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Hisar News: शहर में बंदरों को पकड़ने का काम शुरू, पहले दिन पकड़े 11 बंदर
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हांसी। बढ़ रही बंदरों की तादात और उनके हमलों को देखते हुए शहर में बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हो गया है। पहले दिन 11 बंदर पकड़े गए। बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से एक्सपर्ट आए हैं। जिन्हें एक वर्ष में शहर में 2500 बंदर पकड़ने का टेंडर दिया गया है।
बंदर पकड़ने के लिए टीम ने मुलतान कॉलोनी स्थित पार्क व फीका पीर चौक में पिंजरा लगाया गया है। बंदरों को पकड़ने के लिए तीन एक्सपर्ट आए हैं। बंदरों को पिंजरे में पकड़ कर अस्थायी रूप से सामुदायिक केंद्र में रखा जाएगा। इन बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ा जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने 925 रुपये प्रति बंदर की दर से टेंडर दिया है। शहर में 2500 बंदरों को पकड़ना होगा। बंदरों को पकड़ने, ले जाने व जंगल में छोड़ने का काम इसी फर्म का होगा। यह टीम बीते कई वर्षों से बंदरों को पकड़ने का काम कर रही है। इससे पहले टीम के सदस्य राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों में काम कर चुके हैं। अपने क्षेत्रों में बंदरों को पकड़वाने के लिए आमजन अपने वार्ड के पार्षद, चेयरमैन व परिषद के अधिकारियों को सूचना दे सकते हैं।
ऐसे पकड़ते है बंदर
बंदरों को पकड़ने के लिए क्षेत्र में किसी एक जगह पर पिंजरा लगाया जाता है। पिंजरे में केले, चने व बंदरों के खाने पीने के पसंदीदा सामान को रखा जाता है। इसमें एक गेट को खुला रखा जाता है जिससे दूर से रस्सी से पकड़ा जाता है। जैसे ही बंदर इसे खाने के लिए पिंजरे में जाता है तो कर्मचारी रस्सी को ढीला छोड़ कर गेट बंद कर देते हैं। उसके बाद बंदरों को छोटे पिंजरे में बंद करके उन्हें सामुदायिक केंद्र लाया जाता है। जहां उनके लिए खाने, पीन की व्यवस्था की जाती है।
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घायल हो रहे हैं लोग
बंदरों का आतंक शहर में बढ़ता जा रहा है। बंदर घरों में घुस भी सामान बिखेर रहे हैं व छोटे बच्चों, वृद्धों पर भी हमला कर रहे हैं। बीते वर्ष बंदरों ने दयाल सिंह कॉलोनी में एक घर में घुस कर महिला की कमर पर काट लिया था। बीते दिनों हिसार चुंगी के समीप भाजपा नेता पर भी हमला कर घायल कर दिया था।
आठ वर्ष बाद हो रहा है काम
शहर में बंदरों को पकड़ने का काम करीब आठ वर्ष के बाद हो रहा है। आठ वर्ष पहले चेयरपर्सन रीता शर्मा के कार्यकाल में पकड़े गए थे। तब बंदरों को यमुनानगर के कलेसर जंगलों में इन बंदरों को छोड़ा गया था। उस समय भी इसी फर्म ने बंदरों को पकड़ने का काम किया था।
जोखिम भरा काम है
बंदर को पकड़ने वाले एक्सपर्ट रईस खान ने बताया कि यह काम काफी जोखिम भरा है। कई बार बंदर हमला कर देते हैं। जिसमें वह कई बार घायल हो चुके हैं।
बंदरों पर निशानी लगाई जाए
पकड़े गए इन बंदरों पर निशानी के तौर पर रंग लगाया जाए। ताकि ठेकेदार कोई गडबड़ी न कर सके। इन बंदरों को भूखा न रखा जाए। जिस दिन बंदरों को पकड़ा जाए उसी शाम या अगले दिन इन्हें जंगल में छोड़ा जाए। उन पर कोई जुल्म न हो।- नितेश शर्मा, पार्षद व कांग्रेस नेता
भूखा नहीं रहने देंगे
बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हो गया है। बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ा जाएगा। पकड़ने के बाद इनके खाने की व्यवस्था की जाएगी। फिर जंगल में छुड़वाया जाएगा। - प्रवीन ऐलावादी, चेयरमैन, नगर परिषद
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बंदर पकड़ने के लिए टीम ने मुलतान कॉलोनी स्थित पार्क व फीका पीर चौक में पिंजरा लगाया गया है। बंदरों को पकड़ने के लिए तीन एक्सपर्ट आए हैं। बंदरों को पिंजरे में पकड़ कर अस्थायी रूप से सामुदायिक केंद्र में रखा जाएगा। इन बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ा जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने 925 रुपये प्रति बंदर की दर से टेंडर दिया है। शहर में 2500 बंदरों को पकड़ना होगा। बंदरों को पकड़ने, ले जाने व जंगल में छोड़ने का काम इसी फर्म का होगा। यह टीम बीते कई वर्षों से बंदरों को पकड़ने का काम कर रही है। इससे पहले टीम के सदस्य राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों में काम कर चुके हैं। अपने क्षेत्रों में बंदरों को पकड़वाने के लिए आमजन अपने वार्ड के पार्षद, चेयरमैन व परिषद के अधिकारियों को सूचना दे सकते हैं।
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ऐसे पकड़ते है बंदर
बंदरों को पकड़ने के लिए क्षेत्र में किसी एक जगह पर पिंजरा लगाया जाता है। पिंजरे में केले, चने व बंदरों के खाने पीने के पसंदीदा सामान को रखा जाता है। इसमें एक गेट को खुला रखा जाता है जिससे दूर से रस्सी से पकड़ा जाता है। जैसे ही बंदर इसे खाने के लिए पिंजरे में जाता है तो कर्मचारी रस्सी को ढीला छोड़ कर गेट बंद कर देते हैं। उसके बाद बंदरों को छोटे पिंजरे में बंद करके उन्हें सामुदायिक केंद्र लाया जाता है। जहां उनके लिए खाने, पीन की व्यवस्था की जाती है।
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घायल हो रहे हैं लोग
बंदरों का आतंक शहर में बढ़ता जा रहा है। बंदर घरों में घुस भी सामान बिखेर रहे हैं व छोटे बच्चों, वृद्धों पर भी हमला कर रहे हैं। बीते वर्ष बंदरों ने दयाल सिंह कॉलोनी में एक घर में घुस कर महिला की कमर पर काट लिया था। बीते दिनों हिसार चुंगी के समीप भाजपा नेता पर भी हमला कर घायल कर दिया था।
आठ वर्ष बाद हो रहा है काम
शहर में बंदरों को पकड़ने का काम करीब आठ वर्ष के बाद हो रहा है। आठ वर्ष पहले चेयरपर्सन रीता शर्मा के कार्यकाल में पकड़े गए थे। तब बंदरों को यमुनानगर के कलेसर जंगलों में इन बंदरों को छोड़ा गया था। उस समय भी इसी फर्म ने बंदरों को पकड़ने का काम किया था।
जोखिम भरा काम है
बंदर को पकड़ने वाले एक्सपर्ट रईस खान ने बताया कि यह काम काफी जोखिम भरा है। कई बार बंदर हमला कर देते हैं। जिसमें वह कई बार घायल हो चुके हैं।
बंदरों पर निशानी लगाई जाए
पकड़े गए इन बंदरों पर निशानी के तौर पर रंग लगाया जाए। ताकि ठेकेदार कोई गडबड़ी न कर सके। इन बंदरों को भूखा न रखा जाए। जिस दिन बंदरों को पकड़ा जाए उसी शाम या अगले दिन इन्हें जंगल में छोड़ा जाए। उन पर कोई जुल्म न हो।- नितेश शर्मा, पार्षद व कांग्रेस नेता
भूखा नहीं रहने देंगे
बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हो गया है। बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ा जाएगा। पकड़ने के बाद इनके खाने की व्यवस्था की जाएगी। फिर जंगल में छुड़वाया जाएगा। - प्रवीन ऐलावादी, चेयरमैन, नगर परिषद