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अनुसंधान और औद्योगिक संस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी : प्रो. सोमनाथ सचदेवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 12:47 AM IST
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Strong partnership between research and industrial institutions is essential: Prof. Somnath Sachdeva
एचएयू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा। 
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के इंदिरा गांधी ऑडिटोरियम में डिसाइफरिंग द पोटेंशियल ऑफ क्लाइमेट रेजिलिएंट फंक्शनल क्रॉप्स फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड एग्रो-इंडस्ट्रीज (डीपीसीएफसी-एसएएआई-2026) विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का बुधवार को शुभारंभ हुआ। शिक्षा मंत्रालय की ‘स्पार्क’ परियोजना के अंतर्गत मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा पहुंचे।
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उन्होंने ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अनुसंधान एवं औद्योगिक संस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करनी होगी। कृषि और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय समय की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन के अनुकूल सहनशील फसलें न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगी, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेंगी। उन्होंने ज्वार, बाजरा, रागी जैसे मिलेट्स के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एचएयू के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कहा कि सतत कृषि एवं एग्रो इंडस्ट्रीज के विकास के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाना होगा। विश्वविद्यालय वैज्ञानिक उपलब्धियों को किसानों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से 600 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
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मुख्य वक्ता भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने जिनोमिक्स एवं सूक्ष्मजीव आधारित समाधानों के एकीकृत उपयोग पर बल दिया। उन्होंने विंगड बीन और अरुणाचली याक की क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उच्च उत्पादकता और पोषण गुणवत्ता बनाए रखने वाली फसलों का विकास आवश्यक है। भविष्य की टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि के लिए अनुसंधान और नवाचार अनिवार्य हैं।
सम्मेलन में मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड से डॉ. क्रेग मैकगिल, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा से डॉ. देवकी नंदन, ग्रो फर्दर, यूएसए से डॉ. पीटर केली, पीएयू लुधियाना के डॉ. नवतेज सिंह बैंस, एमएचयू करनाल से डॉ. धरम पाल, नाबी मोहाली से डॉ. शिवराज हरिराम निले तथा गडवासू लुधियाना से डॉ. प्रभजीत सिंह सहित कई विशेषज्ञ शामिल हुए।

सम्मेलन के दौरान एब्स्ट्रैक्ट बुक, लीड पेपर बुक, मोरिंगा प्रशिक्षण पुस्तिका एवं मोनोग्राफ का विमोचन किया गया। तकनीकी सत्रों में जलवायु लचीली फसलों के विकास, जैव प्रौद्योगिकी, पोषण संवर्धन, मूल्य संवर्धन और एग्रो इंडस्ट्रीज में उपयोगिता पर चर्चा हुई। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने स्वागत किया, जबकि डॉ. राजेश गेरा ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। अंत में डॉ. जयंती टोकस ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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