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Hisar News: नशे का नेटवर्क तोड़ने को साथ आएं समाज और सरकार
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अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम में भाग लेते शहर के गणमान्य लोग।
हिसार। जिले में बढ़ते नशे के कारोबार का नेटवर्क तोड़ने के लिए सरकार के साथ समाज को भी मिलकर काम करना होगा। पिछले सप्ताह पकड़े गए नशा कारोबारियों से पूछताछ में हॉस्टल और कॉलेजों तक नशे की बड़ी खेप पहुंचाने की बात सामने आई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय बस्तियों तक नेटवर्क फैला है और तस्कर नई तकनीकों से पुलिस को चकमा दे रहे हैं। अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बुधवार को युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने नशे की बढ़ती पहुंच पर चिंता जताई।
छात्र नेता हरिंद्र बैनीवाल ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में नशे की रोकथाम को लेकर यूजीसी के नियम लागू नहीं हो रहे। यूनिवर्सिटी के गेट के सामने शराब का ठेका खोला जा रहा है और कोटपा नियमों का पालन नहीं हो रहा। बाजार से हॉस्टल तक नशा पहुंच रहा है।
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कई संस्थानों में वार्डन और प्रॉक्टर पर भी नशे के कारोबार में शामिल होने के आरोप हैं। यूनिवर्सिटी के सामने बसी आंबेडकर कॉलोनी को उन्होंने नशे का बड़ा अड्डा बताया। युवाओं को नशे से बचाने के लिए छात्र संगठनों की कमेटी नहीं बनने और काम कागजों तक सीमित रहने की बात भी कही।
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युवाओं में बेरोजगारी, तनाव और हीन भावना से नशा बढ़ रहा है। छोटे तस्करों के बजाय बड़े लोगों पर कार्रवाई जरूरी है। बिना मिलीभगत के बड़े स्तर पर नशे का कारोबार संभव नहीं। कांवड़ यात्रा के बहाने भी नशा पहुंचाया जाता है। युवाओं को बचाने के लिए सख्त निर्णय लेने होंगे।
डॉ. बलजीत भ्याण
ड्रग्स की शुरुआत शराब और सिगरेट से होती है। समाज ने शराब, सिगरेट और हुक्के को मान्यता दे दी है। एक राज्य में शराब बंद होने पर दूसरे राज्यों से आपूर्ति शुरू हो जाती है। नशे की रोकथाम के लिए पूरे देश में एक समान नीति बनाकर प्रभावी ढंग से लागू करनी होगी।
डॉ. डीपी ढुल
अवसाद और अकेलेपन के कारण बच्चे नशे की ओर जाते हैं। माता-पिता के पास बच्चों के लिए समय नहीं है और स्कूल-कॉलेज में भी दबाव बढ़ रहा है। अभिभावकों को बच्चों की समस्याएं सुननी होंगी। सामुदायिक केंद्रों को इनडोर खेलों के लिए खोलना चाहिए, ताकि युवा सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ें।
डॉ. सुनीता श्योकंद
नशे का कारोबार सुबह पांच बजे से शुरू हो जाता है और इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। पूरे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करनी होगी। अकेले सरकार यह काम नहीं कर सकती। सामाजिक संगठनों को सहयोग करना होगा और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने होंगे।
डॉ. सुनीता जैन
कई देशों में नशा प्रतिबंधित है। हमें उनकी रणनीतियों से सीख लेकर नशे पर रोक लगानी चाहिए। नशा करने, बेचने और खरीदने वालों पर कठोर कार्रवाई हो। सख्त कानून के साथ प्रभावी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
डॉ. सुनीता महतानी
नशे के कारोबार में अधिक पैसा होने के कारण लोग इसमें आते हैं। नेटवर्क तोड़ने के लिए सामाजिक संगठनों को सरकार का सहयोग करना होगा। समाज और सरकार साथ मिलकर काम करेंगे तो नशे को हराया जा सकेगा। युवाओं को बचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।
डॉ. पुष्पा खरब
