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कोरोना ने भाई-बहन से छीन ली मां की भी छाया
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हिसार। काला पीलिया से पीड़ित पिता दस साल पहले दुनिया छोड़ कर चले गए। तब मां ने तीनों बच्चों को संभाला। बड़ी बेटी को शादी कर विदा कर दिया। छोटे दोनों बच्चों को पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहती थी, लेकिन अब कोरोना ने मां को भी छीन लिया। दोनों बच्चे आर्थिक तंगी से परेशान हैं।
गांव भकलाना निवासी राकेश अपनी पत्नी के साथ गांव में खेती करते थे। उनके तीन बच्चे हुए। किसी तरह से परिवार का गुजर बसर कर रहे थे। वर्ष 2011 में काला पीलिया होने पर राकेश दुनिया छोड़कर चले गए। उनकी पत्नी नान्हीं देवी ने किसी तरह से दो बेटियों तथा एक बेटे को संभाला। चार साल पहले नान्हीं देवी ने बड़ी बेटी पिंकी की शादी कर उसे विदा कर दिया। वह छोटी बेटी मीनू तथा बेटे जितेंद्र को उच्च शिक्षा देकर बड़ा अफसर बनाना चाहती थी। इसके लिए उसने दोनों बच्चों को एक निजी स्कूल में दाखिला दिलाया था। खुद खेतों में मजदूरी कर नान्हीं अपने बच्चों की फीस जमा कर रही थी। नान्हीं देवी को विधवा पेंशन भी मिलती थी, जिसे वह बच्चों की पढ़ाई व उनके कपड़ों पर ही खर्च करती थी।
मई का महीना इस परिवार के लिए मुसीबत बनकर आया। नान्हीं देवी को बुखार, खांसी, जुकाम होने पर गंभीर बीमार हो गई। कई दिन तक गांव में ही उपचार लेती रही। 24 मई को तबीयत अधिक बिगड़ने पर जब परिवार लोग जब उसे जींद लेकर जा रहे थे तब उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। अब घर में 16 वर्षीय मीनू तथा 14 वर्षीय जितेंद्र ही रह गए हैं। इन दोनों के दादा-दादी पहले ही स्वर्गवासी हो चुके हैं। मीनू 11वीं तथा जितेंद्र दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है। इन दोनों के पास कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है। गांव के लोगों ने बताया कि नान्हीं देवी को कोरोना संक्रमण जैसे लक्षण थे। जांच कराने से पहले ही उसकी मौत हो गई और अंतिम संस्कार कर दिया। नान्हीं देवी के दोनों बच्चों की आर्थिक हालत बेहद खराब है। मकान की हालत भी अच्छी नहीं है। स्कूल बंद होने के कारण अभी दोनों बच्चे घर में ही रहते हैं। मां को याद कर रोते रहते हैं।
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हमारे पास अधिसूचना नहीं आई है
केंद्र सरकार की योजना की अधिसूचना अभी हमारे पास नहीं आई है। बाल कल्याण परिषद की ओर से ऐसे बच्चों की जानकारी जुटाई जा रही है। पीड़ित परिवारों की जानकारी 1098 पर भी दी जा सकती है। अनाथ बच्चों को प्रदेश सरकार की योजनाओं के अनुसार फायदा दिया जाएगा।
- डॉ. प्रियंका सोनी, डीसी, हिसार
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गांव भकलाना निवासी राकेश अपनी पत्नी के साथ गांव में खेती करते थे। उनके तीन बच्चे हुए। किसी तरह से परिवार का गुजर बसर कर रहे थे। वर्ष 2011 में काला पीलिया होने पर राकेश दुनिया छोड़कर चले गए। उनकी पत्नी नान्हीं देवी ने किसी तरह से दो बेटियों तथा एक बेटे को संभाला। चार साल पहले नान्हीं देवी ने बड़ी बेटी पिंकी की शादी कर उसे विदा कर दिया। वह छोटी बेटी मीनू तथा बेटे जितेंद्र को उच्च शिक्षा देकर बड़ा अफसर बनाना चाहती थी। इसके लिए उसने दोनों बच्चों को एक निजी स्कूल में दाखिला दिलाया था। खुद खेतों में मजदूरी कर नान्हीं अपने बच्चों की फीस जमा कर रही थी। नान्हीं देवी को विधवा पेंशन भी मिलती थी, जिसे वह बच्चों की पढ़ाई व उनके कपड़ों पर ही खर्च करती थी।
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मई का महीना इस परिवार के लिए मुसीबत बनकर आया। नान्हीं देवी को बुखार, खांसी, जुकाम होने पर गंभीर बीमार हो गई। कई दिन तक गांव में ही उपचार लेती रही। 24 मई को तबीयत अधिक बिगड़ने पर जब परिवार लोग जब उसे जींद लेकर जा रहे थे तब उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। अब घर में 16 वर्षीय मीनू तथा 14 वर्षीय जितेंद्र ही रह गए हैं। इन दोनों के दादा-दादी पहले ही स्वर्गवासी हो चुके हैं। मीनू 11वीं तथा जितेंद्र दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है। इन दोनों के पास कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है। गांव के लोगों ने बताया कि नान्हीं देवी को कोरोना संक्रमण जैसे लक्षण थे। जांच कराने से पहले ही उसकी मौत हो गई और अंतिम संस्कार कर दिया। नान्हीं देवी के दोनों बच्चों की आर्थिक हालत बेहद खराब है। मकान की हालत भी अच्छी नहीं है। स्कूल बंद होने के कारण अभी दोनों बच्चे घर में ही रहते हैं। मां को याद कर रोते रहते हैं।
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हमारे पास अधिसूचना नहीं आई है
केंद्र सरकार की योजना की अधिसूचना अभी हमारे पास नहीं आई है। बाल कल्याण परिषद की ओर से ऐसे बच्चों की जानकारी जुटाई जा रही है। पीड़ित परिवारों की जानकारी 1098 पर भी दी जा सकती है। अनाथ बच्चों को प्रदेश सरकार की योजनाओं के अनुसार फायदा दिया जाएगा।
- डॉ. प्रियंका सोनी, डीसी, हिसार