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Hisar News: कैमरी रोड आरओबी का 5 घंटे का काम शेष पर बजरी प्लांट बने रोड़ा
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हिसार। शहर के कैमरी रोड रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के शुरू होने में अब बजरी के प्लांट रोड़ा बन गए हैं। प्लांट के बंद होने के कारण आरओबी पर सीसी स्लैब पर तारकोल की सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। हालांकि अधिकारी का कहना है कि अगर प्लांट शुरू हो जाए तो बचा हुआ काम सिर्फ 4 से 5 घंटे में ही पूरा कर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की तीसरी डेडलाइन भी खत्म हो चुकी है।
बता दें कि रेलवे के बीच वाले हिस्से में सीसी स्लैब बिछाने में एजेंसी को एक माह का समय लग गया। इसके बाद इसे सुखाने के लिए 28 दिन के लिए छोड़ दिया गया। यह अवधि पूरी हो चुकी है। अब इस सीसी स्लैब पर तारकोल की सड़क बनानी है। मगर सर्दी के मौसम के कारण शहर के आसपास स्थित बजरी के प्लांट बंद पड़े हैं। इस कारण एजेंसी सड़क निर्माण नहीं कर पा रही है।
अधूरे आरओबी पर ही दौड़ रहे वाहन
आरओबी का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है, लेकिन इस पर वाहन दौड़ रहे हैं। हालांकि आरओबी के एक तरफ अवरोधक भी लगाए हैं, लेकिन दुपहिया वाहन इन अवरोधक के बीच में से ही निकल रहे हैं। यही नहीं, अंधेरा होते ही आरओबी शराबियों का अड्डा बन जाता है। ये लोग न सिर्फ यहां शराब पीते हैं, बल्कि तोड़फोड़ भी कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों ने आरओबी के किनारे लगी प्लास्टिक शीट को तोड़ दिया है।
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तीन बार खत्म हो चुकी है डेडलाइन
इस प्रोजेक्ट पर फरवरी 2020 में काम शुरू हुआ था। निर्माण एजेंसी को अगस्त 2021 तक इसे पूरा करना था। मार्च 2020 के आखिर में लॉकडाउन लगने से काम रुक गया था। इसकी एवज में डेडलाइन चार माह बढ़ा दी गई थी। इसी बीच आरओबी की ड्राइंग व एस्टीमेट रिवाइज कर दिया। रेलवे फाटक पर आरओबी के साथ-साथ आरयूबी का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कारण से डेडलाइन दूसरी बार बढ़ाकर अगस्त 2022 कर दी गई थी। मगर एजेंसी अगस्त तक भी काम को पूरा नहीं कर सकी। उसकी तरफ से तीन माह की और डिमांड की गई। इस पर बीएंडआर ने डेडलाइन तीन माह और बढ़ाने की फाइल चला दी। तीसरी डेडलाइन 30 नवंबर को पूरी हो चुकी है। अब एजेंसी को चौथी बार डेडलाइन बढ़वानी होगी।
40 करोड़ रुपये आई लागत
इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 40 करोड़ रुपये है। हालांकि पहले यह 26 करोड़ रुपये में तैयार होना था, लेकिन इसकी ड्राइंग में बदलाव होने से इसकी लागत बढ़ गई। इस प्रोजेक्ट में आरओबी के बीच का हिस्सा बो स्टिंग आकार में बनाया गया है। इस डिजाइन से बनने वाला यह शहर का पहला आरओबी है। यह करीब 580 मीटर लंबा है। कैरिज वे की चौड़ाई 9.5 मीटर है, जिस पर वाहन चल सकेंगे। इसके अलावा एक तरफ डेढ़ मीटर का फुटपाथ बनाया गया है।
आरओबी व फोरलेन के आड़े आ रही 33 केवी की लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू
फोटो : 59
उधर आरओबी व कैमरी फोरलेन के निर्माण में आड़े आ रही 33 केवी लाइन की शिफ्टिंग का काम शुरू कर दिया है। हालांकि अभी 11 केवी लाइन को शिफ्ट किया जाना है। इसके अलावा बीच में एक पेड़ भी बाधा बना हुआ है।
