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Hisar News: एसडीएम ने सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन व सदस्यों के खिलाफ शुरू की जांच
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हिसार। जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट के तहत प्रदत शक्तियों का दुरुपयोग करने के मामले में एसडीएम जयवीर यादव ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की चेयरपर्सन और सदस्यों के खिलाफ जांच शुरू की। उन्होंने आरोपियों से इस बारे में जवाब मांगा है। वहीं, शिकायतकर्ता ने एसडीएम पर कई तरह के आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को शिकायत देकर जांच अधिकारी बदलवाने की मांग की है। जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता के आरोपों को अनर्गल (बेतुका) बताते हुए कहा कि जांच अधिकारी बदलवाना है तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन आरोप गलत है।
मामले के अनुसार धोबी घाट स्थित गुरु नानक मार्केट के सतीश कुमार ने 8 मई, 2023 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की किशोर न्याय निगरानी समिति के न्यायाधीश को शिकायत भेजी थी। इस शिकायत को जांच के लिए हिसार के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) को भेजा गया और सीजेएम ने इस पर आवश्यक कार्यवाही के लिए हिसार उपायुक्त को भेज दिया। हिसार उपायुक्त ने एसडीएम को मामले की जांच के निर्देश दिए जिसके बाद सोमवार को मामले की जांच शुरू की गई।
शिकायतकर्ता ने लगाए कई आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले बच्चों को एक ऐसे बाल आश्रम में आश्रय देने के आदेश दिए जाते हैं जो बच्चों के साथ यौन शोषण संबंधित मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और उसका पंजीकरण भी निरस्त किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय रेस्क्यू टीम ने अप्रैल माह में तीन-चार बच्चों को बाल श्रम से मुक्त करवाया लेकिन सीडब्ल्यूसी की टीम ने उनको दोपहर 1:30 बजे से 8 बजे तक थाने में रखा, जबकि बच्चों को थाने में नहीं रखा जा सकता। इसके अलावा बाल श्रम करते हुए रेस्क्यू किए गए बच्चों पर दबाव बनाकर उनके बयान बार-बार बदले गए। इसी प्रकार बाल भवन स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण में रह रहे नवजात बच्चों के दूध की व्यवस्था में भी लापरवाही बरती गई।
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मैं गवाह हूं, मुझे जांच में शामिल नहीं किया
सीडब्ल्यूसी के सदस्य मनोज कौशिक ने कहा कि इस शिकायत की पुष्टि करने के लिए उनके पास काफी सबूत है। इन सबूतों को जांच अधिकारी को देने के लिए उन्होंने मेल की और जांच में शामिल करने का आग्रह किया लेकिन उनको जांच में शामिल नहीं किया गया।
आरोपियों और शिकायतकर्ता को बुलाया
मामले की जांच अधिकारी एसडीएम जयवीर यादव ने बताया कि इस मामले की जांच शुरू कर दी है। जिन पर आरोप लगाए गए हैं, बुधवार को उनको जांच में शामिल किया गया और आरोपों के जवाब मांगे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को भी जांच में शामिल किया गया। बाकी किसी को जांच में शामिल करना नियमों के खिलाफ है, इसलिए शामिल नहीं किया गया।
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मामले के अनुसार धोबी घाट स्थित गुरु नानक मार्केट के सतीश कुमार ने 8 मई, 2023 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की किशोर न्याय निगरानी समिति के न्यायाधीश को शिकायत भेजी थी। इस शिकायत को जांच के लिए हिसार के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) को भेजा गया और सीजेएम ने इस पर आवश्यक कार्यवाही के लिए हिसार उपायुक्त को भेज दिया। हिसार उपायुक्त ने एसडीएम को मामले की जांच के निर्देश दिए जिसके बाद सोमवार को मामले की जांच शुरू की गई।
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शिकायतकर्ता ने लगाए कई आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले बच्चों को एक ऐसे बाल आश्रम में आश्रय देने के आदेश दिए जाते हैं जो बच्चों के साथ यौन शोषण संबंधित मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और उसका पंजीकरण भी निरस्त किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय रेस्क्यू टीम ने अप्रैल माह में तीन-चार बच्चों को बाल श्रम से मुक्त करवाया लेकिन सीडब्ल्यूसी की टीम ने उनको दोपहर 1:30 बजे से 8 बजे तक थाने में रखा, जबकि बच्चों को थाने में नहीं रखा जा सकता। इसके अलावा बाल श्रम करते हुए रेस्क्यू किए गए बच्चों पर दबाव बनाकर उनके बयान बार-बार बदले गए। इसी प्रकार बाल भवन स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण में रह रहे नवजात बच्चों के दूध की व्यवस्था में भी लापरवाही बरती गई।
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मैं गवाह हूं, मुझे जांच में शामिल नहीं किया
सीडब्ल्यूसी के सदस्य मनोज कौशिक ने कहा कि इस शिकायत की पुष्टि करने के लिए उनके पास काफी सबूत है। इन सबूतों को जांच अधिकारी को देने के लिए उन्होंने मेल की और जांच में शामिल करने का आग्रह किया लेकिन उनको जांच में शामिल नहीं किया गया।
आरोपियों और शिकायतकर्ता को बुलाया
मामले की जांच अधिकारी एसडीएम जयवीर यादव ने बताया कि इस मामले की जांच शुरू कर दी है। जिन पर आरोप लगाए गए हैं, बुधवार को उनको जांच में शामिल किया गया और आरोपों के जवाब मांगे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को भी जांच में शामिल किया गया। बाकी किसी को जांच में शामिल करना नियमों के खिलाफ है, इसलिए शामिल नहीं किया गया।