समाज को नशे की रोकथाम की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़नी चाहिए। सरकार और समाज मिलकर काम करेंगे तो नशा रोका जा सकेगा। रक्तदान शिविर की तरह नशे के खिलाफ भी शिविर लगाने चाहिए। इनमें युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करना होगा।
जनपरिवाद समिति सदस्य राकेश आर्य
खेल मैदान बढ़ेंगे तो युवा नशे से दूर रहेंगे। नशे के कारण अपराध भी बढ़ रहे हैं। मेरे वार्ड में आईटीआई का बड़ा मैदान है, जिसे युवाओं के लिए खोलने की मांग की थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। युवाओं की ऊर्जा को खेलों में लगाने के लिए खेल सुविधाएं बढ़ाना जरूरी है।
जगमोहन मित्तल, पार्षद, नगर निगम वार्ड 14
ड्रग का नशा अब लोगों की जान ले रहा है। नशेड़ी चोरी और स्नैचिंग कर रहे हैं। स्मैक चौक-चौराहों पर मिल रही है। शराब के अवैध खुर्दे और होम डिलीवरी भी चल रही है। पुलिस नशेड़ियों को गिरफ्तार करने से डरती है। कस्टडी में मौत के डर से उन्हें छोड़ दिया जाता है।
भीम महाजन, पार्षद, नगर निगम
हिसार के खेल स्टेडियमों की हालत खराब है। सुनसान इलाकों के मेडिकल स्टोरों पर निगरानी जरूरी है। बिना चिकित्सक की पर्ची सीरिंज बेची जा रही हैं, जिनका इस्तेमाल नशे में होता है। ओपी सिंह और श्रीकांत जाधव ने नशे के कारोबार पर कार्रवाई की थी, लेकिन अब खुले में नशा बिक रहा है।
तरुण गोयल, पूर्व प्रधान, टैक्स बार एसोसिएशन
माता-पिता बच्चों से संवाद रखें और उन्हें नशे के नुकसान समझाएं। बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव नहीं डालना चाहिए। समाज और संस्थाओं को भी नशे के खिलाफ अभियान में सहयोग देना होगा। सरकार के साथ मिलकर काम करने से युवाओं को नशे से बचाया जा सकता है।
डॉ. जेके डांग, प्रधान, वानप्रस्थ क्लब, हिसार
बच्चों का जन्मदिन घर पर मनाएं और परिवार व समाज से उनका जुड़ाव बढ़ाएं। हुक्का बार पूरी तरह बंद होने चाहिए। शादियों में भी हुक्का लगाने से बचना चाहिए। सामाजिक संस्थाओं को नशे के खिलाफ भूमिका निभानी होगी। सभी मिलकर प्रयास करेंगे तो नशे के खिलाफ लड़ाई में सफलता मिलेगी।
संजय डालमिया, पार्षद, नगर निगम हिसार
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अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय बस्तियों तक नेटवर्क फैला है और तस्कर नई तकनीकों से पुलिस को चकमा दे रहे हैं। अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बुधवार को युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने नशे की बढ़ती पहुंच पर चिंता जताई।
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छात्र नेता हरिंद्र बैनीवाल ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में नशे की रोकथाम को लेकर यूजीसी के नियम लागू नहीं हो रहे। यूनिवर्सिटी के गेट के सामने शराब का ठेका खोला जा रहा है और कोटपा नियमों का पालन नहीं हो रहा। बाजार से हॉस्टल तक नशा पहुंच रहा है।
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कई संस्थानों में वार्डन और प्रॉक्टर पर भी नशे के कारोबार में शामिल होने के आरोप हैं। यूनिवर्सिटी के सामने बसी आंबेडकर कॉलोनी को उन्होंने नशे का बड़ा अड्डा बताया। युवाओं को नशे से बचाने के लिए छात्र संगठनों की कमेटी नहीं बनने और काम कागजों तक सीमित रहने की बात भी कही।
युवाओं में बेरोजगारी, तनाव और हीन भावना से नशा बढ़ रहा है। छोटे तस्करों के बजाय बड़े लोगों पर कार्रवाई जरूरी है। बिना मिलीभगत के बड़े स्तर पर नशे का कारोबार संभव नहीं। कांवड़ यात्रा के बहाने भी नशा पहुंचाया जाता है। युवाओं को बचाने के लिए सख्त निर्णय लेने होंगे।
डॉ. बलजीत भ्याण
