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Hisar News: पीजीआई की डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर ट्रांसफर करवाए 9.95 लाख रुपये
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हिसार/रोहतक। साइबर ठगों ने पीजीआई की महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 9.95 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। आरोपियों ने सीबीआई की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर रुपये ट्रांसफर करवाए हैं। डॉक्टर ने साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया है।
हिसार जिले के गांव पाबड़ा निवासी प्रीति ने साइबर क्राइम थाने में दी शिकायत में बताया कि वह पीजीआई के निषेचेतन विभाग (एनेस्थीसिया) में कार्यरत हैं। साथ ही गर्ल्स हॉस्टल में रहती हैं। 14 अगस्त को उनके पास एक नंबर से कॉल आई।
फोन करने वाले ने कहा कि टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया से बोल रहा हूं। आपका नंबर दो घंटे में बंद हो जाएगा क्योंकि आपके आधार नंबर से एक और मोबाइल नंबर चल रहा है। उस नंबर से लड़कियों को परेशान किया जा रहा है।
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तत्काल बताए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल होने की शिकायत करें। उसने बताए गए नंबर पर कॉल की तो कहा गया कि आपके नाम से कई क्रेडिट कार्ड व बैंक के कागजात मिले हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग में प्रयोग किए जा रहे हैं। साथ ही आपके खिलाफ कुलाबा मुंबई पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।
फर्जी एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट का फर्जी पत्र भेजकर कहा हर घंटे अपनी अपडेट दें
साइबर ठगों ने डॉक्टर के व्हाट्सएप पर मनी लॉन्ड्रिंग केस की फर्जी एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट का फर्जी पत्र व सीबीआई के फर्जी कागजात भेजे। उनसे कहा कि जो निवेश कर रखा है उसकी विस्तार से जानकारी देनी पड़ेगी। साथ ही हर घंटे अपनी अपडेट टैक्स मैसेज भेजकर देनी होगी। जब भी ड्यूटी से हॉस्टल आएं तुरंत मैसेज भेजकर बताएं। व्हाट्सएप के माध्यम से लगातार सर्विलांस पर रहना होगा। अगर सहयोग नहीं किया तो सभी बैंक अकाउंट सील कर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपियों ने कहा कि बैंक अकाउंट में जितना पैसा है वह एक अकाउंट नंबर पर भेजना होगा ताकि उसका मिलान किया जा सके। 18 अगस्त को डॉक्टर ने पीजीआई स्थित एसबीआई की ब्रांच से 9 लाख 95 हजार रुपये आरटीएस के माध्यम से बताए गए अकाउंट में भेज दिए। आरोपी और पैसे मांगने लगे। साथ ही जब वह दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के केस के बारे में पूछती तो टालमटोल करने लगे। इससे उसे शक हुआ तो पूछताछ की। तब पता चला कि उसके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है।
घबराएं नहीं, तत्काल पुलिस और परिजनों को बताएं
साइबर ठग केंद्रीय जांच अधिकारियों का डर दिखाकर ठगी करते हैं। सबसे पहले याद रखें कि कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम का कोई शब्द नहीं है। अगर कोई कॉल करके दबाव बनाता है तो तत्काल साइबर क्राइम के हेल्पलाइन 1930 या पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करें। साथ ही अपने परिवार या किसी परिचित को अवगत करवाएं। -इंस्पेक्टर कुलदीप नैन, प्रभारी थाना, साइबर क्राइम।
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हिसार जिले के गांव पाबड़ा निवासी प्रीति ने साइबर क्राइम थाने में दी शिकायत में बताया कि वह पीजीआई के निषेचेतन विभाग (एनेस्थीसिया) में कार्यरत हैं। साथ ही गर्ल्स हॉस्टल में रहती हैं। 14 अगस्त को उनके पास एक नंबर से कॉल आई।
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फोन करने वाले ने कहा कि टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया से बोल रहा हूं। आपका नंबर दो घंटे में बंद हो जाएगा क्योंकि आपके आधार नंबर से एक और मोबाइल नंबर चल रहा है। उस नंबर से लड़कियों को परेशान किया जा रहा है।
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तत्काल बताए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल होने की शिकायत करें। उसने बताए गए नंबर पर कॉल की तो कहा गया कि आपके नाम से कई क्रेडिट कार्ड व बैंक के कागजात मिले हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग में प्रयोग किए जा रहे हैं। साथ ही आपके खिलाफ कुलाबा मुंबई पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।
फर्जी एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट का फर्जी पत्र भेजकर कहा हर घंटे अपनी अपडेट दें
साइबर ठगों ने डॉक्टर के व्हाट्सएप पर मनी लॉन्ड्रिंग केस की फर्जी एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट का फर्जी पत्र व सीबीआई के फर्जी कागजात भेजे। उनसे कहा कि जो निवेश कर रखा है उसकी विस्तार से जानकारी देनी पड़ेगी। साथ ही हर घंटे अपनी अपडेट टैक्स मैसेज भेजकर देनी होगी। जब भी ड्यूटी से हॉस्टल आएं तुरंत मैसेज भेजकर बताएं। व्हाट्सएप के माध्यम से लगातार सर्विलांस पर रहना होगा। अगर सहयोग नहीं किया तो सभी बैंक अकाउंट सील कर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपियों ने कहा कि बैंक अकाउंट में जितना पैसा है वह एक अकाउंट नंबर पर भेजना होगा ताकि उसका मिलान किया जा सके। 18 अगस्त को डॉक्टर ने पीजीआई स्थित एसबीआई की ब्रांच से 9 लाख 95 हजार रुपये आरटीएस के माध्यम से बताए गए अकाउंट में भेज दिए। आरोपी और पैसे मांगने लगे। साथ ही जब वह दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के केस के बारे में पूछती तो टालमटोल करने लगे। इससे उसे शक हुआ तो पूछताछ की। तब पता चला कि उसके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है।
घबराएं नहीं, तत्काल पुलिस और परिजनों को बताएं
साइबर ठग केंद्रीय जांच अधिकारियों का डर दिखाकर ठगी करते हैं। सबसे पहले याद रखें कि कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम का कोई शब्द नहीं है। अगर कोई कॉल करके दबाव बनाता है तो तत्काल साइबर क्राइम के हेल्पलाइन 1930 या पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करें। साथ ही अपने परिवार या किसी परिचित को अवगत करवाएं। -इंस्पेक्टर कुलदीप नैन, प्रभारी थाना, साइबर क्राइम।