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Hisar News: स्कंद षष्ठी पर्व 19 को, पूजा-व्रत से साहस और यश प्राप्ति की है मान्यता

Wed, 15 Jul 2026 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Wed, 15 Jul 2026 11:03 PM IST
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Skanda Shashthi festival is celebrated on 19th, worship and fasting is believed to bring courage and fame.
हिसार। भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा देवसेनापति भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को समर्पित स्कंद षष्ठी का पर्व 19 जुलाई को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत और मंत्र जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साहस, सफलता, संतान सुख और यश की प्राप्ति होती है। यह पर्व जीवन की बाधाओं के निवारण, आत्मबल में वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है।
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लाहौरिया चौक स्थित शिव मंदिर के पुजारी पंडित श्याम के अनुसार, इस बार स्कंद षष्ठी पर उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र और रविवार का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय की आराधना करने से शत्रुओं पर विजय, आत्मविश्वास में वृद्धि और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
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भगवान कार्तिकेय को वीरता, ज्ञान, नेतृत्व और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। दक्षिण भारत में उन्हें मुरुगन, सुब्रह्मण्य और षण्मुख के नाम से पूजा जाता है जबकि उत्तर भारत में वह स्कंद और कार्तिकेय के रूप में पूजित हैं।
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पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय का जन्म दैत्य तारकासुर के वध के लिए हुआ था। भगवान शिव के तेज से उत्पन्न होकर उन्होंने देवताओं की सेना का नेतृत्व किया और तारकासुर का संहार कर देवताओं को भयमुक्त किया। इसी कारण उन्हें देवसेनापति की उपाधि मिली।

जानें.. शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत का महत्व
पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि 18 जुलाई की रात 8:40 बजे शुरू होकर 19 जुलाई की रात 10:15 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 19 जुलाई को स्कंद षष्ठी व्रत रखा जाएगा। पूजा के लिए सुबह 6 बजे से 9 बजे और शाम 5 बजे से 7 बजे तक का समय शुभ रहेगा। श्रद्धालु सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और चंदन, अक्षत, लाल या पीले पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल व पंचामृत अर्पित करें। इस दौरान मंत्र जाप और स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना गया है। श्रद्धानुसार व्रत रखने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व फल का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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