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रेलूराम हत्याकांड: सोनिया-संजीव को मिली जमानत पर एससी जस्टिस सख्त, बोले- फिर फांसी की सजा सुना सकता हूं

Wed, 09 Sep 2026 10:32 AM IST
Naveen माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा) Published by: Naveen Updated Wed, 09 Sep 2026 10:32 AM IST
सार

जस्टिस दत्ता ने कहा कि आप दिखाओ यह आपका सांविधानिक अधिकार कैसे है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति दया याचिका मामले में कितना भी समय ले सकते हैं। अनुच्छेद 72 के तहत उनके लिए किसी तरह की समय सीमा नहीं है।

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SC Justice stern over bail granted to Sonia and Sanjeev in Reluram Murder Case I could sentence to death again
रेलू राम पूनिया की बेटी सोनिया और दामाद संजीव कुमार - फोटो : संवाद

विस्तार

रेलूराम हत्याकांड के दोषी सोनिया- संजीव को हाईकोर्ट द्वारा नियमित जमानत देने के विरोध में दायर याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ ने सुनवाई की। जस्टिस दत्ता ने सोनिया-संजीव पर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि समय पूर्व रिहाई आपका सांविधानिक अधिकार नहीं है। रिहाई तो छोड़िए मैं आपको दुबारा फांसी की सजा भी सुना सकता हूं। इस मामले में अभी अगली सुनवाई की तारीख नहीं दी गई है।

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रेलूराम के भतीजे जितेंद्र व अन्य की ओर से याचिका पर खंडपीठ के समक्ष करीब दो घंटे तक तक चली बहस में दोनों न्यायमूर्ति ने सोनिया- संजीव को लेकर कई सवाल किए। सोनिया -संजीव ने अपने काउंटर एफिडेविट में एक स्थान पर लिखा कि सरकार की ओर से एक नीति बनाई गई है जिसके अनुसार समय पूर्व रिहाई उनका सांविधानिक अधिकार है।
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इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि आप दिखाओ यह आपका सांविधानिक अधिकार कैसे है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति दया याचिका मामले में कितना भी समय ले सकते हैं। अनुच्छेद 72 के तहत उनके लिए किसी तरह की समय सीमा नहीं है। न्यायमूर्ति ने कहा कि दया याचिका पर सुनवाई में देरी से किसी को समय पूर्व रिहाई या अन्य किसी रियायत का लाभ नहीं मिल जाता। रिहाई तो छोड़ दीजिए मैं इस मामले में आपको फिर से फांसी की सजा सुना सकता हूं।
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न्यायमूर्ति ने 1966 के नरेश श्रीधरन के केस में 9 जजों की सांविधानिक पीठ के फैसले का हवाला देते कहा कि तब 2 जजों ने उस फैसले को बदल दिया था। इसी संदर्भ में न्यायमूर्ति ने कहा कि शत्रुघ्न चौहान की दया याचिका पर बिना कारण देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 कैदियों की फांसी की सजा को आजीवन कैद में बदल दिया था। आपके मामले में भी कोर्ट फिर से फांसी की सजा सुना सकता है। जितेंद्र व अन्य की ओर से एडवोकेट आइना खोवाल, एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने पक्ष रखा। फिलहाल इस मामले में सुनवाई जारी रहेगी।


क्या है मामला
अगस्त 2001 में लितानी गांव स्थित फार्म हाउस में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), पुत्र सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पुत्री प्रियंका (14), पोता लोकेश (4) और पोतियों शिवानी (2) व 45 दिन की प्रीति की हत्या हुई थी। मई 2004 में हिसार की अदालत ने सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा बरकरार रखी थी। बाद में फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नौ दिसंबर 2025 के फैसले में सोनिया और संजीव को अंतरिम जमानत दी थी। इसके खिलाफ रेलूराम के भतीजे जितेंद्र व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर रखी है।

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