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Hisar News: किताबें पढ़ी, एप से सीखी साइन लैंग्वेज, अब माता-पिता इशारों से समझ रहे बच्चों के मन की बात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 Sep 2023 11:18 PM IST
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Read books, learned sign language from app, now parents are understanding children's thoughts through gestures.
हिसार। हम अपनी भावनाओं को लिखकर या फिर बोलकर दूसरों को बता सकते हैं। मगर काफी बच्चे व परिवार के ऐसे सदस्य हैं जो सुन सकते हैं न ही बोल सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए अपने भावों को प्रस्तुत करने का सबसे अच्छा माध्यम है सांकेतिक भाषा। अपने हाथों के संकेतों से ये बड़ी सहजता से अपनी बात कहते हैं और उसे समझते हैं। शुक्रवार को नई अनाजमंडी स्थित जिला श्रवण वाणी मूक बधिर कल्याण केंद्र में मूक बधिर बच्चों के अभिभावकों से बातचीत की गई। यहां समझने का प्रयास किया कि आखिर इनकी अनोखी दुनिया कैसी है। इन्हें जीवन में किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। समाज का ऐसे बच्चों के प्रति क्या दृष्टिकोण है। हर साल 23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है।
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सेक्टर-33 निवासी ताराचंद सुथार बताते हैं कि वह आदमपुर के लाखपुर के सरकारी स्कूल में हेड मास्टर हैं। उनका एक बेटा नितिन जन्म से ही न सुन सकता है, न ही बोल सकता है। उन्होंने अपने बेटे की बात समझने के लिए साइन लैंग्वेज की किताबें पढ़ी, एप की मदद से साइन लैंग्वेज सीखी। नितिन की माता कांता देवी ने भी मूक बधिर केंद्र में कई महीनों तक क्लास लगाकर साइन लैंग्वेज सीखी। अब वह अपने बेटे नितिन के इशारों की बातें 70 प्रतिशत तक समझ लेते हैं। नितिन जिला श्रवण वाणी मूक बधिर कल्याण केंद्र में 11वीं कक्षा का छात्र है।
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ताराचंद सुथार ने बताया कि हर समय बेटे के पास ही रहना पड़ता है। आज भी मूक बधिर बच्चों को हीन दृष्टि से देखा जा रहा है। वहीं, मूक बधिर बच्चों की खास बात है कि वह अपनी ही सोसायटी के बच्चों के साथ रहना पसंद करते हैं। ताराचंद सुथार ने कहा कि पूरे हरियाणा में हिसार, सिरसा, पंचकूला, करनाल, गुरुग्राम, नूह स्थित रायपुर रानी सहित आठ मूक बधिर केंद्र हैं। उन्होंने बताया कि वेलफेयर सोसायटी के चेयरपर्सन शरणजीत कौर ने मूक बधिर बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए अहम भूमिका निभाई है। हिसार के केंद्र में सिरसा, जींद, करनाल के अलावा राजस्थान के बच्चे रहते हैं। इसके लिए हॉस्टल की सुविधा है।
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रामपुरा मोहल्ला में एक परिवार के सभी सदस्य मूक बधिर
रामपुरा मोहल्ला में रहने वाले एक परिवार के सभी सदस्य मूक बधिर हैं। इस परिवार में माता-पिता, एक बेटा और एक बेटी है। मगर सभी एक-दूसरे के इशारों को आसानी से समझ लेते हैं। बेटा सरल कक्षा तीसरी और बेटी जानवी कक्षा आठवीं की छात्रा है। दाेनों पढ़ाई में भी अव्वल है। वहीं, नई अनाजमंडी स्थित जिला श्रवण वाणी मूक बधिर कल्याण केंद्र में हर शनिवार को मूक बधिर बच्चों के अभिभावकों के लिए दो घंटे तक क्लास लगाई जाती है। उन्हें साइन लैंग्वेज सिखाई जाती है, ताकि वह अपने बच्चों की बातें इशारों से आसानी से समझ सकें।

जिला श्रवण वाणी मूक बधिर कल्याण केंद्र पर एक नजर
- जिला श्रवण वाणी मूक बधिर कल्याण केंद्र बना : वर्ष 1981
- स्थान : नई अनाजमंडी
- कक्षा पहली से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी पढ़ रहे
- विद्यार्थियों की संख्या : 265


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