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मकानों पर चली जेसीबी, सड़क पर आए 122 परिवार
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Thu, 23 Jun 2016 12:04 AM IST
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मकानों पर चली जेसीबी
- फोटो : bureau
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प्रशासन ने बुधवार को भारी पुलिस बल के साथ मिलगेट रोड के 122 घरों पर जेसीबी चलाकर कब्जा हटवा लिया। अभियान की शुरुआत में कुछ आदमी और महिला विरोध जताते हुए जेसीबी के आगे लेट गए, जिनको पुलिस ने हिरासत में ले लिया और दूसरों को खदेड़ दिया। इसके बाद प्रशासन देर शाम तक जेसीबी चलवाकर अतिक्रमण हटाता रहा।
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हांसी के एसडीएम प्रदीप अहलावत और तहसीलदार अश्वनी गंभीर ने बुुधवार सुबह छह बजे भारी पुलिस बल के साथ मिलगेट के साथ लगती दुकानों पर जेसीबी चलवा दी। दुकानों से आगे जब जेसीबी मकानों को तोड़ने लगी तब वहां कुछ महिला और पुरुष विरोध जताते हुए जेसीबी के आगे लेट गए।
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तब पुलिस कर्मियों ने वहां बैठे लोगों को खदेड़कर आठ लोगों को हिरासत में ले लिया। एक बार आगे कैंची चौक के पास भी प्रशासन की कार्रवाई का विरोध हुआ। पुलिस ने लोगों को वहां से भी खदेड़ दिया। फिर प्रशासन का अभियान देर शाम तक जारी रहा।
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400 पुलिस कर्मी थे तैनात
प्रशासन के अतिक्रमण हटाओ अभियान में डीएसपी जयपाल सिंह के नेतृत्व में 400 जवान तैनात थे। इनमें हरियाणा पुलिस एकेडमी और जिला पुलिस के जवान शामिल थे। महिला पुलिस भी तैनात थी। इसके अलावा बीएंडआर, नगर निगम, राजस्व विभाग और बिजली निगम के करीब 60 कर्मचारी प्रशासनिक अमले में शामिल थे।
प्रशासन ने पांच टीमें बनाकर जेसीबी मशीनें देकर उन्हें पांच जोन बनाकर अतिक्रमण हटाने का काम सौंपा था। ये पांचों टीमें थोड़ा-थोड़ा गैप देकर एक साथ काम करती रही। कर्मचारी हर घर की नंबरिंग कर रहे थे।
अभियान के बीच मलबा ले जाते रहे लोग
प्रशासन के अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच लोग अपने ढहाए घरों से मलबा ले जाते रहे। हालांकि लगभग 90 प्रतिशत घरों से लोगों ने खुद सामान निकालकर किराये के घरों या अन्यत्र रख लिया था। जो लोग अभी भी वहां रह रहे थे, वे जरूरी सामान कहीं और रखकर रह रहे थे। कुछ लोग ऐसे थे, जिन्होंने पहले खुद मकान तोड़कर मलबा हटा लिया था। फिर भी लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें राहत मिल जाएगी।
ढूंढे नहीं मिल रहे किराए पर घर
बस्ती के कब्जा हटने की प्रक्रिया शुरू होने पर एक पखवाड़े से लोग विनोद नगर, शिवनगर, गवर्नमेंट कॉलोनी और साथ लगती कॉलोनियों में किराए पर घर ढूंढने लगे थे। अब भी काफी लोग ऐसे हैं, जिन्हें बेघर होने पर किराए पर घर नहीं मिले हैं। जो मकान देने को राजी हैं, वे किराया अनाप-शनाप मांगने लगे हैं। कुछ लोगों ने कहा कि अब क्षेत्र में एक कमरे के तीन हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं। जबकि पहले वहां कुछ क्षेत्रों में 1500 रुपये में कमरा किराए पर मिल जाता था।
डीसीएम कर्मी मलबा हटाने में कर रहे थे मदद
डीसीएम कर्मी अतिक्रमण हटाने पर सामान बाहर रखवा रहे थे। प्रशासन ने पहचान के लिए उनकी बाजू पर लाल रंग के बैज बंधवा रखे थे। ये कर्मी मलबा हटवाने में मदद कर रहे थे। इतना ही नहीं डीसीएम ने बस्ती के आस-पास कैंपर रखवा रखे थे। अतिक्रमण हटाने में लगे कर्मी प्यास लगने पर वहां पानी पी रहे थे।
प्रशासन ने हमारी एक न सुनी : चहल
कॉलोनी के प्रधान सुखदेव चहल ने बताया कि प्रशासन ने मिल प्रबंधन से मिलीभगत कर बस्ती वालों को बेघर किया है। हाईकोर्ट के फैसले में 13 कनाल 8 मरले जमीन से कब्जा हटाकर मिल को दिलाने की बात लिखी है। जबकि प्रशासन ने 35 कनाल से ज्यादा जमीन पर बने मकानों को जेसीबी से पुलिस बल के साथ दादागिरी से तुड़वा डाला।
हमने भी हाईकोर्ट में याचिका डाल रखी है, जिस पर 11 जुलाई को सुनवाई होनी है। चहल ने कहा कि उजड़े लोगों के पुनर्वास के लिए वे जल्द डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे। इसके अलावा उजड़े लोगों के साथ जल्द मीटिंग कर आगामी कदम उठाएंगे। पूर्व पार्षद शादीलाल यादव ने बताया कि प्रशासन मिल प्रबंधन की सुन रहा है, हमारी नहीं। प्रशासन को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।