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काटना था केक, करना पड़ा बेटे का अंतिम संस्कार
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मौके पर लगाया गया जस्टिस फॉर पार्थ का पोस्टर।
- फोटो : Hisar
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हिसार। 12 क्वार्टर निवासी मोहित को पार्थ के जन्मदिन पर शनिवार को केक कटवाना था, लेकिन उन्हें बेटे का अंतिम संस्कार करना पड़ा। देर शाम बस स्टैंड के नजदीक ऋषि नगर स्थित श्मशानघाट में सात वर्षीय पार्थ की चिता को अग्नि देते समय भी मोहित के हाथ कांप रहे थे। दृश्य देख वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखों से आंसू बह रहे थे।
शाम साढ़े 5 बजे नागरिक अस्पताल से पार्थ का शव लेने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। इससे पहले करीब साढ़े 6 घंटे तक परिजन बस स्टैंड के बाहर आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जाम लगाए रहे।
गायब मिले कुछ दस्तावेज
बच्चे के दादा सुभाष ने आरोप लगाया कि पुलिस मोहित को लेकर मान अस्पताल गई थी। वहां पर पार्थ के ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेज डॉक्टर के कमरे या ऑपरेशन थियेटर में मिलने की बजाय अन्य कमरे में बेड पर मिले। उनमें से वह कागज भी गायब था, जिसमें मोहित के हस्ताक्षर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करके सबूत मिटाने का काम किया जा रहा है।
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पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी
पोस्टमार्टम करने वाले बोर्ड में डॉ. रिपनजीत कौर, डॉ. राजिंद्र, डॉ. हीना, डॉ. कर्मवीर और डॉ. नागेश शामिल थे। इस दौरान पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। उसके बाद विसरा को नायब तहसीलदार ललित कुमार की देखरेख में मधुबन लैब और अग्रोहा लैब में भिजवाया गया।
जाम के कारण नहीं चल सकीं बसें, सवारियां हुईं परेशान
बस स्टैंड के मुख्य गेट के बाहर परिजनों द्वारा जाम लगाने से बसों का संचालन भी रुक गया। न तो कोई बस बाहर से आ सकी और नहीं कोई बस बाहर जा सकी। इससे सवारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बसों का इंतजार कर रही सवारियां पैदल ही अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गईं।
डीवीआर में क्या दिखा
अस्पताल से पुलिस द्वारा बरामद की डीवीआर में ऑपरेशन के दौरान की फुटेज है। एएसपी उपासना ने बताया कि डीवीआर में ऑपरेशन के समय चार लोग ऑपरेशन थियेटर में दिखाई दे रहे हैं। इनमें से एक सर्जरी कर रहा है। एक एनेस्थीसिया दे रहा है और दो उनकी मदद के लिए खड़े हैं और ये सभी पुरुष हैं। सभी ने मास्क लगाए थे और ड्रेस भी एक जैसी थी, जिस कारण पहचान नहीं हो पाई है और जल्द ही इनकी पहचान कर ली जाएगी।
जिस डॉक्टर को बुलाया वह नहीं आया था
सूत्रों के अनुसार मान अस्पताल के डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए अंबाला से जिस डॉक्टर को बुलाया था, वह नहीं आया, लेकिन एक टीम जरूर आई थी। सूत्रों के अनुसार मान अस्पताल का चिकित्सक कुछ दिन पहले ही विदेश से भैंगेपन के ऑपरेशन का प्रशिक्षण लेकर आया था और पार्थ का केस उसका पहला केस था।
नशे की दवाएं बरामद
पुलिस ने मान अस्पताल से नशे की दवाएं भी बरामद की हैं। ये दवाएं उसी जगह से बरामद हुई हैं, जहां से पार्थ के ऑपरेशन संबंधी कागजात मिले हैं। हालांकि पुलिस या कोई अन्य फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं कर रहा है ये दवाएं प्रतिबंधित हैं या नहीं। इसका पता जांच के बाद ही चल पाएगा।
सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती
नागरिक अस्पताल में शनिवार सुबह ही पुलिस की ओर से भारी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई थी। अस्पताल में और जाम स्थल पर पांच डीएसपी सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे थे। डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार, डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर जोगिंद्र शर्मा, डीएसपी राजबीर सैनी, डीएसपी डिटेक्टिव अभिमन्यु लोहान और बरवाला डीएसपी रोहताश मौके पर मौजूद थे।
केस का जाच अधिकारी बदला
एसपी बलवान सिंह राणा ने इस मामले में जांच अधिकारी को बदल दिया है। इस मामले में पहले पीएलए चौकी के एसआई अजय को आईओ लगाया गया था। परिजनों ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर को भगाने में पुलिस का हाथ है। इसको गंभीरता से लेते हुए एसपी ने अब आईओ बदलकर जांच का जिम्मा एवीटी इंचार्ज एसआई संजय और गुजवि चौकी के एएसआई मनमोहन को सौंपा है।
एसपी सहित कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा
सुबह 11 बजे से लेकर शाम साढ़े 5 बजे तक परिजनों के रोष प्रदर्शन और जाम के बावजूद मौके पर न तो एसपी बलवान सिंह राणा पहुंचे और न ही प्रशासनिक अधिकारियों में से कोई पहुंचा। हालांकि नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे थे, लेकिन कोई बड़ा अधिकारी नहीं आया था।
विधायक सिहाग ने मिलाए फोन
मौके पर पहुंचे बरवाला से जजपा विधायक जोगीराम सिहाग ने परिजनों के समक्ष ही पहले मुख्यमंत्री के पास फोन मिलाया। उसके कुछ देर बाद उनके पास उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का फोन आया। विधायक ने इस मामले में डीसी से भी बात की और मामले में कार्रवाई के बारे में पूछा। डीसी ने कहा कि वे एसपी से बात करेंगी। इसके बाद विधायक ने सीएमओ से बात करके कहा कि परिजन शव का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ या रोहतक पीजीआई में करवाना चाहते हैं तो ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा। इस पर सीएमओ ने कहा कि परिजन जहां चाहते हैं, वहां पोस्टमार्टम करवा सकते हैं, उन्हें कोई एतराज नहीं है।
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शाम साढ़े 5 बजे नागरिक अस्पताल से पार्थ का शव लेने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। इससे पहले करीब साढ़े 6 घंटे तक परिजन बस स्टैंड के बाहर आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जाम लगाए रहे।
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गायब मिले कुछ दस्तावेज
बच्चे के दादा सुभाष ने आरोप लगाया कि पुलिस मोहित को लेकर मान अस्पताल गई थी। वहां पर पार्थ के ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेज डॉक्टर के कमरे या ऑपरेशन थियेटर में मिलने की बजाय अन्य कमरे में बेड पर मिले। उनमें से वह कागज भी गायब था, जिसमें मोहित के हस्ताक्षर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करके सबूत मिटाने का काम किया जा रहा है।
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पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी
पोस्टमार्टम करने वाले बोर्ड में डॉ. रिपनजीत कौर, डॉ. राजिंद्र, डॉ. हीना, डॉ. कर्मवीर और डॉ. नागेश शामिल थे। इस दौरान पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। उसके बाद विसरा को नायब तहसीलदार ललित कुमार की देखरेख में मधुबन लैब और अग्रोहा लैब में भिजवाया गया।
जाम के कारण नहीं चल सकीं बसें, सवारियां हुईं परेशान
बस स्टैंड के मुख्य गेट के बाहर परिजनों द्वारा जाम लगाने से बसों का संचालन भी रुक गया। न तो कोई बस बाहर से आ सकी और नहीं कोई बस बाहर जा सकी। इससे सवारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बसों का इंतजार कर रही सवारियां पैदल ही अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गईं।
