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पहले दिन कोरोना का टीका लगवाने नहीं पहुंचा कोई बच्चा
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टीबी हॉस्पिटल में वैक्सीन लगवाती छात्रा पलक।
- फोटो : Hisar
हिसार। कोरोना के जड़ से खात्मे के लिए अब 12 से 14 साल के बच्चों को भी कोरोनारोधी वैक्सीन की डोज दी जानी शुरू हो गई है। जिले में अभियान के पहले दिन एक भी बच्चे को टीका नहीं लगा गया। टीबी अस्पताल में सुबह 9 से लेकर दोपहर बाद तीन बजे तक स्वास्थ्य विभाग के कर्मी बच्चों का इंतजार करते रहे। हालांकि 15 से 17 तक के किशोर टीका लगवाने आए। पहले दिन बच्चों के टीकाकरण के लिए न आने का कारण परीक्षा का दौर है। अभिभावक नहीं चाहते की परीक्षा के बीच वैक्सीन लगने से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़े। वह कोई खतरा नहीं उठाना चाहते।
12 से 14 साल के बच्चों को कोर्बेवैक्स वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके लिए जिले में 20 हजार डोज आई है। एक वॉयल में 20 बच्चों को डोज लगेगी। एक बार वॉयल खोलने के बाद अगर किसी को डोज नहीं लगाई तो चार घंटे में वॉयल एक्सपायर हो जाएगी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। अभी शुरुआत में बच्चे टीका लगवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। अगर, एक दिन में चार या पांच बच्चे टीका लगवाने के लिए आते हैं तो उनके लिए वॉयल नहीं खोली जाएगी।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टीकाकरण को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा है। साथ ही एमओ और एसएमओ के साथ बैठक की गई है। नागरिक अस्पताल के डॉ. तरुण ने बताया कि 12 से 14 साल तक के बच्चों को टीका लगवाने के लिए बुधवार को टीबी अस्पताल से शुरुआत की है। आदमपुर में भी यह सुविधा शुरू की जाएगी। पहले दिन होने और परीक्षाओं के कारण कोई बच्चा टीका लगवाने के लिए नहीं आया। बच्चों में टीकाकरण को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत की है। इसके अलावा एसएमओ और एमओ के साथ बैठक की गई है ताकि वे ग्रामीण स्तर पर लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक कर सकें। बच्चों को टीका लगवाने के लिए स्कूल संचालकों से भी बात की जाएगी कि वे अभिभावक बैठक में बच्चों को टीका लगवाने के लिए प्रोत्साहित करें।
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अभिभावक का साथ में होना जरूरी
डॉ. तरुण ने बताया कि 12 से 14 साल तक के बच्चों के टीकाकरण को लेकर अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा क्योंकि बिना जागरूकता से अभिभावक अपने बच्चों को लेकर नहीं आएंगे। टीकाकरण के दौरान अभिभावक का होना जरूरी है। आधार कार्ड भी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि जब बच्चा पैदा होता तो उस समय नवजात को तीन टीके लगते हैं जिसमें पोलियो, काला पीलिया और बीसीजी का टीका लगवाया जाता है। एक साल के अंदर 14 प्रकार की बीमारियों से बचने के लिए टीके लगाए जाते हैं। ये टीके चिकित्सक की सलाह से लगवा जाते हैं, उस समय कोई भी अभिभावक टीके लगवाने से मना नहीं करता। अब चिकित्सक ही कोरोनारोधी टीका लगाने की सलाह दे रहे हैं ऐसे में अभिभावकों को असमंजस की स्थिति को छोड़कर आगे आना चाहिए।
डॉ. तरुण ने बताया कि कोरोना टीका लगने के बाद हल्का बुखार हो सकता है, ठंड लग सकती है और सिर में दर्द भी हो सकता है। ऐसे में घबराए नहीं, जहां तक हो सके बच्चों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें। इसलिए टीका लगवाते समय अभिभावक का होना जरूरी है।
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12 से 14 साल के बच्चों को कोर्बेवैक्स वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके लिए जिले में 20 हजार डोज आई है। एक वॉयल में 20 बच्चों को डोज लगेगी। एक बार वॉयल खोलने के बाद अगर किसी को डोज नहीं लगाई तो चार घंटे में वॉयल एक्सपायर हो जाएगी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। अभी शुरुआत में बच्चे टीका लगवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। अगर, एक दिन में चार या पांच बच्चे टीका लगवाने के लिए आते हैं तो उनके लिए वॉयल नहीं खोली जाएगी।
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वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टीकाकरण को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा है। साथ ही एमओ और एसएमओ के साथ बैठक की गई है। नागरिक अस्पताल के डॉ. तरुण ने बताया कि 12 से 14 साल तक के बच्चों को टीका लगवाने के लिए बुधवार को टीबी अस्पताल से शुरुआत की है। आदमपुर में भी यह सुविधा शुरू की जाएगी। पहले दिन होने और परीक्षाओं के कारण कोई बच्चा टीका लगवाने के लिए नहीं आया। बच्चों में टीकाकरण को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत की है। इसके अलावा एसएमओ और एमओ के साथ बैठक की गई है ताकि वे ग्रामीण स्तर पर लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक कर सकें। बच्चों को टीका लगवाने के लिए स्कूल संचालकों से भी बात की जाएगी कि वे अभिभावक बैठक में बच्चों को टीका लगवाने के लिए प्रोत्साहित करें।
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अभिभावक का साथ में होना जरूरी
डॉ. तरुण ने बताया कि 12 से 14 साल तक के बच्चों के टीकाकरण को लेकर अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा क्योंकि बिना जागरूकता से अभिभावक अपने बच्चों को लेकर नहीं आएंगे। टीकाकरण के दौरान अभिभावक का होना जरूरी है। आधार कार्ड भी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि जब बच्चा पैदा होता तो उस समय नवजात को तीन टीके लगते हैं जिसमें पोलियो, काला पीलिया और बीसीजी का टीका लगवाया जाता है। एक साल के अंदर 14 प्रकार की बीमारियों से बचने के लिए टीके लगाए जाते हैं। ये टीके चिकित्सक की सलाह से लगवा जाते हैं, उस समय कोई भी अभिभावक टीके लगवाने से मना नहीं करता। अब चिकित्सक ही कोरोनारोधी टीका लगाने की सलाह दे रहे हैं ऐसे में अभिभावकों को असमंजस की स्थिति को छोड़कर आगे आना चाहिए।
डॉ. तरुण ने बताया कि कोरोना टीका लगने के बाद हल्का बुखार हो सकता है, ठंड लग सकती है और सिर में दर्द भी हो सकता है। ऐसे में घबराए नहीं, जहां तक हो सके बच्चों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें। इसलिए टीका लगवाते समय अभिभावक का होना जरूरी है।