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बढ़ता तापमान गेहूं के लिए चुनौती, किसानों को अपने सुझाव दें वैज्ञानिक : सुमिता मिश्रा
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकार
हिसार। कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि पिछले वर्ष तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी से 15 से 20 प्रतिशत तक गेहूं का उत्पादन गिर गया था। इस बार फिर से फरवरी में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को बदलते मौसम में फसलों को नुकसान से बचाने के लिए अपने सुझाव दें। मौसम के बदलाव को सहन कर सकने वाली किस्मों को विकसित करें। वर्तमान परिवेश में सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। जिसमें एसीएस सुमिता मिश्रा ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 2500 एकड़ के लक्ष्य को पार करते हुए छह हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती करवाई थी। किसानों को जीवामृत व बीजामृत बनाने की ट्रेनिंग देंगे। खरीफ सीजन में 20 हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य होगा। धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) का लक्ष्य एक लाख एकड़ से बढ़ाकर 2 लाख एकड़ रखा है। समर मूंग का लक्ष्य एक लाख एकड़ किया है। ढैंचा को हरी खाद के रूप में उगाने का छह लाख एकड़ का लक्ष्य है। जिसके लिए कृषि विभाग 75 फीसदी अनुदान पर ढैंचा का बीज उपलब्ध करवाएगा। किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जाएंगे।
मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कॉम्बोज ने कहा कि हरियाणा की मिट्टी तथा जलवायु में काफी अंतर है। ऐसे में हमें हर क्षेत्र के लिए विशेष फसल चक्र तथा अलग किस्मों को अपनाना होगा। वैज्ञानिकों से मौसम रोधी फसलों को विकसित करने के लिए आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें ब्लॉक स्तर पर मौसम प्रयोगशाला बनानी होगी। जिससे कम समय में अधिक स्टीक जानकारी दे सकेंगे।
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दस एकड़ में विकसित करेंगे जीएपी
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में 10 एकड़ में गुड एग्रीकल्चर प्रेक्टिस (जीएपी) विकसित किया जा रहा है। जिसमें सभी मॉडल अपनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉडल कृषि विज्ञान केंद्रों तथा किसानों के खेतों में भी बनाएंगे। जिससे किसान अधिक प्रेक्टिकल जानकारी ले सकेंगे।
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किसानों की लागत घटानी होगी
कृषि विभाग के महानिदेशक डॉ. नरहरि बांगड़ ने बताया कि हमें किसानों की लागत कम करनी होगी। फसलों के अच्छे दाम दिलाने के लिए उत्पाद में वैल्यू एडिशन कराना होगा।
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विश्वविद्यालय की उपलब्धियों से अवगत कराया
विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने पिछले एक साल की उपलब्धियों की जानकारी दी। अनुसंधान निदेशक डॉ. जीत राम शर्मा ने एचएयू की ओर से विकसित की गई विभिन्न फसलों की नई किस्मों की जानकारी दी। अतिरिक्त कृषि निदेशक (सांख्यिकी) डॉ. आरएस सोलंकी ने खरीफ फसलों के लिए तैयार की गई विस्तृत रणनीति की जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहूजा ने सभी का स्वागत किया। मंच संचालन डॉ. सुनील ढांडा ने किया। इस कार्यशाला में सभी जिलों के कृषि उपनिदेशक, कृषि विज्ञान केंद्रों के समन्वयक उपस्थित रहे।
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। जिसमें एसीएस सुमिता मिश्रा ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 2500 एकड़ के लक्ष्य को पार करते हुए छह हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती करवाई थी। किसानों को जीवामृत व बीजामृत बनाने की ट्रेनिंग देंगे। खरीफ सीजन में 20 हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य होगा। धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) का लक्ष्य एक लाख एकड़ से बढ़ाकर 2 लाख एकड़ रखा है। समर मूंग का लक्ष्य एक लाख एकड़ किया है। ढैंचा को हरी खाद के रूप में उगाने का छह लाख एकड़ का लक्ष्य है। जिसके लिए कृषि विभाग 75 फीसदी अनुदान पर ढैंचा का बीज उपलब्ध करवाएगा। किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जाएंगे।
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मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कॉम्बोज ने कहा कि हरियाणा की मिट्टी तथा जलवायु में काफी अंतर है। ऐसे में हमें हर क्षेत्र के लिए विशेष फसल चक्र तथा अलग किस्मों को अपनाना होगा। वैज्ञानिकों से मौसम रोधी फसलों को विकसित करने के लिए आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें ब्लॉक स्तर पर मौसम प्रयोगशाला बनानी होगी। जिससे कम समय में अधिक स्टीक जानकारी दे सकेंगे।
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दस एकड़ में विकसित करेंगे जीएपी
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में 10 एकड़ में गुड एग्रीकल्चर प्रेक्टिस (जीएपी) विकसित किया जा रहा है। जिसमें सभी मॉडल अपनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉडल कृषि विज्ञान केंद्रों तथा किसानों के खेतों में भी बनाएंगे। जिससे किसान अधिक प्रेक्टिकल जानकारी ले सकेंगे।
किसानों की लागत घटानी होगी
कृषि विभाग के महानिदेशक डॉ. नरहरि बांगड़ ने बताया कि हमें किसानों की लागत कम करनी होगी। फसलों के अच्छे दाम दिलाने के लिए उत्पाद में वैल्यू एडिशन कराना होगा।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों से अवगत कराया
विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने पिछले एक साल की उपलब्धियों की जानकारी दी। अनुसंधान निदेशक डॉ. जीत राम शर्मा ने एचएयू की ओर से विकसित की गई विभिन्न फसलों की नई किस्मों की जानकारी दी। अतिरिक्त कृषि निदेशक (सांख्यिकी) डॉ. आरएस सोलंकी ने खरीफ फसलों के लिए तैयार की गई विस्तृत रणनीति की जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहूजा ने सभी का स्वागत किया। मंच संचालन डॉ. सुनील ढांडा ने किया। इस कार्यशाला में सभी जिलों के कृषि उपनिदेशक, कृषि विज्ञान केंद्रों के समन्वयक उपस्थित रहे।