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गैर सरकारी संगठनों के दायरे में ही घूम रहा साक्षरता मिशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 12:23 AM IST
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Literacy mission moving within the ambit of NGOs
हिसार। आज के दौर में साक्षरता मिशन केवल गैर सरकारी संगठनों, एनसीसी, एनएसएस सहित अन्य संगठनों तक ही सीमित रह गया है। सरकार इस मिशन से धीरे-धीरे मुंह फेरती जा रही है। कागजों में तो साक्षरता मिशन को रफ्तार दी जा रही है बल्कि धरातल पर साक्षरता मिशन को पिरोने का काम गैर सरकारी संगठन कर रहे हैं। मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित साक्षरता मिशन कार्यक्रम के तहत तीन सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल ने अपने विचार रखे।
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इस दौरान समग्र शिक्षा के सहायक परियोजना समन्यवक सुरेंद्र कैरो ने ड्रॉप आउट विद्यार्थियों का जिक्र कर उन्हें फिर से साक्षर करने के लिए उठाए कदमों के बारे में बताया। वहीं, नलवा के राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता अशोक वशिष्ठ ने गांव की चौपाल से शुरू किए साक्षरता मिशन की अलख के बारे में अहम जानकारियां साझा कीं। सदलपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के संस्कृत विषय के लेक्चरर डॉ. संदीप ने साक्षरता मिशन को लोगों की आस्था व विश्वास से जोड़ा।
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आज की शिक्षा नहीं दे पा रही रोजगार
आज के दौर में शिक्षा रोजगार नहीं दे पा रही है। साथ ही शिक्षा महंगी होती जा रही है, जोकि बच्चों को साक्षर करने में बड़ी रुकावट बन रही है। खास बात है कि नई शिक्षा नीति में सरकार ने कुछ बदलाव साक्षरता मिशन पर किया है, जिसमें साक्षरता मिशन को रोजगार से जोड़ा है, ताकि हस्तकला से जुड़े पाठ्यक्रमों को शामिल कर विद्यार्थियों को रोजगार दिए जा सकें।
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- अशोक वशिष्ठ, हिंदी प्रवक्ता, राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय, नलवा
पाठ्यक्रमों को कौशल से जोड़ रही सरकार
सरकार ने साक्षरता मिशन के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।अब पाठ्यक्रमों को कौशल से जोड़ा जा रहा है। जिले में तीन इक्यूबेशन सेंटर को स्कूल के अंदर खोला गया है, जिसमें ब्यूटी वेलनेस, पेशेंट केयर व कृषि से संबंधित प्रोजेक्ट को शुरू किया है, ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के अलावा विशेष हस्तकला से जुड़े विषयों को सीख सकें। सरकार ने 19 स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर भी खोले हैं।

- सुरेंद्र कैरो, सहायक परियोजना समन्यवक, समग्र शिक्षा
जिले में 16 हजार महिलाएं हुईं साक्षर
जिले में 16 हजार महिलाओं को साक्षर किया गया है। विशेष बात है कि इन महिलाओं की उम्र 60 से पार है। कहानियों व संगोष्ठी करवाकर महिलाओं को जोड़ा। पोता-पोती के जरिये उम्रदराज महिलाओं को पढ़ाया। लोगों से जुड़ाव के लिए इच वन टीच वन नाम से संस्था बनाई, जिसमें शिक्षक प्यारेलाल ने साक्षरता मिशन की अलख जगाकर 16 हजार महिलाओं को साक्षर किया।
- डॉ. संदीप, संस्कृत लेक्चर, राजकीय स्कूल, सदलपुर
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