फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   research : now rabies test will be by dog skin

शोध : जीवित कुत्ते का स्किन टेस्ट करके लक्षण से पहले ही पता लगा सकेंगे रेबीज

Wed, 30 Sep 2020 12:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 12:48 AM IST
विज्ञापन
research  : now rabies test will be by dog skin
डॉ. चरण कमल सिंह। - फोटो : Hisar
संदीप बिश्नोई
विज्ञापन

हिसार। अब रेबीज का पता कुत्ते के मरने से पहले भी लगाया जा सकेगा। कुत्ते की स्किन का टेस्ट करके ऐसा कर सकेंगे। इससे कुत्ते में रेबीज के लक्षण आने से पहले ही पता लग जाएगा कि कुत्ता रेबीज संक्रमित है और समय पूर्व पता लगने के बाद कुत्ते को मारा भी जा सकेगा, ताकि वह अन्य लोगों या कुत्तों को रेबीज से संक्रमित न करे।
रेबीज पर काम कर रहे गुरु अंगद देव वेटरनरी ऐंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी, लुधियाना के वेटरनरी पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य वैज्ञानिक डॉ. चरण कमल सिंह ने यह शोध किया है। पिछले करीब 16 वर्षों से चल रहे इस शोध कार्य में उनके चार शोधार्थी पीएचडी कर चुके थे। उन्होंने बताया कि जानवरों पर होने वाला यह इस तरह का दुनिया का पहला शोध है। डॉ. चरण कमल सिंह रेबीज पर अब तक 100 शोधपत्र, 4 पुस्तकें, 20 चैप्टर लिख चुके हैं। 40 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में लीड पेपर प्रेजेंटेशन देने के अलावा डब्ल्यूएचओ और वर्ल्ड एनीमल आर्गेनाइजेशन की बैठकों में भाग लेते रहे हैं।
विज्ञापन

पहले कुत्ते के मरने के बाद पता लगता था कि उसे रेबीज है
अमर उजाला संवाददाता से फोन पर चर्चा करते हुए डॉ. चरण कमल सिंह ने बताया कि अब तक कुत्ते के मरने के बाद ही पता लगता था कि कुत्ते को रेबीज है। मरने पर उसका दिमाग निकालकर टेस्ट करते थे। मरने से पहले उसे केवल उसके लक्षणों के आधार पर पहचाना जाता था। ऐसे में अब कोई बिना लक्षण वाला कुत्ता इंसान को काटता है तो कुत्ते की गर्दन या सिर के आसपास की चमड़ी लेकर पता लगा सकते हैं कि उक्त कुत्ते को रेबीज है या नहीं। फिर उसी आधार पर कुत्ते को जल्द से जल्द मारा जा सकेगा और इंसान भी रिपोर्ट के अनुसार अपना इलाज करवा सकेंगे। अगर कुत्ते की जांच कर उसे मारा नहीं जाता तो वह अन्य कुत्तों और लोगों को भी काटकर रेबीज फैलाता रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्लाइवा पर शुरू किया शोध, चमड़ी से मिली सफलता
डॉ. चरण कमल सिंह कहते हैं कि हम इस विषय पर पिछले लगभग 16 वर्षों से काम कर रहे थे। इस दौरान इस विषय पर चार विद्यार्थियों ने पीएचडी भी की। आरंभ में हमने स्लाइवा से टेस्ट करने को लेकर लंबे समय तक शोध किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद बाल से और फिर यूरिन लेकर भी शोध किए गए, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। अंत में उन्होंने कुत्ते की चमड़ी को लेकर शोध शुरू किया तो आंशिक सफलता मिली और फिर विस्तृत अध्ययन के साथ ही शोध कार्य चलता रहा। आखिरकार चमड़ी से ही रेबीज का पता लगाने में कामयाब हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed