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Hisar News: अब मोबाइल एप बताएगा पशुओं में मुंहखुर रोग से कितना हुआ नुकसान
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लुवास एफएमडी ई-लॉस कैलकुलेटर एप के साथ कुलपति डॉ. राजा शेखर वुंडरू सहित अन्य वैज्ञानिकगण।
हिसार। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), के कुलपति एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजा शेखर वुंडरू ने लुवास एफएमडी ई-लॉस कैलकुलेटर एप जारी किया है। यह एप पशुओं में मुंहखुर रोग (एफएमडी) के प्रकोप से होने वाले आर्थिक नुकसान की सटीक गणना करने में मदद करेगी, जिससे पशुपालकों, उद्यमियों और नीति निर्माताओं को हरियाणा एवं राष्ट्रीय स्तर पर इस रोग के नियंत्रण व उपाय करने में सहायता मिलेगी। कुलपति ने इस उपलब्धि पर पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग और लुवास वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।
नुकसान की मिलेगी सटीक जानकारी
पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एनके कक्कड़ ने लुवास एफएमडी ई-लॉस कैलकुलेटर के बारे में बताया कि यह एप्लीकेशन प्रभावित पशुओं जैसे कि मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी और सुअर के डेटा को उनके आयु समूह और लिंग के अनुसार आंकड़ों का विश्लेषण प्रदान करेगी, जिससे दूध उत्पादन में कमी, मृत्यु दर, उपचार लागत और कम भार वहन क्षमता जैसे प्रमुख मापदंडों में आर्थिक नुकसान की सटीक गणना संभव हो सकेगी।
मुंहखुर रोग है खतरनाक
हरियाणा के पशुपालन और डेयरी विभाग के महानिदेशक डॉ. एलसी रंगा ने बताया कि मुंहखुर रोग पशुओं में होने वाला एक खतरनाक रोग है। उचित टीकाकरण से इस रोग को नियंत्रित किया जा चुका है।
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देश में किया जा सकता है एप का इस्तेमाल
डॉ. स्वाति ने बताया कि इस एप का उपयोग पूरे देश में किया जा सकता है, क्योंकि आर्थिक नुकसान स्थान, पशुओं की नस्ल और उनके विशिष्ट उपयोग के आधार पर अलग-अलग होता है। यह नया विकसित एप पांच प्रजातियों में प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान का अनुमान लगा सकता है।
गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड कर सकेंगे एप
पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. गुलशन नारंग ने बताया कि यह अभिनव मोबाइल एप लुवास एफएमडी ई-लॉस कैलकुलेटर एप गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड कर सकेंगे। पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश ने बताया कि इस एप के लिए मुंहखुर रोग के बेसलाइन डेटा और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग-सॉफ्टवेयर के साथ इसके उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस का भी प्रयोग किया गया है।
इनकी रही अहम भूमिका
लुवास में अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल ने बताया कि एप के लिए पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग प्रमुख एवं पूर्व प्रोफेसर डॉ. एनके कक्कड़ के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने मिशन शुरू किया। उनके साथ वैज्ञानिक डॉ. एनके. कक्कड़, डॉ. स्वाति दहिया और डॉ. नीलम रानी मौजूद रहे। इस पर लुवास के कुलसचिव डॉ. एसएस ढाका ने भी बधाई दी।
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नुकसान की मिलेगी सटीक जानकारी
पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एनके कक्कड़ ने लुवास एफएमडी ई-लॉस कैलकुलेटर के बारे में बताया कि यह एप्लीकेशन प्रभावित पशुओं जैसे कि मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी और सुअर के डेटा को उनके आयु समूह और लिंग के अनुसार आंकड़ों का विश्लेषण प्रदान करेगी, जिससे दूध उत्पादन में कमी, मृत्यु दर, उपचार लागत और कम भार वहन क्षमता जैसे प्रमुख मापदंडों में आर्थिक नुकसान की सटीक गणना संभव हो सकेगी।
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मुंहखुर रोग है खतरनाक
हरियाणा के पशुपालन और डेयरी विभाग के महानिदेशक डॉ. एलसी रंगा ने बताया कि मुंहखुर रोग पशुओं में होने वाला एक खतरनाक रोग है। उचित टीकाकरण से इस रोग को नियंत्रित किया जा चुका है।
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देश में किया जा सकता है एप का इस्तेमाल
डॉ. स्वाति ने बताया कि इस एप का उपयोग पूरे देश में किया जा सकता है, क्योंकि आर्थिक नुकसान स्थान, पशुओं की नस्ल और उनके विशिष्ट उपयोग के आधार पर अलग-अलग होता है। यह नया विकसित एप पांच प्रजातियों में प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान का अनुमान लगा सकता है।
गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड कर सकेंगे एप
पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. गुलशन नारंग ने बताया कि यह अभिनव मोबाइल एप लुवास एफएमडी ई-लॉस कैलकुलेटर एप गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड कर सकेंगे। पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश ने बताया कि इस एप के लिए मुंहखुर रोग के बेसलाइन डेटा और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग-सॉफ्टवेयर के साथ इसके उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस का भी प्रयोग किया गया है।
इनकी रही अहम भूमिका
लुवास में अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल ने बताया कि एप के लिए पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी विभाग प्रमुख एवं पूर्व प्रोफेसर डॉ. एनके कक्कड़ के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने मिशन शुरू किया। उनके साथ वैज्ञानिक डॉ. एनके. कक्कड़, डॉ. स्वाति दहिया और डॉ. नीलम रानी मौजूद रहे। इस पर लुवास के कुलसचिव डॉ. एसएस ढाका ने भी बधाई दी।

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