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Hisar News: विशेष अदालत में एडीजीपी स्टेट क्राइम, हिसार जोन के डीआईजी व जांच अधिकारी के खिलाफ याचिका दायर
Sat, 02 Mar 2024 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 02 Mar 2024 12:20 AM IST
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हिसार। पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह, टीवी अभिनेत्री मुनमुन दत्ता उर्फ बबीताजी और बॉलीवुड अभिनेत्री युविका चौधरी के खिलाफ अनुसूचित जाति के लोगों के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी करने का मामला दर्ज है। अब एससी-एसटी एक्ट के तहत हिसार की स्थापित विशेष अदालत में याचिका दायर की गई है। शिकायतकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में दर्ज मुकदमे में तीन साल बाद भी चालान पेश न करने का आरोप लगाया है। याचिका में स्टेट क्राइम ब्रांच के एडीजीपी ओपी सिंह, स्टेट क्राइम ब्रांच हिसार जोन के इंचार्ज आईपीएस हामिद अख्तर और जांच अधिकारी डीएसपी ललित सिंह के खिलाफ तीनों आरोपी हस्तियों को जांच में फायदा पहुंचाने और अनुसूचित जाति से संबंधित शिकायतकर्ता के केस को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। इस याचिका पर अदालत ने बहस के लिए 27 मार्च की तिथि निर्धारित की है।
शिकायतकर्ता रजत कलसन ने बताया कि युवराज सिंह के खिलाफ जनवरी 2021, मुनमुन दत्ता उर्फ बबीता और टीवी अभिनेत्री युविका चौधरी के खिलाफ मई 2021 में एससी-एसटी एक्ट के तहत थाना शहर हांसी में प्राथमिकी की दर्ज हुई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद युवराज सिंह ने मुकदमे को खारिज करने के लिए पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट चंडीगढ़ ने खारिज कर दिया था। इसी तरह से मुनमुन दत्ता ने भी सुप्रीम कोर्ट में उक्त मुकदमे को खारिज करने के लिए याचिका दायर की थी और वह भी सुप्रीम कोर्ट से डिसमिस हो गई थी। तीनों हस्तियों को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी और वे हांसी पुलिस के जांच अधिकारी विनोद शंकर के समक्ष पेश होकर जांच में शामिल हुए थे। इस दौरान उनकी औपचारिक गिरफ्तारी भी हुई थी। हांसी पुलिस ने इस मामले की जांच लगभग पूरी कर ली थी। मगर अचानक हरियाणा पुलिस ने तीनों हस्तियों के खिलाफ मुकदमों की जांच हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंप दी, जिसकी जांच डीएसपी ललित कुमार कर रहे हैं। कलसन का कहना है कि एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में दर्ज मामलों में पुलिस को 60 दिन के अंदर जांच पूरी करनी होती है और सीआरपीसी की धारा में अधिकतम समय सीमा 90 दिन की है। इसके बावजूद तीन साल बाद भी स्टेट क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी ने तीनों सेलिब्रिटीज के खिलाफ विशेष अदालत में चालान पेश नहीं किया है।
तीनों हस्तियों के खिलाफ दलित समाज को अपमानजनक भाषा बोलने का वीडियो जांच एजेंसी के पास है। इसके बावजूद अदालत में चालान पेश न करने से स्पष्ट प्रतीत होता है कि पुलिस आरोपियों के फायदे के एंगल में जांच कर रही है। यह भी कहा जा सकता है कि जानबूझकर जांच को रोका गया है। - अधिवक्ता सुनीता रानी, शिकायतकर्ता की वकील
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शिकायतकर्ता रजत कलसन ने बताया कि युवराज सिंह के खिलाफ जनवरी 2021, मुनमुन दत्ता उर्फ बबीता और टीवी अभिनेत्री युविका चौधरी के खिलाफ मई 2021 में एससी-एसटी एक्ट के तहत थाना शहर हांसी में प्राथमिकी की दर्ज हुई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद युवराज सिंह ने मुकदमे को खारिज करने के लिए पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट चंडीगढ़ ने खारिज कर दिया था। इसी तरह से मुनमुन दत्ता ने भी सुप्रीम कोर्ट में उक्त मुकदमे को खारिज करने के लिए याचिका दायर की थी और वह भी सुप्रीम कोर्ट से डिसमिस हो गई थी। तीनों हस्तियों को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी और वे हांसी पुलिस के जांच अधिकारी विनोद शंकर के समक्ष पेश होकर जांच में शामिल हुए थे। इस दौरान उनकी औपचारिक गिरफ्तारी भी हुई थी। हांसी पुलिस ने इस मामले की जांच लगभग पूरी कर ली थी। मगर अचानक हरियाणा पुलिस ने तीनों हस्तियों के खिलाफ मुकदमों की जांच हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंप दी, जिसकी जांच डीएसपी ललित कुमार कर रहे हैं। कलसन का कहना है कि एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में दर्ज मामलों में पुलिस को 60 दिन के अंदर जांच पूरी करनी होती है और सीआरपीसी की धारा में अधिकतम समय सीमा 90 दिन की है। इसके बावजूद तीन साल बाद भी स्टेट क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी ने तीनों सेलिब्रिटीज के खिलाफ विशेष अदालत में चालान पेश नहीं किया है।
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तीनों हस्तियों के खिलाफ दलित समाज को अपमानजनक भाषा बोलने का वीडियो जांच एजेंसी के पास है। इसके बावजूद अदालत में चालान पेश न करने से स्पष्ट प्रतीत होता है कि पुलिस आरोपियों के फायदे के एंगल में जांच कर रही है। यह भी कहा जा सकता है कि जानबूझकर जांच को रोका गया है। - अधिवक्ता सुनीता रानी, शिकायतकर्ता की वकील
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