण अधिकारी, कृषि विभाग।
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कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस स्थिति में किसान को चिंतित होने के बजाय जागरूक होने की जरूरत है। कीट नुकसान पहुंचाने की स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं। टीम ने किसान को कीट प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी।
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हरियाणा में पिछले तीन साल से कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के प्रकोप के चलते पिछले तीन साल से कपास का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। जिले में इस बार करीब दो लाख 10 हजार एकड़ में कपास की फसल है।
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केंद्रीय कृषि विभाग की टीम और रीजनल सेंटर इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर फरीदाबाद की टीम सोमवार को हिसार पहुंची। इसमें एपीपीओ लक्ष्मीकांत, केपी शर्मा, सूरज बैनीवाल शामिल थे। कृषि विभाग से पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. अरुण कुमार के साथ गांव मंगाली पहुंचे। कृषि विकास अधिकारी रविंद्र आंतिल भी साथ रहे।
कृषि विभाग की टीम ने मंगाली झारा में नरसी राम खीचड़ के खेत में कपास के पौधों का निरीक्षण किया। वैज्ञानिक ढंग से खेत में दस अलग-अलग क्षेत्र से पत्ते व टींडे तोड़े गए। इन सभी को जांचा गया। इसके बाद औसत निकाला गया। डॉ. अरुण कुमार यादव ने बताया कि कपास में सुंडी और हरा तैला मिला। यह औसत से काफी कम था। जो आर्थिक कगार के लेवल से कम है। अगर एक पौधे में 100 टींडे में 8 से 10 गुलाबी सुंडी मिले तो किसान को स्प्रे करना चाहिए।
इससे कम गुलाबी सुंडी होने पर स्प्रे की जरूरत नहीं है। ऐसे में किसान को अपनी फसल की निगरानी करने की सलाह दी गई है। इनकी संख्या बढ़ी तो किसान को स्प्रे करना होगा। अगर इसका लेवल नहीं बढ़ेगा तो स्प्रे की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि जिस खेत में हरा तैला व सुंडी मिली उस खेत के किनारे पर ही कपास की लकड़ी यानी बनछटी पड़ी थी। किसान से बातचीत कर उसे ढ़कवाया गया।
सुंडी अभी नुकसान के स्तर पर नहीं है। कपास की बनछटी को खेत में नहीं रखना चाहिए। इससे कपास में गुलाबी सुंडी आने का खतरा सबसे अधिक होता है।
- डॉ. अरुण कुमार, पौध संरक्षण अधिकारी, कृषि विभाग।