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नगर निगम ने बेसहारा पशु पकड़ने के लिए दो गाड़ियां किराये पर लेने के लिए किया टेंडर
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हिसार। नगर निगम प्रशासन ने शहर में घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए दो गाड़ियां किराये पर लेने के लिए टेंडर किया है। जल्द ही टेंडर खोला जाएगा। इस बार निगम ने छह माह की बजाय एक साल के लिए टेंडर लगाया है। उम्मीद है कि नए साल में शहर से बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू हो जाएगा।
बता दें कि नगर निगम की पशु पकड़ने वाली गाड़ी कंडम हो चुकी है। निगम ने एक गोशाला से गाड़ी उधार में ली थी। मगर गोशाला ने दिवाली से पहले वह गाड़ी भी वापस ले ली। इसके बाद से निगम के पास पशु पकड़ने के लिए कोई गाड़ी ही नहीं है।
पांच बार लगाए थे टेंडर, नहीं आई कोई एजेंसी
हालांकि इससे पहले निगम प्रशासन करीब पांच बार गाड़ियां किराये पर लेने के लिए टेंडर लगा चुका है। शुरू के एक-दो टेंडर में सिर्फ दो ही एजेंसियां आईं। मगर दोनों एजेंसियां ज्यादा पैसे की डिमांड कर रही थी, जिस कारण से उनकी गाड़ी किराये पर लेने की बात सिरे नहीं चढ़ सकी। निगम का तर्क है कि उस समय सिर्फ छह माह के लिए गाड़ी किराये पर लेने के टेंडर लगाए थे, जिस कारण से एजेंसियों ने ज्यादा रुचि नहीं ली। अब छह माह की बजाय एक साल के लिए गाड़ियां किराये पर ली जाएगी। उम्मीद है कि इस बार कई एजेंसियों आवेदन करेंगी।
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गाड़ी न होने से दो माह से बंद पड़ा अभियान
निगम के पास गाड़ी न होने से दो माह से शहर से लावारिस पशु पकड़ने का अभियान बंद पड़ा है। इस कारण से शहर में लावारिस पशुओं की संख्या एक बार फिर से बढ़ गई है। जगह-जगह पशुओं के झुंड लगे रहते हैं। इन दो माह में लावारिस पशुओं द्वारा लोगों पर हमला करने के मामले में हुए हैं।
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बता दें कि नगर निगम की पशु पकड़ने वाली गाड़ी कंडम हो चुकी है। निगम ने एक गोशाला से गाड़ी उधार में ली थी। मगर गोशाला ने दिवाली से पहले वह गाड़ी भी वापस ले ली। इसके बाद से निगम के पास पशु पकड़ने के लिए कोई गाड़ी ही नहीं है।
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पांच बार लगाए थे टेंडर, नहीं आई कोई एजेंसी
हालांकि इससे पहले निगम प्रशासन करीब पांच बार गाड़ियां किराये पर लेने के लिए टेंडर लगा चुका है। शुरू के एक-दो टेंडर में सिर्फ दो ही एजेंसियां आईं। मगर दोनों एजेंसियां ज्यादा पैसे की डिमांड कर रही थी, जिस कारण से उनकी गाड़ी किराये पर लेने की बात सिरे नहीं चढ़ सकी। निगम का तर्क है कि उस समय सिर्फ छह माह के लिए गाड़ी किराये पर लेने के टेंडर लगाए थे, जिस कारण से एजेंसियों ने ज्यादा रुचि नहीं ली। अब छह माह की बजाय एक साल के लिए गाड़ियां किराये पर ली जाएगी। उम्मीद है कि इस बार कई एजेंसियों आवेदन करेंगी।
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गाड़ी न होने से दो माह से बंद पड़ा अभियान
निगम के पास गाड़ी न होने से दो माह से शहर से लावारिस पशु पकड़ने का अभियान बंद पड़ा है। इस कारण से शहर में लावारिस पशुओं की संख्या एक बार फिर से बढ़ गई है। जगह-जगह पशुओं के झुंड लगे रहते हैं। इन दो माह में लावारिस पशुओं द्वारा लोगों पर हमला करने के मामले में हुए हैं।