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Hisar News: लालपरी...जो हुआ इसका शिकार समझो जीवन बेकार
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हांसी मेम के बाग में बनी झाड़ियों में पड़े पुड़िया के कवर।
हांसी। क्षेत्र में लालपरी का नशा युवाओं को अपने चंगुल में लेता जा रहा है। पुलिस की नशा मुक्ति टीम ने पुरानी कचहरी के खंडहर भवनों व झाड़ियों में नशा करने वाले छह लोगों को पकड़ा और उपचार के लिए नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे। इन्होंने बताया कि लालपरी नशे का सेवन करते हैं, जो स्मैक की तरह होती है। इसकी एक पुड़िया 200 रुपये में मिलती है।
पकड़े गए लोगों में से दो-तीन बीते ढाई वर्ष से लालपरी का सेवन कर रहे हैं। ये लोग नशा छोड़ने व इसके दुष्प्रभावों के बारे में भी जानते हैं। एक व्यक्ति नशा छोड़ने के लिए दो बार उपचार भी करवा चुका है, लेकिन फिर से करने लगा। नागरिक अस्पताल में नशा मुक्ति टीम के इंचार्ज एसआई रामफल व जिला टीबी ऑफिसर डॉ. संजय वर्मा ने पकड़े गए लोगों की काउंसिलिंग की व नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
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दोस्तों से लगी लगी लत, अब नहीं छूट रही
मैं करीब 5 महीने से लालपरी नशे का सेवन कर रहा हूं। दोस्तों की वजह से इसकी मुझे भी लत लग गई। दो बार इलाज भी करवा चुका हूं, लेकिन लत नहीं छूट रही। ऑटो रिक्शा चलाने का काम करता हूं। प्रतिदिन नशे का सेवन करता हूं। मेरी 4 बेटियां हैं, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। - सुलतान, सिसाय, 47 वर्षीय
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मुझे नशे का सेवन करते हुए दो साल हो गए। जहां काम करता था वहां एक साथी नशे का सेवन करता था। उससे मुझे भी आदत पड़ गई। करीब छह महीने पहले उसने आत्महत्या कर ली। सजावट व डीजे के काम करने वालों के पास मजदूरी का काम करता हूं। 200 रुपये की पुड़िया मिल जाती है। जब भी जेब में पैसे आते हैं पुड़िया खरीदकर सेवन कर लेता हूं। -
भोला, 24 वर्षीय, बोगाराम कॉलोनी
एक साल से नशा कर रहा हूं। ढाणी राजू रोड पर नहर पार कर नशा मिलता है। जब पैसे होते हैं तो पुड़िया लेकर नशा कर लेता हूं। दिहाड़ी मजदूर हूं। किसी भी तरह का काम कर लेता हूं। पहले जहां काम करता था, वहां एक लड़के ने नशा करना सिखाया था। अब आदत नहीं छूट रही। - उमेश, 21 वर्षीय, इंद्रा कॉलोनी
पुरानी कचहरी के खंडहर भवन व झाड़ियों में लोग नशे का सेवन करते हैं। इसलिए इन जगहों पर छापा मारकर नशे का सेवन करने वालों को पकड़ते हैं व उनका उपचार करवाते हैं। इनकी काउंसिलिंग भी करते हैं। नशे का सेवन करने वालों को समझाते हैं कि घर वालों के लिए बोझ न बनें। बल्कि घर संभालने वाले बनें। - एसआई रामफल, इंचार्ज, नशा मुक्ति टीम
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पकड़े गए लोगों में से दो-तीन बीते ढाई वर्ष से लालपरी का सेवन कर रहे हैं। ये लोग नशा छोड़ने व इसके दुष्प्रभावों के बारे में भी जानते हैं। एक व्यक्ति नशा छोड़ने के लिए दो बार उपचार भी करवा चुका है, लेकिन फिर से करने लगा। नागरिक अस्पताल में नशा मुक्ति टीम के इंचार्ज एसआई रामफल व जिला टीबी ऑफिसर डॉ. संजय वर्मा ने पकड़े गए लोगों की काउंसिलिंग की व नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
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दोस्तों से लगी लगी लत, अब नहीं छूट रही
मैं करीब 5 महीने से लालपरी नशे का सेवन कर रहा हूं। दोस्तों की वजह से इसकी मुझे भी लत लग गई। दो बार इलाज भी करवा चुका हूं, लेकिन लत नहीं छूट रही। ऑटो रिक्शा चलाने का काम करता हूं। प्रतिदिन नशे का सेवन करता हूं। मेरी 4 बेटियां हैं, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। - सुलतान, सिसाय, 47 वर्षीय
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मुझे नशे का सेवन करते हुए दो साल हो गए। जहां काम करता था वहां एक साथी नशे का सेवन करता था। उससे मुझे भी आदत पड़ गई। करीब छह महीने पहले उसने आत्महत्या कर ली। सजावट व डीजे के काम करने वालों के पास मजदूरी का काम करता हूं। 200 रुपये की पुड़िया मिल जाती है। जब भी जेब में पैसे आते हैं पुड़िया खरीदकर सेवन कर लेता हूं। -
भोला, 24 वर्षीय, बोगाराम कॉलोनी
एक साल से नशा कर रहा हूं। ढाणी राजू रोड पर नहर पार कर नशा मिलता है। जब पैसे होते हैं तो पुड़िया लेकर नशा कर लेता हूं। दिहाड़ी मजदूर हूं। किसी भी तरह का काम कर लेता हूं। पहले जहां काम करता था, वहां एक लड़के ने नशा करना सिखाया था। अब आदत नहीं छूट रही। - उमेश, 21 वर्षीय, इंद्रा कॉलोनी
पुरानी कचहरी के खंडहर भवन व झाड़ियों में लोग नशे का सेवन करते हैं। इसलिए इन जगहों पर छापा मारकर नशे का सेवन करने वालों को पकड़ते हैं व उनका उपचार करवाते हैं। इनकी काउंसिलिंग भी करते हैं। नशे का सेवन करने वालों को समझाते हैं कि घर वालों के लिए बोझ न बनें। बल्कि घर संभालने वाले बनें। - एसआई रामफल, इंचार्ज, नशा मुक्ति टीम