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Hisar News: राम के आदर्शाें पर चलकर महात्मा गांधी ने दिलाई थी आजादी

Sat, 20 Jan 2024 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sat, 20 Jan 2024 01:49 AM IST
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Mahatma Gandhi brought independence by following the ideals of Ram.
मदन सिंह बिष्ट
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हिसार। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में जहां उत्सव का वातावरण है। वहीं, सर्वोदय भवन से जुड़े गांधीवादी लोग भी इस बात को लेकर गदगद हैं कि उनके संस्थान में राम और रामचरितमानस पर 30 से अधिक बार गोष्ठियां हो चुकी हैं। वे ये भी बताते हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी राम के बड़े भक्त थे। उनके आदर्शाें पर चलकर आजादी दिलाई थी। रघुपति राघव राजा राम...उनका प्रिय भजन था। यहां तक कि उनके जीवन के अंतिम शब्द थे - हे राम!
वर्ष 1969 में स्थापित सर्वोदय भवन में गांधी अध्ययन केंद्र संचालित है। सर्वोदय का अर्थ सबके भले से है। यहां 55 वर्ष से हर रविवार को किसी न किसी विषय पर साप्ताहिक गोष्ठी आयोजित की जा रही है। उल्लेखनीय है कि 1969 में यहां पहली गोष्ठी रामचरितमानस और दूसरी गोष्ठी राम की प्रभुता विषय पर हुई थी। पहली गोष्ठी में मुख्य वक्ता विजय चंद्र शास्त्री थे, जबकि दूसरी गोष्ठी में कुंदनलाल एडवोकेट वक्ता थे। तब से अब तक इस विषय पर 30 से अधिक बार राम पर चर्चा हो चुकी है। इसके अलावा यहां वेद, सनातन, गीता, धर्म, विवेकानंद, महात्मा बुद्ध, महावीर, इस्लाम, ईसा मसीह, सांप्रदायिकता, स्वास्थ्य, समाज समेत कई सम सामयिक मुद्दों पर चर्चा होती रहती है।
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सर्वोदय भवन के प्रबंधक धर्मवीर शर्मा का कहना है कि अपने समय में महात्मा गांधी बड़े रामभक्त थे। वह सत्य, अहिंसा, त्याग, मानवता और सभी की भावनाओं का सम्मान करते थे। उनका कहना है कि देश और युवाओं के हित में इस परिसर में भगवान राम के नाम पर कोई शोध संस्थान खुलने से यह खुशी कई गुना अधिक बढ़ सकती है, क्योंकि रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम... महात्मा गांधी का प्रिय भजन था।
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आचार्य विनोबा भावे की प्रेरणा से स्थापित हुआ था सर्वोदय भवन
सर्वोदय भवन में पुस्तकालय और वाचनालय भी संचालित किया जा रहा है। इसमें धर्म, संस्कृति संबंधी किताबों के साथ ही महात्मा गांधी के संपादन में निकले यंग इंडिया अखबार की प्रतिलिपि भी संग्रहित है। यहां पर भूदान आंदोलन के जनक संत आचार्य विनोबा भावे भी 1960 में तीन दिन के लिए ठहरे थे। उन्हीं की प्रेरणा से सर्वोदय भवन की स्थापना हुई थी।







राम कण-कण में व्याप्त हैं। राम-रावण संवाद द्वंद्व का प्रतीक है। इनमें से राम की जीत का आधार मानवता, नैतिकता और त्याग है। यही आदर्श महात्मा गांधी के पर्यायवाची शब्द बन चुके थे। इन्हीं आदर्शाें पर चलकर आजादी दिलाई थी। समाज के सर्वांगीण विकास की आदर्श स्थिति ही रामराज्य या सर्वोदय कहलाती है। इसके लिए सबको प्रयास करना चाहिए। - डॉ. महेंद्र सिंह, अध्यक्ष, इतिहास विभाग, दयानंद कॉलेज, हिसार।
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