ड्रग्स की शुरुआत शराब और सिगरेट से होती है। समाज ने शराब, सिगरेट और हुक्के को मान्यता दे दी है। एक राज्य में शराब बंद होने पर दूसरे राज्यों से आपूर्ति शुरू हो जाती है। नशे की रोकथाम के लिए पूरे देश में एक समान नीति बनाकर प्रभावी ढंग से लागू करनी होगी।
डॉ. डीपी ढुल
अवसाद और अकेलेपन के कारण बच्चे नशे की ओर जाते हैं। माता-पिता के पास बच्चों के लिए समय नहीं है और स्कूल-कॉलेज में भी दबाव बढ़ रहा है। अभिभावकों को बच्चों की समस्याएं सुननी होंगी। सामुदायिक केंद्रों को इनडोर खेलों के लिए खोलना चाहिए, ताकि युवा सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ें।
डॉ. सुनीता श्योकंद
नशे का कारोबार सुबह पांच बजे से शुरू हो जाता है और इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। पूरे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करनी होगी। अकेले सरकार यह काम नहीं कर सकती। सामाजिक संगठनों को सहयोग करना होगा और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने होंगे।
डॉ. सुनीता जैन
कई देशों में नशा प्रतिबंधित है। हमें उनकी रणनीतियों से सीख लेकर नशे पर रोक लगानी चाहिए। नशा करने, बेचने और खरीदने वालों पर कठोर कार्रवाई हो। सख्त कानून के साथ प्रभावी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
डॉ. सुनीता महतानी
नशे के कारोबार में अधिक पैसा होने के कारण लोग इसमें आते हैं। नेटवर्क तोड़ने के लिए सामाजिक संगठनों को सरकार का सहयोग करना होगा। समाज और सरकार साथ मिलकर काम करेंगे तो नशे को हराया जा सकेगा। युवाओं को बचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।
डॉ. पुष्पा खरब
समाज को नशे की रोकथाम की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़नी चाहिए। सरकार और समाज मिलकर काम करेंगे तो नशा रोका जा सकेगा। रक्तदान शिविर की तरह नशे के खिलाफ भी शिविर लगाने चाहिए। इनमें युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करना होगा।
जनपरिवाद समिति सदस्य राकेश आर्य
खेल मैदान बढ़ेंगे तो युवा नशे से दूर रहेंगे। नशे के कारण अपराध भी बढ़ रहे हैं। मेरे वार्ड में आईटीआई का बड़ा मैदान है, जिसे युवाओं के लिए खोलने की मांग की थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। युवाओं की ऊर्जा को खेलों में लगाने के लिए खेल सुविधाएं बढ़ाना जरूरी है।
जगमोहन मित्तल, पार्षद, नगर निगम वार्ड 14
ड्रग का नशा अब लोगों की जान ले रहा है। नशेड़ी चोरी और स्नैचिंग कर रहे हैं। स्मैक चौक-चौराहों पर मिल रही है। शराब के अवैध खुर्दे और होम डिलीवरी भी चल रही है। पुलिस नशेड़ियों को गिरफ्तार करने से डरती है। कस्टडी में मौत के डर से उन्हें छोड़ दिया जाता है।
भीम महाजन, पार्षद, नगर निगम
हिसार के खेल स्टेडियमों की हालत खराब है। सुनसान इलाकों के मेडिकल स्टोरों पर निगरानी जरूरी है। बिना चिकित्सक की पर्ची सीरिंज बेची जा रही हैं, जिनका इस्तेमाल नशे में होता है। ओपी सिंह और श्रीकांत जाधव ने नशे के कारोबार पर कार्रवाई की थी, लेकिन अब खुले में नशा बिक रहा है।
तरुण गोयल, पूर्व प्रधान, टैक्स बार एसोसिएशन
माता-पिता बच्चों से संवाद रखें और उन्हें नशे के नुकसान समझाएं। बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव नहीं डालना चाहिए। समाज और संस्थाओं को भी नशे के खिलाफ अभियान में सहयोग देना होगा। सरकार के साथ मिलकर काम करने से युवाओं को नशे से बचाया जा सकता है।
डॉ. जेके डांग, प्रधान, वानप्रस्थ क्लब, हिसार
बच्चों का जन्मदिन घर पर मनाएं और परिवार व समाज से उनका जुड़ाव बढ़ाएं। हुक्का बार पूरी तरह बंद होने चाहिए। शादियों में भी हुक्का लगाने से बचना चाहिए। सामाजिक संस्थाओं को नशे के खिलाफ भूमिका निभानी होगी। सभी मिलकर प्रयास करेंगे तो नशे के खिलाफ लड़ाई में सफलता मिलेगी।
संजय डालमिया, पार्षद, नगर निगम हिसार