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Hisar News: सुप्रीम आदेश बेअसर...कागजों में डॉग शेल्टर होम, सार्वजनिक स्थलों पर कुत्ते, जमीन के विवाद में अटका शेल्टर होम का काम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 12:48 AM IST
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Supreme order ineffective...dog shelter home on paper, dogs at public places, shelter home's work stuck in land dispute
जीजेयू परिसर में घूम रहा कुत्ता। 
हिसार। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के करीब आठ महीने बाद भी जिले में डॉग शेल्टर होम का निर्माण कागजों से बाहर नहीं निकल सका है। हालत यह है कि गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, एचएयू, लुवास, सरकारी स्कूलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर आवारा कुत्तों को दिनभर घूमते देखा जा सकता है। जिले में हर माह औसतन 700 लोग कुत्तों के हमले से घायल होकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 में 11 अगस्त और फिर 7 नवंबर को आदेश जारी कर स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका) को निर्देश दिए थे कि वे सरकारी अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखें। इस क्रम में नगर निगम ने सातरोड गांव में जमीन चिह्नित कर डॉग शेल्टर होम बनाने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। उनका कहना था कि इस जमीन को गांव के ही किसी विकास कार्य में इस्तेमाल की जाए न कि कुत्तों के शेल्टर के लिए। इसके बाद से यह प्रक्रिया आग नहीं बढ़ सकी।
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सार्वजनिक स्थलों पर घूमते दिखे कुत्ते

अमर उजाला टीम ने सोमवार को सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान बस स्टैंड पर अलग-अलग जगह कुत्ते घूमते मिले। वर्कशॉप में ही चार कुत्ते घूम रहे थे। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय परिसर में नौ कुत्ते घूमते दिखाई दिए। इसी तरह एचएयू परिसर में लड़कों के हॉस्टल के पास ही कुत्ते झुंड में बैठे थे। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होम साइंस कॉलेज और आवासीय परिसर में भी करीब 15 कुत्ते घूमते मिले। एचएयू परिसर में स्थित लुवास के वेटरनरी कॉलेज के पास भी ऐसी ही स्थिति थी। गांव सातरोड़ के राजकीय स्कूल और नागरिक अस्पताल में भी कुत्ते घूमते दिखे। इतना ही नहीं नगर निगम कार्यालय परिसर में भी कुत्ते और पिल्ले दिखाई दिए।
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निगम की नाकामी : कुत्ते पकड़े, फिर वहीं छोड़ दिए

नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिसंबर-जनवरी (2025-26) में खानापूर्ति के लिए अभियान शुरू किया था। जीजेयू कर्मचारियों की मांग पर परिसर से 15 से अधिक कुत्तों को पकड़ा गया लेकिन शेल्टर होम नहीं होने के कारण कुछ ही दिनों बाद उन्हें वापस परिसर में छोड़ दिया।

जुलाई से सितंबर में सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं कुत्ते

जिले में आवारा कुत्तों के हमले से घायल होने वाले लोगों में सबसे अधिक संख्या बच्चों और महिलाओं की है। नागरिक अस्पताल हिसार और हांसी के अलावा बरवाला, आदमपुर व नारनौंद सीएचसी में पीड़ितों का टीकाकरण किया जा रहा है। बीपीएल परिवारों को डॉग बाइट के मामलों में मुआवजा देने का भी प्रावधान है। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जुलाई, अगस्त और सितंबर में कुत्ते सबसे अधिक आक्रामक हो जाते हैं। इन तीन महीनों में डॉग बाइट के मामले बढ़कर 1400 से 1900 के बीच पहुंच जाते हैं जबकि सामान्य महीनों में यह आंकड़ा 400 से 850 के बीच रहता है।

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शेल्टर होम के लिए जमीन चिह्नित कर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जानी थी लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध जता दिया। इस वजह से काम रुक गया। इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही दूसरी जगह तलाश कर काम दोबारा शुरू कराया जाएगा।
- सी. जयश्रद्धा, आयुक्त, नगर निगम, हिसार
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पिछले सात सालों में कुत्तों के काटने के मामले

वर्ष
केस
2019
14766
2020
2173
2021
1681
2022
4310
2023
6545
2024
6716
2025
8691
2026 (अब तक) 4454
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