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जीजेयू में स्थित मुगलकालीन मकबरे और गुबंद का करवाया जाएगा रेनोवेशन
hisar
Updated Tue, 29 Apr 2014 12:02 AM IST
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सदियों पुरानी अपनी ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी भी आगे आ गई है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि परिसर में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए रेनोवेशन अभियान चलाया जाएगा।
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जीजेयू में मुगलकाल के कई मकबरे और गुंबद बने हुए हैं, जो ऐतिहासिक नजरिये से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसीलिए गुजवि के कुलपति डॉ. एमएल रंगा ने इन्हीं धरोहरों को बचाने के लिए पहल की है और विशेष रूप से राजस्थान से कारीगरों को बुलाकर इन मकबरों और गुंबदों की रेनोवेशन करवाने जा रहे हैं।
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हिसार के इतिहास की कई निशानियां जीजेयू परिसर में जिंदा है और विश्वविद्यालय प्रशासन इनको जिंदा रखने की कवायद में लगा हुआ है। जीजेयू में तीन मुगलकाल और तुगलककाल के मकबरे और गुंबद हैं। हिसार का इतिहास बताता है कि 17वीं शताब्दी में इनका निर्माण अलग-अलग वक्त में किया गया।
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तुगलककाल का मकबरा : यह मकबरा जीजेयू में सबसे बड़ा मकबरा है, जिसको पूरी तरह से गुंबद से ढका गया है। इसकी खास बात यह है कि इसके दक्षिण की तरफ दो शिलालेख हैं। शिलालेख नक्शी लिपि में दीवारों में लगे पत्थरों पर अंकित हैं।
एक शिलालेख में चार पंक्तियों में फारसी में लिखा गया है कि यह मकबरा और बाग 975/1567 -8 में अबा याजीद के आदेश पर बनाए गए थे। दूसरे शिलालेख नक्शी लिपि में दक्षिण प्रवेश की चौखट पर है। शिलालेख की लिखावट नींव के पत्थरों की लिखावट से भिन्न है और तुगलक काल की प्रतीत होती है।
मुगलकाल के मकबरे : गुजवि में स्थित चार मकबरों के समूह में से यह एक है जो कि महल के पूर्व में स्थित है। यह वर्गाकार मंडल का है और एक भारी चबूतरे के मध्य में स्थित है। इस मकबरे में केवल एक प्रवेश द्वार है और मकबरे के बाहरी भागों में आलों का खाका तैयार किया गया है। ईंटों से वर्गाकार आले बनाए गए हैं।
मकबरे की ऊपरी बनावट और पंजियों के टूटे हुए आले हैं। इस तरह की मकबरों पर नक्काशी केवल मुगलकाल में ही देखने को मिलती है। तीसरा मकबरा एक छोटी सी इमारत है, परंतु यह चबूतरे के मध्य में स्थित है। यह उपरोक्त दोनों इमारतों के साथ ही बना हुआ है। इसमें चार द्वार है। यह भी मुगलकाल का ही बना हुआ है।
महम और हांसी की ऐतिहासिक ईंटें होंगी इस्तेमाल
मकबरों और गुंबद को नवीन रूप देने के लिए महम और हांसी में खुदाई के दौरान मिलने वाली ईंटों का प्रयोग किया जाएगा। इर्न्हीं इंटों का पाउडर और चूने को मिलाकर तैयार किए गए मिश्रण को काम में लाया जाएगा। इनके पुराने रूप या दीवारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचे इसका ध्यान रखा जाएगा।
गुजवि में बने मकबरे और गुंबद हमारा इतिहास है और इन्हें पहले जैसा बनाना हमारा फर्ज बनता है। इतिहास सुरक्षित नहीं रखेंगे तो हम अपने कल को सुरक्षित कैसे रखेंगे। इसलिए विशेष रूप से एक्सपर्ट कारीगरों को बुलाकर इन गुंबदों और मकबरों को रेनोवेट किया जाएगा।
- डॉ. एमएल रंगा, कुलपति, जीजेयू
मकबरों और गुंबदों की रेनोवेशन के लिए राजस्थान के कारीगरों को बुलाया जाएगा। जो लंबे समय से ऐतिहासिक धरोहरों को पहले जैसा रूप देते आए हैं। उनके साथ गुजवि के इंजीनियर भी इस काम में मद्द करेंगे। साथ ही इन मकबरों और गुंबदों के आसपास की जगह में पार्क का निर्माण भी किया जाएगा।
- अशोक अहलावत, सिविल इंजीनियर, जीजेयू