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सीवर टैंक की जहरीली गैस के बाद लचर व्यवस्था ने चारों को मारा
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उकलाना/ हिसार। उकलाना में चार लोगों की सीवर टैंक में जहरीली गैस से मौत के लिए प्रशासन की व्यवस्था भी जिम्मेदार रही। स्थिति यह रही कि हादसे के पांच घंटे बाद भी मौके पर कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं कराया गया। चारों लोगों को टैंक से बाहर निकालने के दो घंटे बाद तक कोई यह जांच करने वाला नहीं था कि उनकी मौत हो चुकी या जिंदा हैं। मंगलवार की रात करीब 10.30 बजे महेंद्र के शरीर में कुछ हरकत हुई, तो उसे निजी अस्पताल भेजा गया। कुछ समय बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया।
इतने बड़े हादसे के बाद प्रशासन की व्यवस्था हर स्तर पर लचर साबित हुई, जिस समय लोगों को हादसे की जानकारी मिली, उस समय बिजली गुल थी। करीब आधा घंटा इंतजार के बाद बिजली आई। इसके बाद करीब सवा छह बजे टैंक को खाली करने की प्रक्रिया शुरू हो सकी। साढ़े छह बजे तक टैंक खाली होने के बाद शवों को निकालने के लिए प्रशासन के पास कोई संसाधन उपलब्ध नहीं था।
मौके पर सबसे पहले पहुंची फायर ब्रिगेड टीम के पास कोई मास्क या गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं थे। एसटीपी के स्टोर में भी यह संसाधन नहीं मिले। पुलिस कर्मी, होमगार्ड और ग्रामीणों ने सरिये की कुंडी बनाकर चारों को निकाला। शवों को निकालने के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार देने का भी कोई प्रबंध नहीं था। मौके पर दो एंबुलेंस बुलाई गई थी, जिसमें कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। चारों युवकों को निकालकर एक किनारे रख दिया गया। दो घंटे तक कोई यह बताने वाला नहीं था कि उसमें कोई जिंदा तो नहीं। करीब दो घंटे बाद सवा दस बजे महेंद्र के शरीर में कुछ हलचल हुई, तो उसके जिंदा होने की आस में उसे एंबुलेंस के जरिये निजी अस्पताल पहुंचाया गया। रात करीब 11 बजे निजी अस्पताल के चिकित्सक डॉ.देवेंद्र सांगवान को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने चारों को मृत घोषित किया।
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चार लोगों की मौत अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई है। बिना सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतारा जाना पूरी तरह से गैर कानूनी है। अदालतों की ओर से बार-बार आदेश आने के बाद भी उन्हें पूरा नहीं किया जाता। मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख का मुआवजा व एक-एक नौकरी दी जाए। मामले की उच्चस्तरीय जांच करा कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
बलबीर सिंह कुलेरी , प्रदेशाध्यक्ष ,अखिल वाल्मीकि महापंचायत
बिना सेफ्टी किट के लोगों को मौत के कुएं में उतार दिए। कोई अधिकारी मौके पर नहीं था। इतने बड़े हादसे के छह घंटे बाद मौके पर चिकित्सक तक उपलब्ध नहीं कराए गए। प्रशासन के अधिकारियों पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। अगर हादसे के बाद मौके पर संसाधन उपलब्ध कराए गए होते तो शायद कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं। परिवारों को एक एक करोड़ रुपये व सरकारी नौकरी दी जाए।
नरेश सेलवाल, पूर्व विधायक, उकलाना
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इतने बड़े हादसे के बाद प्रशासन की व्यवस्था हर स्तर पर लचर साबित हुई, जिस समय लोगों को हादसे की जानकारी मिली, उस समय बिजली गुल थी। करीब आधा घंटा इंतजार के बाद बिजली आई। इसके बाद करीब सवा छह बजे टैंक को खाली करने की प्रक्रिया शुरू हो सकी। साढ़े छह बजे तक टैंक खाली होने के बाद शवों को निकालने के लिए प्रशासन के पास कोई संसाधन उपलब्ध नहीं था।
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मौके पर सबसे पहले पहुंची फायर ब्रिगेड टीम के पास कोई मास्क या गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं थे। एसटीपी के स्टोर में भी यह संसाधन नहीं मिले। पुलिस कर्मी, होमगार्ड और ग्रामीणों ने सरिये की कुंडी बनाकर चारों को निकाला। शवों को निकालने के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार देने का भी कोई प्रबंध नहीं था। मौके पर दो एंबुलेंस बुलाई गई थी, जिसमें कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। चारों युवकों को निकालकर एक किनारे रख दिया गया। दो घंटे तक कोई यह बताने वाला नहीं था कि उसमें कोई जिंदा तो नहीं। करीब दो घंटे बाद सवा दस बजे महेंद्र के शरीर में कुछ हलचल हुई, तो उसके जिंदा होने की आस में उसे एंबुलेंस के जरिये निजी अस्पताल पहुंचाया गया। रात करीब 11 बजे निजी अस्पताल के चिकित्सक डॉ.देवेंद्र सांगवान को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने चारों को मृत घोषित किया।
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चार लोगों की मौत अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई है। बिना सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतारा जाना पूरी तरह से गैर कानूनी है। अदालतों की ओर से बार-बार आदेश आने के बाद भी उन्हें पूरा नहीं किया जाता। मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख का मुआवजा व एक-एक नौकरी दी जाए। मामले की उच्चस्तरीय जांच करा कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
बलबीर सिंह कुलेरी , प्रदेशाध्यक्ष ,अखिल वाल्मीकि महापंचायत
बिना सेफ्टी किट के लोगों को मौत के कुएं में उतार दिए। कोई अधिकारी मौके पर नहीं था। इतने बड़े हादसे के छह घंटे बाद मौके पर चिकित्सक तक उपलब्ध नहीं कराए गए। प्रशासन के अधिकारियों पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। अगर हादसे के बाद मौके पर संसाधन उपलब्ध कराए गए होते तो शायद कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं। परिवारों को एक एक करोड़ रुपये व सरकारी नौकरी दी जाए।
नरेश सेलवाल, पूर्व विधायक, उकलाना