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विवाह बंधन: कबड्डी खिलाड़ी दीपक हुड्डा संग 7 जुलाई को सात फेरे लेगी बॉक्सर स्वीटी बूरा

Wed, 29 Jun 2022 01:23 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 29 Jun 2022 01:23 AM IST
सार

स्वीटी बूरा ने बताया कि शादी के बाद जिम्मेदारी बढ़ जाएगी, लेकिन वह अपना गेम नहीं छोड़ेगी। अभी की तरह बाद में भी वह अपना गेम जारी रखेगी।

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Kabaddi player Deepak Hooda and boxer Sweety Bura will get married
दीपक हुड्डा और स्वीटी बूरा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंच का दम दिखा चुकी हरियाणा के हिसार के सेक्टर-4 की रहने वाली बॉक्सर स्वीटी बूरा 7 जुलाई को शादी के बंधन में बंधेगी। स्वीटी की शादी भारतीय कबड्डी टीम के स्टार खिलाड़ी रोहतक के दीपक हुड्डा के साथ होगी। दीपक भारतीय कबड्डी टीम के कप्तान हैं। वहीं शादी को लेकर परिवार में तैयारियां शुरू हो चुकी है। 
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उल्लेखनीय है कि स्वीटी बूरा अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुकी है। बॉक्सर स्वीटी बूरा ने बताया कि अभी तक चीन में सितंबर माह में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी कर रही थी, लेकिन कोरोना के कारण गेम्स पोस्टपोन हो गए।
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बूरा ने बताया कि शादी के बाद जिम्मेदारी बढ़ जाएगी, लेकिन वह अपना गेम नहीं छोड़ेगी। अभी की तरह बाद में भी वह अपना गेम जारी रखेगी। स्वीटी ने बताया कि वह अभी तक दिल्ली इंडिया कैंप में थी, मगर शादी के लिए उन्होंने छुट्टी ली हुई है।
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दीपक हुड्डा ने संघर्ष से पाया मुकाम
दीपक हुड्डा ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बताया था कि जब वह चार साल के थे तो मां का निधन हो गया। पिता मामूली किसान थे, दिनभर खेतों में मेहनत मजदूरी कर जैसे-तैसे परिवार का पेट पालते थे। परिवार में पिता के अलावा एक शादीशुदा बहन अपने दो बच्चों के साथ रहती थी। जैसे तैसे जिंदगी चल ही रही थी कि 12वीं कक्षा में सिर से पिता का साया उठ गया। जिससे घर में कमाने वाला कोई नहीं रहा। बहन के बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ी और अच्छी नौकरी के लिए कबड्डी खेलना शुरू किया।


नौकरी के लिए दिन-रात अभ्यास और संघर्ष से उनका जुनून देश के लिए खेलने में बदल गया और उनकी जिद ने इस मुकाम तक पहुंचाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को पांच गोल्ड और एक ब्रांज मेडल दिलाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने बताया कि उनकी कामयाबी में सबसे पहले गुरु कोच जगमाल सिंह और इसके बाद कोच बलवान सिंह, कोच असन कुमार और जयबीर शर्मा का सहयोग रहा है। 
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