One Stop Center: पीड़ित महिलाओं को कानूनी सलाह देने के लिए खोले गए सेंटर का हाल बेहाल, कर्मचारियों का टोटा
हरियाणा में अधिकतर जिलों में चल रहे वन स्टॉप सेंटरों में मनो चिकित्सक की नियुक्ति नहीं है। ऐसे में सेंटर पर आने वाली पीड़िताओं की काउंसिलिंग के लिए बाहर से मनो चिकित्सक बुलाना पड़ता है। वहीं,
महिला एवं बाल सरंक्षण अधिकारी बबीता चौधरी ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा के ज्यादा केस सामने आ रहे हैं।
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निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार की ओर से हिंसा प्रताड़ित महिलाओं को जल्द न्याय दिलवाने और उनके रहने के लिए देशभर में 750 के करीब वन स्टॉप सेंटर खोले थे। हरियाणा प्रदेश के हर जिले में पीड़िता को कानूनी सलाह के लिए सेंटर खोले गए, लेकिन अब इन सेंटरों का हाल यह है कि इन्हें खुद न्याय की जरूरत है। रोहतक के वन स्टॉप सेंटर में एक और हिसार के सेंटर में 4 कर्मचारी ही नियुक्त हैं। जबकि स्वीकृत पदों की संख्या 11 होनी चाहिए। वन स्टॉप सेंटर के खुद के जख्म हरे हैं, अगर कर्मचारी मिले तो शायद ये जख्म भर सके। प्रदेश सरकार महिलाओं को जल्द न्याय दिलवाने के वादे करती है, मगर हकीकत कुछ और है।
घरेलू हिंसा के आते हैं अधिक केस
महिला एवं बाल सरंक्षण अधिकारी बबीता चौधरी ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा के ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। हर महीने 35 से 40 केस सेंटर में आते हैं। यहां पर आने वाली पीड़िता की पहले काउंसिलिंग होती है, उसके बाद उसे कानूनी राय दिलवाई जाती है। बाद में दोनों पक्षों को आमने-सामने किया जाता है। इसके बाद भी पीड़िता आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चाहती है तो पुलिस में केस दर्ज करवाया जाता है। पीड़िता पांच दिन तक वन स्टॉप सेंटर में रह सकती है।
हिसार में 11 पद स्वीकृत, 4 पर नियुक्ति
आईटी 01
एमपीडब्लयू 02
सिक्योरिटी गार्ड 01
केंद्रीय प्रशासक 00
एएनएम 00
कानूनी सलाहकार 00
मनोचिकित्सक 00
भिवानी में 2 पद खाली
केंद्रीय प्रशासक 01
कानूनी सलाहकार 01
मेडिकल स्टाफ 01
सिक्योरिटी गार्ड 03
चपरासी 02
आईटी 01
मनोचिकित्सक 00
चरखी दादरी में 10 पदों पर स्टॉफ है, सिर्फ एक पद खाली है।
यहां पर दे सकते हैं शिकायत
अपराध होने के बाद पीड़िता वन स्टॉप सेंटर द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल कर मदद ले सकती है।
प्रदेश के अधिकतर वन स्टॉप सेंटर में नहीं है साइक्लाेजिस्ट
प्रदेश के अधिकतर जिलों में चल रहे वन स्टॉप सेंटरों में मनो चिकित्सक की नियुक्ति नहीं है। ऐसे में सेंटर पर आने वाली पीड़िताओं की काउंसिलिंग के लिए बाहर से मनो चिकित्सक बुलाना पड़ता है। कई बार मनो चिकित्सक की उपलब्धता न होने के कारण काउंसिलिंग नहीं हो पाती। ऐसे में पीड़िता को परेशानी झेलनी पड़ती है।