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Hisar News: 95 वर्षों के बाद श्री विष्णु भगवान मंदिर का हुआ जीर्णोद्धार, दो करोड़ रुपये हुए खर्च
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मंदिर में स्थापित श्री विष्णु भगवान की प्रतिमा।
- फोटो : 1
हांसी। 95 वर्षों पुराने श्री विष्णु भगवान मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण होने पर बुधवार को मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा को फिर से स्थापित किया गया। इस दौरान कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने मंदिर का उद्घाटन किया। इस दौरान वह अपने 99 वर्षीय पिता सच्चिदानंद शर्मा व पूरे परिवार सहित यहां पहुंचे। न्यायाधीश के परिवार ने ही वर्ष 1930 में मंदिर निर्माण के लिए जमीन दी थी। तब से उनका परिवार मंदिर से जुड़ा हुआ है।
जीर्णोद्धार का कार्य 10 जुलाई 2024 को शुरू किया गया था। करीब सवा साल में मंदिर के नवनिर्माण का कार्य अब पूरा हुआ है। मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य पर लगभग 2 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है। वहीं इसके निर्माण में मकराना सुपर व्हाइट मार्बल एवं बंशी पहाड़पुर के विशेष पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर अब आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है। मंदिर में बुधवार को प्रतिमा स्थापित की गई। इस दौरान न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा व विधायक विनोद भयाना ने बड़सी गेट के निकट स्थित प्राचीन भगवान विष्णु मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और हवन-यज्ञ में पूर्ण आहुति अर्पित की। न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि यह मेरी जन्मभूमि ही नहीं, मेरी पहचान भी है। इस धरा से मुझे संस्कार और प्रेरणा मिली है। हमारा दायित्व है कि हम अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का संरक्षण करें और समाज के हित में निरंतर सकारात्मक कार्य करते रहें। विधायक भयाना ने कहा कि भगवान विष्णु मंदिर का जीर्णोद्धार इस क्षेत्र की आस्था और गौरव का प्रतीक है। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक सैनी, भगवान विष्णु मंदिर ट्रस्ट के प्रधान रमेश गुप्ता, सचिव प्रवीण बंसल, पंडित रतनलाल शर्मा, सच्चिदानंद शर्मा, राजकुमार, स्वामी लोकेश्वरानंद महाराज, डॉ. सुनील शर्मा, धर्मवीर रतेरिया, मनजीत जांगड़ा, गोल्डी सैनी, तनुज खुराना उपस्थित रहे।
103 वर्ष पहले खुदाई में मिली थी प्रतिमा
विष्णु भगवान की यह प्रतिमा वर्ष 1922 में ऐतिहासिक किले की खुदाई में कुम्हार उदमी राम को मिली थी। इसके बाद प्रतिमा को नीम चौक के एक मंदिर में स्थापित करवाया गया। वर्ष 1930 में चौपटा में श्री विष्णु भगवान का मंदिर बनकर तैयार हुआ। इसमें प्रतिमा स्थापित करवाई गई थी। इसके लिए जमीन हिसारिया ब्राह्मणान ने दान में दी थी। वह जस्टिस दिनेश शर्मा के पूर्वज थे। मंदिर के भवन निर्माण जीतू मल मित्तल चानौतिया ने करवाया था। उसने मंदिर निर्माण के लिए अपनी संपत्ति भी बेच दी थी। इस प्रतिमा को देखने के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय भी आए थे। उन्होंने प्रतिमा को काशी या फिर प्रयागराज में प्रस्थापित करने की मांग रखी तो शहरवासियों ने मना कर दिया। उसके बाद ब्रिटिश सरकार ने प्रतिमा को तब लाहौर के पंजाब म्यूजियम या लंदन के म्यूजियम में रखने का प्रयास किया। तब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। ट्रस्ट अब मंदिर की देखरेख कर रही है।
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जीर्णोद्धार का कार्य 10 जुलाई 2024 को शुरू किया गया था। करीब सवा साल में मंदिर के नवनिर्माण का कार्य अब पूरा हुआ है। मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य पर लगभग 2 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है। वहीं इसके निर्माण में मकराना सुपर व्हाइट मार्बल एवं बंशी पहाड़पुर के विशेष पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर अब आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है। मंदिर में बुधवार को प्रतिमा स्थापित की गई। इस दौरान न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा व विधायक विनोद भयाना ने बड़सी गेट के निकट स्थित प्राचीन भगवान विष्णु मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और हवन-यज्ञ में पूर्ण आहुति अर्पित की। न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि यह मेरी जन्मभूमि ही नहीं, मेरी पहचान भी है। इस धरा से मुझे संस्कार और प्रेरणा मिली है। हमारा दायित्व है कि हम अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का संरक्षण करें और समाज के हित में निरंतर सकारात्मक कार्य करते रहें। विधायक भयाना ने कहा कि भगवान विष्णु मंदिर का जीर्णोद्धार इस क्षेत्र की आस्था और गौरव का प्रतीक है। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक सैनी, भगवान विष्णु मंदिर ट्रस्ट के प्रधान रमेश गुप्ता, सचिव प्रवीण बंसल, पंडित रतनलाल शर्मा, सच्चिदानंद शर्मा, राजकुमार, स्वामी लोकेश्वरानंद महाराज, डॉ. सुनील शर्मा, धर्मवीर रतेरिया, मनजीत जांगड़ा, गोल्डी सैनी, तनुज खुराना उपस्थित रहे।
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103 वर्ष पहले खुदाई में मिली थी प्रतिमा
विष्णु भगवान की यह प्रतिमा वर्ष 1922 में ऐतिहासिक किले की खुदाई में कुम्हार उदमी राम को मिली थी। इसके बाद प्रतिमा को नीम चौक के एक मंदिर में स्थापित करवाया गया। वर्ष 1930 में चौपटा में श्री विष्णु भगवान का मंदिर बनकर तैयार हुआ। इसमें प्रतिमा स्थापित करवाई गई थी। इसके लिए जमीन हिसारिया ब्राह्मणान ने दान में दी थी। वह जस्टिस दिनेश शर्मा के पूर्वज थे। मंदिर के भवन निर्माण जीतू मल मित्तल चानौतिया ने करवाया था। उसने मंदिर निर्माण के लिए अपनी संपत्ति भी बेच दी थी। इस प्रतिमा को देखने के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय भी आए थे। उन्होंने प्रतिमा को काशी या फिर प्रयागराज में प्रस्थापित करने की मांग रखी तो शहरवासियों ने मना कर दिया। उसके बाद ब्रिटिश सरकार ने प्रतिमा को तब लाहौर के पंजाब म्यूजियम या लंदन के म्यूजियम में रखने का प्रयास किया। तब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। ट्रस्ट अब मंदिर की देखरेख कर रही है।
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