अग्रोहा व लांधड़ी के पास बजरी के प्लांट हैं, जो बंद पड़े हैं। तापमान काफी बढ़ गया है। उम्मीद है कि जल्द ये प्लांट शुरू हो जाएंगे। इनके शुरू होते ही बची सड़क बना दी जाएगी। यह कुछ घंटों का काम है। - मेवा सिंह, एसडीओ, बीएंडआर
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बता दें कि रेलवे के बीच वाले हिस्से में सीसी स्लैब बिछाने में एजेंसी को एक माह का समय लग गया। इसके बाद इसे सुखाने के लिए 28 दिन के लिए छोड़ दिया गया। यह अवधि पूरी हो चुकी है। अब इस सीसी स्लैब पर तारकोल की सड़क बनानी है। मगर सर्दी के मौसम के कारण शहर के आसपास स्थित बजरी के प्लांट बंद पड़े हैं। इस कारण एजेंसी सड़क निर्माण नहीं कर पा रही है।
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अधूरे आरओबी पर ही दौड़ रहे वाहन
आरओबी का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है, लेकिन इस पर वाहन दौड़ रहे हैं। हालांकि आरओबी के एक तरफ अवरोधक भी लगाए हैं, लेकिन दुपहिया वाहन इन अवरोधक के बीच में से ही निकल रहे हैं। यही नहीं, अंधेरा होते ही आरओबी शराबियों का अड्डा बन जाता है। ये लोग न सिर्फ यहां शराब पीते हैं, बल्कि तोड़फोड़ भी कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों ने आरओबी के किनारे लगी प्लास्टिक शीट को तोड़ दिया है।
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तीन बार खत्म हो चुकी है डेडलाइन
इस प्रोजेक्ट पर फरवरी 2020 में काम शुरू हुआ था। निर्माण एजेंसी को अगस्त 2021 तक इसे पूरा करना था। मार्च 2020 के आखिर में लॉकडाउन लगने से काम रुक गया था। इसकी एवज में डेडलाइन चार माह बढ़ा दी गई थी। इसी बीच आरओबी की ड्राइंग व एस्टीमेट रिवाइज कर दिया। रेलवे फाटक पर आरओबी के साथ-साथ आरयूबी का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कारण से डेडलाइन दूसरी बार बढ़ाकर अगस्त 2022 कर दी गई थी। मगर एजेंसी अगस्त तक भी काम को पूरा नहीं कर सकी। उसकी तरफ से तीन माह की और डिमांड की गई। इस पर बीएंडआर ने डेडलाइन तीन माह और बढ़ाने की फाइल चला दी। तीसरी डेडलाइन 30 नवंबर को पूरी हो चुकी है। अब एजेंसी को चौथी बार डेडलाइन बढ़वानी होगी।
40 करोड़ रुपये आई लागत
इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 40 करोड़ रुपये है। हालांकि पहले यह 26 करोड़ रुपये में तैयार होना था, लेकिन इसकी ड्राइंग में बदलाव होने से इसकी लागत बढ़ गई। इस प्रोजेक्ट में आरओबी के बीच का हिस्सा बो स्टिंग आकार में बनाया गया है। इस डिजाइन से बनने वाला यह शहर का पहला आरओबी है। यह करीब 580 मीटर लंबा है। कैरिज वे की चौड़ाई 9.5 मीटर है, जिस पर वाहन चल सकेंगे। इसके अलावा एक तरफ डेढ़ मीटर का फुटपाथ बनाया गया है।
आरओबी व फोरलेन के आड़े आ रही 33 केवी की लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू
फोटो : 59
उधर आरओबी व कैमरी फोरलेन के निर्माण में आड़े आ रही 33 केवी लाइन की शिफ्टिंग का काम शुरू कर दिया है। हालांकि अभी 11 केवी लाइन को शिफ्ट किया जाना है। इसके अलावा बीच में एक पेड़ भी बाधा बना हुआ है।
अग्रोहा व लांधड़ी के पास बजरी के प्लांट हैं, जो बंद पड़े हैं। तापमान काफी बढ़ गया है। उम्मीद है कि जल्द ये प्लांट शुरू हो जाएंगे। इनके शुरू होते ही बची सड़क बना दी जाएगी। यह कुछ घंटों का काम है। - मेवा सिंह, एसडीओ, बीएंडआर