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ग्रांट जारी न हुई तो सरकारी समारोह का बहिष्कार करेंगे सरपंच
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
Updated Sun, 23 Oct 2016 12:20 AM IST
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Panchayat
- फोटो : Bureau
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पंचायत चुनावों के नौ महीन बीत जाने के बावजूद अभी तक सरकार की ओर से पंचायतों को विकास कार्यों के लिए ग्रांट जारी नहीं की गई है। इसको लेकर पंचायत प्रतिनिधियों में जबरदस्त रोष है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पंचायतों को ग्रांट जारी नहीं हुई तो सभी पंचायतें एकजुट होकर सभी सरकारी समारोहों का बहिष्कार करेंगी। इसी मुद्दे को लेकर हिसार खंड द्वितीय के तहत आने वाली पंचायतों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता सरपंच एसोसिएशन के खंड प्रधान राजेश जाटान शाहपुर ने की।
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बैठक में सरकारी लेटलतीफी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए हिंदवान से सरपंच साधुराम ने कहा कि अभी तक प्रदेश सरकार द्वारा नव चयनित पंचायतों को किसी भी प्रकार की अनुदान राशि नहीं मिली है। इसके चलते गांवों में विकास कार्य शुरू नहीं हुए हैं। प्रधान राजेश जाटान ने कहा कि एक तरफ तो सरकार पारदर्शिता व भ्रष्टाचार मुक्त होने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ पंचायत समिति व जिला परिषद ठेकेदारी प्रथा चलाकर कमीशनखोरी का धंधा चलाया हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत समिति चेयरमैन द्वारा ग्राम पंचायतों से जबरदस्ती पंचायती आय का दस प्रतिशत पंचायत समिति फंड में जमा कराने के लिए विवश किया जा रहा है तथा जो सरपंच यह राशि जमा नहीं करवाता, उसे धमकी दी जाती है कि उनके विकास कार्यों प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
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पंचायत समिति चेयरमैन के इस तरह के अभद्र व्यवहार पर उन्होंने भारी रोष जताया। चंदननगर के सरपंच सतेंद्र कुमार ने कहा कि ग्रांट न मिलने से सबसे ज्यादा आर्थिक परेशानी उन नवगठित पंचायतों को उठानी पड़ रही है, जिनका आय का भी कोई साधन नहीं है। सिंघराण के सरपंच सुनील ने कहा कि जो भी राशि ग्राम पंचायत के खाते में आएगी तो उस राशि को ग्राम पंचायतें ही खर्च करेंगी, चाहें वह राशि दस लाख से अधिक ही क्यों न हो। क्योंकि इसकी जवाबदेही ग्राम पंचायत की ही बनती है। बीड़ सरपंच मनोज ने कहा कि दस लाख से अधिक की राशि पंचायत के खाते में आती है तो अधिकारी इस राशि से विकास कार्यों का प्रस्ताव भेजने का दबाव बनाते हैं।
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बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए निर्णय लिया गया कि अगर सरकार ने जल्द ही ग्रांट जारी नहीं की और ग्राम पंचायतों की समस्याओं का निवारण नहीं हुआ तो सभी सरपंच एकजुट होकर सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करेंगे। इस मौके पर पनिहार से सरपंच सुभाष, धीरणवास से सरपंच जयसिंह, न्यौली से सुनील मूंड, रावलवास खुर्द से ईश्वर, बालसमंद से सरपंच मंजू, किरतान से राजपाल, बांडाहेड़ी से हवासिंह, सीसवाला से राजपाल मांडिया, बुड़ाक से मेवा सिंह, पनिवार से सावित्री देवी, सुंडावास से पिंकी, डोभी से किरण, रावलवास कलां से सुरेंद्र, आर्यनगर से जगदीश, सलेमगढ़ से धर्मवीर, काजला से पवन, लुदास से गुरदेव सिंह, चिकनवास से रामस्वरूप, भिवानी रोहिल्ला से सरपंच प्रतिनिधि रामफल, मुकलान से मनवीर सिंह, बासड़ा से संतलाल, सरसाना से सुषमा देवी, पातन से राजेश, टोकस से सुमन देवी सहित सभी सरपंच व अन्य सरपंच प्रतिनिधि मौजूद थे।