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Hisar News: अमृत योजना की सुस्त चाल, वार्ड 11 में डेडलाइन से 15 दिन पहले भी काम अधूरा
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सातरोड की मिनी बैंक वाली गली में पेयजल कनेक्शन के लिए खोदा गया गड्ढा।
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हिसार। वार्ड 11 में अमृत योजना के तहत बिछाई जा रही पेयजल लाइन के कार्य की डेडलाइन पूरी होने में महज 15 दिन शेष हैं, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। कार्य की धीमी गति से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि ठेकेदार ने जगह-जगह गलियों को खोदकर छोड़ दिया है, जिससे एक ओर हादसों की आशंका बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर लोगों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। पेयजल लाइन का कार्य अधूरा होने के कारण सड़कों का निर्माण भी अटका पड़ा है।
अमृत योजना के तहत वार्ड-11 में करीब 35 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइप लाइन बिछाई जानी थी। इसके लिए अक्तूबर 2018 में एक एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया गया था और मार्च 2020 तक कार्य पूरा करने की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन एजेंसी तय अवधि में काम पूरा नहीं कर सकी। इसके बाद निगम प्रशासन ने क्लॉज-3 लगाते हुए टेंडर रद्द कर नया टेंडर जारी किया।
7 जनवरी को कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने इस कार्य का शुभारंभ किया था। नए टेंडर के तहत करीब 12 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जानी थी, जिस पर 19.32 करोड़ रुपये खर्च होने थे। एजेंसी को एक वर्ष में कार्य पूरा करना था, लेकिन समय-सीमा नजदीक आने के बावजूद काम अधूरा है।
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जगह-जगह गड्ढे खोदकर छोड़े
अमर उजाला संवाददाता जब मिनी बैंक वाली गली में पहुंचे तो वहां ठेकेदार द्वारा कार्य किया जा रहा था और घरों में कनेक्शन दिए जा रहे थे। हालांकि यहां तीन-चार गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए थे, जिनमें से कुछ में पानी भरा हुआ था। इससे जगह-जगह कीचड़ फैल गया है और लोगों का कहना है कि आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार कभी काम शुरू करता है तो कभी बंद कर देता है। पिछले करीब 20 दिनों से यहां कार्य चल रहा है। वहीं ठेकेदार के कारिंदे का कहना था कि सीवर ओवरफ्लो होने के कारण कनेक्शन देने में दिक्कत आ रही है। उनका दावा था कि लाइन पूरी बिछ चुकी है और अब सिर्फ गिने-चुने कनेक्शन बाकी हैं। हालांकि, अन्य गलियों के निरीक्षण में वहां के लोगों ने भी बताया कि अभी तक उनकी गलियों में कनेक्शन नहीं किए गए हैं।
15 साल से नहीं बनीं सड़कें
क्षेत्रवासियों ने बताया कि जब से सातरोड़ नगर निगम में शामिल हुआ है, तब से यहां सड़कों का निर्माण नहीं हुआ। पिछले सात वर्षों से पेयजल लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है, जो आज तक पूरा नहीं हो सका। इसी कारण सड़क निर्माण कार्य अटका हुआ है। लाइन बिछाने के दौरान ठेकेदार ने अच्छी हालत की सड़कों को भी खोद दिया, जिन्हें आज तक दुरुस्त नहीं किया गया। क्षेत्र में आखिरी बार पंचायत के समय ही सड़कों का निर्माण हुआ था।
यह बोले क्षेत्रवासी
ठेकेदार ने सारी गलियों को उखाड़ कर छोड़ रखा है। लाइनों में पानी लीक होता रहता है, लेकिन कोई रखरखाव नहीं है। 6-7 साल से लाइन बिछाने का काम चल रहा है। पता नहीं कब पूरा होगा और हमें राहत मिलेगी।
- दलीप सिंह।
एरिया की सड़कें उखाड़ कर छोड़ दी गई हैं। सीवर ओवरफ्लो रहता है। कई वर्षों से यह काम चल रहा है। ठेकेदार ने पुराने कनेक्शन तोड़ दिए, जिससे घरों में पानी भी नहीं आ रहा। यह सड़क आखिरी बार वर्ष 2005 में बनी थी।
- कुलभूषण शर्मा।
करीब एक माह से यहां काम चल रहा है। बिछाई गई पेयजल लाइन में जगह-जगह लीकेज मिल रही है। इन्हें ठीक करने के लिए गड्ढे खोद दिए गए हैं। आज सुबह ही एक बाइक सवार गड्ढे में गिर गया। नगर निगम की दो योजनाएं पूरी होने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं।
- अरविंद कुमार।
यह गांव की फिरनी का रास्ता है, लेकिन हालात बदतर हैं। 15 दिनों से गड्ढे खुले पड़े हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। पेयजल लाइन न बिछने से सड़क भी नहीं बन पा रही।
- विकास शर्मा।
अमृत योजना सातरोड के लिए जहर योजना बन गई है। नए टेंडर के बाद भी काम की गति बेहद धीमी है। एक साल पहले काम शुरू हुआ था, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ।
