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मिर्चपुर कांड : सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में मांगी स्टेटस रिपोर्ट
Updated Tue, 26 Aug 2014 11:55 PM IST
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मिर्चपुर कांड केस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पीड़ितों की ओर से जून 2010 में डाली गई पुनर्वास याचिका पर शीर्ष कोेर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पीड़ितों की मौजूदा ताजा स्थिति पर दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश कर जवाब मांगा है।
जस्टिस मुखोध्यापाय की कोर्ट में पीड़ितों की तरफ से सीनियर अधिवक्ता कोलिन गोसाल्विस और अधिवक्ता रजत कल्सन पेश हुए। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मिर्चपुर पीड़ितों की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा तो प्रदेश सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा कि वहां हालात सामान्य है। सरकार ने पीड़ितों को मकान दोबारा बनवाकर दिए हैं। गांव में उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस और सीआरपीएफ तैनात है।
इस पर याची वकीलों ने कड़ा विरोध जताया तो शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सरकार ऐसे हालातों बनाएं, जहां लोग स्वतंत्रता से रहते हुए अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सके। शीर्ष कोर्ट में बहस के दौरान पीड़ित पक्ष के वकीलों ने कोेर्ट को बताया कि इस पुनर्वास मामले में कोर्ट के आदेशों पर दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें हिसार के सेशन जज और मुंबई की टाटा इंस्टीट्यूट की शमीम मोदी शामिल थीं।
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इस दो सदस्यीय टीम ने तब मिर्चपुर गांव औश्र तंवर फार्म हाउस जहां विस्थापित दलित रह रहे हैं, का दौरा कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। उसे शीर्ष कोर्ट को सौंपा गया था। पीड़ित पक्ष के वकील ने उस रिपोेर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित दो सदस्यीय टीम पहले ही मिर्चपुर विस्थापितों को अलग बसाने की बात कही।
हरियाणा सरकार के वकील ने इस रिपोर्ट पर दलील दी कि शीर्ष कोर्ट ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिस पर शीर्ष कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उस रिपोर्ट को अभी तक खारिज नहीं किया गया है। अब इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह के बाद रखी गई है।
यह था मामला
21 अप्रैल 2010 को हिसार के मिर्चपुर गांव में एक अपाहिज लड़की और उसके वृद्ध बाप को जिंदा जला दिया गया था। कुत्ते के भौंकने से शुरू हुआ विवाद हरियाणा में दलितों और दबंगों के बीच सबसे बड़ी घटना बन गया। 14 जनवरी 2011 को मिर्चपुर के दलित गांव छोड़कर हिसार के तंवर फॉर्म हाउस पर आ गए।
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जस्टिस मुखोध्यापाय की कोर्ट में पीड़ितों की तरफ से सीनियर अधिवक्ता कोलिन गोसाल्विस और अधिवक्ता रजत कल्सन पेश हुए। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मिर्चपुर पीड़ितों की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा तो प्रदेश सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा कि वहां हालात सामान्य है। सरकार ने पीड़ितों को मकान दोबारा बनवाकर दिए हैं। गांव में उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस और सीआरपीएफ तैनात है।
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इस पर याची वकीलों ने कड़ा विरोध जताया तो शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सरकार ऐसे हालातों बनाएं, जहां लोग स्वतंत्रता से रहते हुए अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सके। शीर्ष कोर्ट में बहस के दौरान पीड़ित पक्ष के वकीलों ने कोेर्ट को बताया कि इस पुनर्वास मामले में कोर्ट के आदेशों पर दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें हिसार के सेशन जज और मुंबई की टाटा इंस्टीट्यूट की शमीम मोदी शामिल थीं।
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इस दो सदस्यीय टीम ने तब मिर्चपुर गांव औश्र तंवर फार्म हाउस जहां विस्थापित दलित रह रहे हैं, का दौरा कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। उसे शीर्ष कोर्ट को सौंपा गया था। पीड़ित पक्ष के वकील ने उस रिपोेर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित दो सदस्यीय टीम पहले ही मिर्चपुर विस्थापितों को अलग बसाने की बात कही।
हरियाणा सरकार के वकील ने इस रिपोर्ट पर दलील दी कि शीर्ष कोर्ट ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिस पर शीर्ष कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उस रिपोर्ट को अभी तक खारिज नहीं किया गया है। अब इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह के बाद रखी गई है।
यह था मामला
21 अप्रैल 2010 को हिसार के मिर्चपुर गांव में एक अपाहिज लड़की और उसके वृद्ध बाप को जिंदा जला दिया गया था। कुत्ते के भौंकने से शुरू हुआ विवाद हरियाणा में दलितों और दबंगों के बीच सबसे बड़ी घटना बन गया। 14 जनवरी 2011 को मिर्चपुर के दलित गांव छोड़कर हिसार के तंवर फॉर्म हाउस पर आ गए।