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Hisar News: काले कपड़ों में पहुंचे विद्यार्थियों ने एचएयू कुलपति के सामने किया प्रदर्शन
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एचएयू कुलपति प्रो. बीआर कांबोज का पोस्टर लहरा कर विरोध जताते विद्यार्थी।
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में मंगलवार को आयोजित युवा महोत्सव के उद्घाटन समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने कुलपति के समक्ष प्रदर्शन किया। काले कपड़े पहनकर पहुंचे विद्यार्थियों ने कुलपति के भाषण के दौरान पोस्टर लहराते हुए नारेबाजी की और अपनी मांगों को जोरशोर से उठाया।
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ और वी वांट जस्टिस जैसे नारे लगाए। विद्यार्थी डिविजनल कमिश्नर की रिपोर्ट लागू करने, लाठीचार्ज मामले में न्याय दिलाने और चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर (सीएसओ) सुखबीर सिंह की बहाली रद्द करने की मांग कर रहे थे।
एचएयू में दो दिवसीय युवा महोत्सव मंगलवार को शुरू हुआ। उद्घाटन के लिए पहुंचे कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने जैसे ही अपना संबोधन शुरू किया, उसी दौरान विरोध स्वरूप कुछ विद्यार्थी अपनी सीट छोड़कर खड़े हो गए। समारोह स्थल के सबसे पीछे खड़े काले कपड़े पहने विद्यार्थियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध कर रहे छात्र हाथों में पोस्टर लेकर कुलपति के सामने दीवार के पास खड़े हो गए।
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कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने प्रदर्शन की ओर ध्यान दिए बिना अपना भाषण जारी रखा। भाषण समाप्त होने के बाद वे समारोह स्थल से चले गए। कुछ देर बाद प्रदर्शनकारी विद्यार्थी भी वहां से हट गए।
छात्र नेता योगेश कुमार योगी ने बताया कि विद्यार्थियों ने पोस्टर लहराकर छात्राओं पर शोषण, छात्रों पर लाठीचार्ज, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की बहाली, विद्यार्थियों पर दर्ज फर्जी मामलों, हॉस्टलों और खेल मैदानों की जर्जर हालत तथा डिविजनल कमिश्नर की रिपोर्ट लागू न होने जैसी कई मांगें उठाईं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सुर्खियों में रही यूनिवर्सिटी
एचएयू में पिछले सप्ताह छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में दो असिस्टेंट प्रोफेसरों को निलंबित किया गया था। इससे पहले 10 जून की रात छात्रवृत्ति में कटौती के विरोध में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज किया गया था। इसके बाद विद्यार्थियों ने करीब 25 दिन तक धरना दिया। धरना समाप्ति के दौरान शिक्षकों को निलंबित करने और जांच कमेटी गठित करने पर सहमति बनी थी। प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तत्कालीन मंडल आयुक्त अशोक गर्ग को जांच कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया था। जांच कमेटी चेयरमैन अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
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प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ और वी वांट जस्टिस जैसे नारे लगाए। विद्यार्थी डिविजनल कमिश्नर की रिपोर्ट लागू करने, लाठीचार्ज मामले में न्याय दिलाने और चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर (सीएसओ) सुखबीर सिंह की बहाली रद्द करने की मांग कर रहे थे।
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एचएयू में दो दिवसीय युवा महोत्सव मंगलवार को शुरू हुआ। उद्घाटन के लिए पहुंचे कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने जैसे ही अपना संबोधन शुरू किया, उसी दौरान विरोध स्वरूप कुछ विद्यार्थी अपनी सीट छोड़कर खड़े हो गए। समारोह स्थल के सबसे पीछे खड़े काले कपड़े पहने विद्यार्थियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध कर रहे छात्र हाथों में पोस्टर लेकर कुलपति के सामने दीवार के पास खड़े हो गए।
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कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने प्रदर्शन की ओर ध्यान दिए बिना अपना भाषण जारी रखा। भाषण समाप्त होने के बाद वे समारोह स्थल से चले गए। कुछ देर बाद प्रदर्शनकारी विद्यार्थी भी वहां से हट गए।
छात्र नेता योगेश कुमार योगी ने बताया कि विद्यार्थियों ने पोस्टर लहराकर छात्राओं पर शोषण, छात्रों पर लाठीचार्ज, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की बहाली, विद्यार्थियों पर दर्ज फर्जी मामलों, हॉस्टलों और खेल मैदानों की जर्जर हालत तथा डिविजनल कमिश्नर की रिपोर्ट लागू न होने जैसी कई मांगें उठाईं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सुर्खियों में रही यूनिवर्सिटी
एचएयू में पिछले सप्ताह छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में दो असिस्टेंट प्रोफेसरों को निलंबित किया गया था। इससे पहले 10 जून की रात छात्रवृत्ति में कटौती के विरोध में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज किया गया था। इसके बाद विद्यार्थियों ने करीब 25 दिन तक धरना दिया। धरना समाप्ति के दौरान शिक्षकों को निलंबित करने और जांच कमेटी गठित करने पर सहमति बनी थी। प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तत्कालीन मंडल आयुक्त अशोक गर्ग को जांच कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया था। जांच कमेटी चेयरमैन अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।