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Hisar News: रुपयों के लेनदेन के विवाद में मजदूर की हत्या के दोषी को उम्रकैद, 1 लाख रुपये का लगाया जुर्माना
Tue, 27 Oct 2026 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:46 PM IST
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हिसार। मजदूरी के पैसों के विवाद में मजदूर ईश्वर की हत्या के मामले में हिसार की सेशन कोर्ट ने गांव उमरा निवासी रामनिवास (55) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सेशन जज अलका मलिक की अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर उसे एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार वारदात 30 और 31 मई 2023 की रात उमरा गांव की ढाणी में हुई थी। ईश्वर मजदूरी करता था और रामनिवास के साथ भी काम करता था। दोनों में मजदूरी के पैसों को लेकर विवाद हुआ था। अदालत में पेश साक्ष्यों के मुताबिक ईश्वर परलाठी से कई वार किए गए। उसके गले में दुपट्टा और पैरों में कपड़ा बांधा गया। अगले दिन उसका शव रामनिवास की ढाणी के कमरे में चारपाई पर मिला। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में ईश्वर के शरीर पर 9 चोटें और गले पर निशान मिले।
दूसरे गांव में होने की दलील नहीं मानी
रामनिवास ने घटना के समय दूसरे गांव में होने की दलील दी थी लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष का यह तर्क स्वीकार नहीं किया। अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी को दोष साबित करने के लिए पर्याप्त माना और 16 अक्तूबर को उसे हत्या का दोषी ठहराया।
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सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि विवाद अचानक हुआ था और हत्या की पूर्व योजना साबित नहीं हुई। इसलिए मामला दुर्लभतम में दुर्लभतम श्रेणी का नहीं माना गया। अदालत ने जुर्माने की 90 प्रतिशत राशि मृतक के परिजनों को देने और मुआवजे के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हिसार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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अदालत में चले अभियोग के अनुसार वारदात 30 और 31 मई 2023 की रात उमरा गांव की ढाणी में हुई थी। ईश्वर मजदूरी करता था और रामनिवास के साथ भी काम करता था। दोनों में मजदूरी के पैसों को लेकर विवाद हुआ था। अदालत में पेश साक्ष्यों के मुताबिक ईश्वर परलाठी से कई वार किए गए। उसके गले में दुपट्टा और पैरों में कपड़ा बांधा गया। अगले दिन उसका शव रामनिवास की ढाणी के कमरे में चारपाई पर मिला। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में ईश्वर के शरीर पर 9 चोटें और गले पर निशान मिले।
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दूसरे गांव में होने की दलील नहीं मानी
रामनिवास ने घटना के समय दूसरे गांव में होने की दलील दी थी लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष का यह तर्क स्वीकार नहीं किया। अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी को दोष साबित करने के लिए पर्याप्त माना और 16 अक्तूबर को उसे हत्या का दोषी ठहराया।
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सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि विवाद अचानक हुआ था और हत्या की पूर्व योजना साबित नहीं हुई। इसलिए मामला दुर्लभतम में दुर्लभतम श्रेणी का नहीं माना गया। अदालत ने जुर्माने की 90 प्रतिशत राशि मृतक के परिजनों को देने और मुआवजे के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हिसार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।