डीवीआर में क्या दिखा
अस्पताल से पुलिस द्वारा बरामद की डीवीआर में ऑपरेशन के दौरान की फुटेज है। एएसपी उपासना ने बताया कि डीवीआर में ऑपरेशन के समय चार लोग ऑपरेशन थियेटर में दिखाई दे रहे हैं। इनमें से एक सर्जरी कर रहा है। एक एनेस्थीसिया दे रहा है और दो उनकी मदद के लिए खड़े हैं और ये सभी पुरुष हैं। सभी ने मास्क लगाए थे और ड्रेस भी एक जैसी थी, जिस कारण पहचान नहीं हो पाई है और जल्द ही इनकी पहचान कर ली जाएगी।
जिस डॉक्टर को बुलाया वह नहीं आया था
सूत्रों के अनुसार मान अस्पताल के डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए अंबाला से जिस डॉक्टर को बुलाया था, वह नहीं आया, लेकिन एक टीम जरूर आई थी। सूत्रों के अनुसार मान अस्पताल का चिकित्सक कुछ दिन पहले ही विदेश से भैंगेपन के ऑपरेशन का प्रशिक्षण लेकर आया था और पार्थ का केस उसका पहला केस था।
नशे की दवाएं बरामद
पुलिस ने मान अस्पताल से नशे की दवाएं भी बरामद की हैं। ये दवाएं उसी जगह से बरामद हुई हैं, जहां से पार्थ के ऑपरेशन संबंधी कागजात मिले हैं। हालांकि पुलिस या कोई अन्य फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं कर रहा है ये दवाएं प्रतिबंधित हैं या नहीं। इसका पता जांच के बाद ही चल पाएगा।
सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती
नागरिक अस्पताल में शनिवार सुबह ही पुलिस की ओर से भारी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई थी। अस्पताल में और जाम स्थल पर पांच डीएसपी सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे थे। डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार, डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर जोगिंद्र शर्मा, डीएसपी राजबीर सैनी, डीएसपी डिटेक्टिव अभिमन्यु लोहान और बरवाला डीएसपी रोहताश मौके पर मौजूद थे।
केस का जाच अधिकारी बदला
एसपी बलवान सिंह राणा ने इस मामले में जांच अधिकारी को बदल दिया है। इस मामले में पहले पीएलए चौकी के एसआई अजय को आईओ लगाया गया था। परिजनों ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर को भगाने में पुलिस का हाथ है। इसको गंभीरता से लेते हुए एसपी ने अब आईओ बदलकर जांच का जिम्मा एवीटी इंचार्ज एसआई संजय और गुजवि चौकी के एएसआई मनमोहन को सौंपा है।
एसपी सहित कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा
सुबह 11 बजे से लेकर शाम साढ़े 5 बजे तक परिजनों के रोष प्रदर्शन और जाम के बावजूद मौके पर न तो एसपी बलवान सिंह राणा पहुंचे और न ही प्रशासनिक अधिकारियों में से कोई पहुंचा। हालांकि नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे थे, लेकिन कोई बड़ा अधिकारी नहीं आया था।
विधायक सिहाग ने मिलाए फोन
मौके पर पहुंचे बरवाला से जजपा विधायक जोगीराम सिहाग ने परिजनों के समक्ष ही पहले मुख्यमंत्री के पास फोन मिलाया। उसके कुछ देर बाद उनके पास उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का फोन आया। विधायक ने इस मामले में डीसी से भी बात की और मामले में कार्रवाई के बारे में पूछा। डीसी ने कहा कि वे एसपी से बात करेंगी। इसके बाद विधायक ने सीएमओ से बात करके कहा कि परिजन शव का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ या रोहतक पीजीआई में करवाना चाहते हैं तो ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा। इस पर सीएमओ ने कहा कि परिजन जहां चाहते हैं, वहां पोस्टमार्टम करवा सकते हैं, उन्हें कोई एतराज नहीं है।

अस्पताल से बरामद हुईं नशे की दवाइयां।- फोटो : Hisar

बस स्टैंड के बाहर सड़क पर बैठ कर रोड जाम करते मृतक पार्थ के परिजन।- फोटो : Hisar

विलाप करतीं पार्थ की मम्मी और उसे सांत्वना देतीं परिजन। - फोटो : Hisar