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Hisar News: जलझूलनी एकादशी पर शहर में निकाली शोभा यात्रा
Sun, 15 Sep 2024 06:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 15 Sep 2024 06:00 AM IST
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भिवानी में जलझूलनी एकादशी पर श्रीकृष्ण जलवा पूजन के तहत शोभा यात्रा में मौजूद महंत चरणदास महारा
भिवानी। युवा जागृति व जनकल्याण मिशन ट्रस्ट ने शनिवार को शहर में जलझूलनी एकादशी पर शोभा यात्रा निकाली। शोभा यात्रा की शुरुआत स्थानीय जोगीवाला मंदिर से हुई। जो घंटाघर बिचला बाजार जैन चौक घोसियान चौक पतराम गेट होते हुए हनुमान जोहड़ी में संपन्न हुई। इसके बाद हनुमान जोहड़ी में श्रीकृष्ण का स्नान करवाकर, अभिषेक के बाद पूजा-अर्चना कर 56 भोग का प्रसाद लगाया।
कार्यक्रम में सान्निध्य जोगीवाला मंदिर के महंत वेदनाथ महाराज का रहा। इस मौके पर हनुमान जोहड़ी मंदिर के महंत बालयोगी चरणदास महाराज व जोगीवाला मंदिर के महंत वेदनाथ महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण के जन्म के 11वें दिन माता यशोदा ने उनका जलवा पूजन किया था। इसी दिन को जलझूलनी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान करवट लेते हैं। उन्होंने कहा कि जल झूलनी एकादशी के अवसर पर कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना होती है तथा भगवान कृष्ण की शोभायात्रा निकाली जाती है।
उन्होंने कहा कि एकादशी तिथि का वैसे भी सनातन धर्म में बहुत महत्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जलझूलनी एकादशी का व्रत रखे बगैर जन्माष्टमी का व्रत पूर्ण नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजनों का निश्चित रूप से सकारात्मक असर देखने को मिलता है। शोभा यात्रा के दौरान लोगों को जल एवं पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया। जिसमें बताया गया कि आज प्रकृति को जल एवं पर्यावरण संकट से तथा युवा पीढ़ी को नशे के जहर से बचाना बहुत जरूरी है। जब प्रकृति और युवा सुरक्षित होंगे, तभी राष्ट्र के सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा सकती है।
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कार्यक्रम में सान्निध्य जोगीवाला मंदिर के महंत वेदनाथ महाराज का रहा। इस मौके पर हनुमान जोहड़ी मंदिर के महंत बालयोगी चरणदास महाराज व जोगीवाला मंदिर के महंत वेदनाथ महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण के जन्म के 11वें दिन माता यशोदा ने उनका जलवा पूजन किया था। इसी दिन को जलझूलनी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान करवट लेते हैं। उन्होंने कहा कि जल झूलनी एकादशी के अवसर पर कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना होती है तथा भगवान कृष्ण की शोभायात्रा निकाली जाती है।
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उन्होंने कहा कि एकादशी तिथि का वैसे भी सनातन धर्म में बहुत महत्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जलझूलनी एकादशी का व्रत रखे बगैर जन्माष्टमी का व्रत पूर्ण नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजनों का निश्चित रूप से सकारात्मक असर देखने को मिलता है। शोभा यात्रा के दौरान लोगों को जल एवं पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया। जिसमें बताया गया कि आज प्रकृति को जल एवं पर्यावरण संकट से तथा युवा पीढ़ी को नशे के जहर से बचाना बहुत जरूरी है। जब प्रकृति और युवा सुरक्षित होंगे, तभी राष्ट्र के सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा सकती है।
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