- राजकुमार जांगड़ा।
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इस संबंध में अधिकारियों से बातचीत कर प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। यदि कार्य धीमी गति से चल रहा है तो उसे तेज करवाया जाएगा, ताकि लोगों को परेशानी न हो। पेयजल लाइन का काम पूरा होते ही सड़कों का निर्माण भी कराया जाएगा।
- नीरज, निगमायुक्त।
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अमृत योजना के तहत वार्ड-11 में करीब 35 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइप लाइन बिछाई जानी थी। इसके लिए अक्तूबर 2018 में एक एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया गया था और मार्च 2020 तक कार्य पूरा करने की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन एजेंसी तय अवधि में काम पूरा नहीं कर सकी। इसके बाद निगम प्रशासन ने क्लॉज-3 लगाते हुए टेंडर रद्द कर नया टेंडर जारी किया।
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7 जनवरी को कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने इस कार्य का शुभारंभ किया था। नए टेंडर के तहत करीब 12 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जानी थी, जिस पर 19.32 करोड़ रुपये खर्च होने थे। एजेंसी को एक वर्ष में कार्य पूरा करना था, लेकिन समय-सीमा नजदीक आने के बावजूद काम अधूरा है।
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जगह-जगह गड्ढे खोदकर छोड़े
अमर उजाला संवाददाता जब मिनी बैंक वाली गली में पहुंचे तो वहां ठेकेदार द्वारा कार्य किया जा रहा था और घरों में कनेक्शन दिए जा रहे थे। हालांकि यहां तीन-चार गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए थे, जिनमें से कुछ में पानी भरा हुआ था। इससे जगह-जगह कीचड़ फैल गया है और लोगों का कहना है कि आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार कभी काम शुरू करता है तो कभी बंद कर देता है। पिछले करीब 20 दिनों से यहां कार्य चल रहा है। वहीं ठेकेदार के कारिंदे का कहना था कि सीवर ओवरफ्लो होने के कारण कनेक्शन देने में दिक्कत आ रही है। उनका दावा था कि लाइन पूरी बिछ चुकी है और अब सिर्फ गिने-चुने कनेक्शन बाकी हैं। हालांकि, अन्य गलियों के निरीक्षण में वहां के लोगों ने भी बताया कि अभी तक उनकी गलियों में कनेक्शन नहीं किए गए हैं।
15 साल से नहीं बनीं सड़कें
क्षेत्रवासियों ने बताया कि जब से सातरोड़ नगर निगम में शामिल हुआ है, तब से यहां सड़कों का निर्माण नहीं हुआ। पिछले सात वर्षों से पेयजल लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है, जो आज तक पूरा नहीं हो सका। इसी कारण सड़क निर्माण कार्य अटका हुआ है। लाइन बिछाने के दौरान ठेकेदार ने अच्छी हालत की सड़कों को भी खोद दिया, जिन्हें आज तक दुरुस्त नहीं किया गया। क्षेत्र में आखिरी बार पंचायत के समय ही सड़कों का निर्माण हुआ था।
यह बोले क्षेत्रवासी
ठेकेदार ने सारी गलियों को उखाड़ कर छोड़ रखा है। लाइनों में पानी लीक होता रहता है, लेकिन कोई रखरखाव नहीं है। 6-7 साल से लाइन बिछाने का काम चल रहा है। पता नहीं कब पूरा होगा और हमें राहत मिलेगी।
- दलीप सिंह।
एरिया की सड़कें उखाड़ कर छोड़ दी गई हैं। सीवर ओवरफ्लो रहता है। कई वर्षों से यह काम चल रहा है। ठेकेदार ने पुराने कनेक्शन तोड़ दिए, जिससे घरों में पानी भी नहीं आ रहा। यह सड़क आखिरी बार वर्ष 2005 में बनी थी।
- कुलभूषण शर्मा।
करीब एक माह से यहां काम चल रहा है। बिछाई गई पेयजल लाइन में जगह-जगह लीकेज मिल रही है। इन्हें ठीक करने के लिए गड्ढे खोद दिए गए हैं। आज सुबह ही एक बाइक सवार गड्ढे में गिर गया। नगर निगम की दो योजनाएं पूरी होने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं।
- अरविंद कुमार।
यह गांव की फिरनी का रास्ता है, लेकिन हालात बदतर हैं। 15 दिनों से गड्ढे खुले पड़े हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। पेयजल लाइन न बिछने से सड़क भी नहीं बन पा रही।
- विकास शर्मा।
अमृत योजना सातरोड के लिए जहर योजना बन गई है। नए टेंडर के बाद भी काम की गति बेहद धीमी है। एक साल पहले काम शुरू हुआ था, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ।
- राजकुमार जांगड़ा।
इस संबंध में अधिकारियों से बातचीत कर प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। यदि कार्य धीमी गति से चल रहा है तो उसे तेज करवाया जाएगा, ताकि लोगों को परेशानी न हो। पेयजल लाइन का काम पूरा होते ही सड़कों का निर्माण भी कराया जाएगा।
- नीरज, निगमायुक्त।