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जीवन कुंडू हत्याकांड : अवैध हिरासत का आरोप, सीआईए थाने की 9 मिनट की सीसीटीवी फुटेज गायब
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हिसार। बहुचर्चित जीवन कुंडू हत्याकांड में महिला प्रोमिला को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के मामले में हिसार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अभिषेक गर्ग की अदालत ने फुटेज के रखरखाव में अनियमितताओं और पुलिस के विरोधाभासी बयानों पर कड़ी टिप्पणी की है।
अदालत ने मामले की स्वतंत्र जांच हिसार मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट को सौंपने के आदेश दिए हैं। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने फिलहाल अवैध हिरासत के सीधे आरोप को पुख्ता नहीं माना और मुख्य अर्जी का निस्तारण कर दिया।
महिला के अधिवक्ता के अनुसार अदालत ने पाया कि 4 अगस्त 2026 को शाम 6:20 से 6:29 बजे के बीच सीआईए हिसार के कैमरे की रिकॉर्डिंग में करीब नौ मिनट का व्यवधान था। इसके बाद पुलिस की आधिकारिक गाड़ी वहां नजर नहीं आई। छठे कैमरे की कार्यप्रणाली पर पुलिस ने पहले कैमरा खराब होने और बाद में रिकॉर्डिंग संरक्षित न होने के अलग-अलग बयान दिए।
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अदालत ने कहा कि आदेश के बावजूद समय पर सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित नहीं रखना गंभीर लापरवाही है। डेटा करप्शन की जानकारी 3 अक्तूबर को मिलने के बावजूद अदालत को तुरंत सूचित नहीं किया गया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह के तहत उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं।
अब मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट कैमरों की कवरेज, रिकॉर्डिंग में व्यवधान, डेटा करप्शन के दावों और संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच करेंगे। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दो महिलाओं को 24 घंटे में पेश न करने का आरोप
मामले के अनुसार 4 अगस्त को सूर्यनगर निवासी जीवन कुंडू की 10-12 लोगों ने मारपीट कर हत्या कर दी थी। एचटीएम थाने में हत्या का केस दर्ज हुआ। इसके बाद आरोपी रमेश शर्मा, सौरभ उर्फ मोल्ड और विशाल उर्फ बाबा भाग गए थे। रमेश शर्मा की पत्नी प्रोमिला ने अदालत में बयान दिया कि पुलिस ने उसे और उसकी सास इंद्रा देवी को 4 अगस्त को दोपहर एक बजे घर से गिरफ्तार किया लेकिन 24 घंटे में अदालत में पेश नहीं किया। उन्हें 6 अगस्त को शाम 4:20 बजे अदालत में पेश किया गया।
प्रोमिला के अनुसार इस दौरान दोनों को एचटीएम और सीआईए-1 थाने में रखा गया। 5 अगस्त को उसे सीआईए थाने से सामान्य अस्पताल ले जाने के बाद महिला थाने में बंद कर दिया गया।
पुलिस ने सुरक्षा के लिए हिरासत में लेने की बात कही
पुलिस ने अदालत में पक्ष रखा कि प्रोमिला और उसकी सास को भीड़ के गुस्से तथा जान के खतरे से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर लाया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि इस संबंध में थाने के रोजनामचे में कोई प्रविष्टि दर्ज नहीं थी, जिससे पुलिस के दावे पर सवाल उठे।
अदालत ने मामले की स्वतंत्र जांच हिसार मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट को सौंपने के आदेश दिए हैं। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने फिलहाल अवैध हिरासत के सीधे आरोप को पुख्ता नहीं माना और मुख्य अर्जी का निस्तारण कर दिया।
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महिला के अधिवक्ता के अनुसार अदालत ने पाया कि 4 अगस्त 2026 को शाम 6:20 से 6:29 बजे के बीच सीआईए हिसार के कैमरे की रिकॉर्डिंग में करीब नौ मिनट का व्यवधान था। इसके बाद पुलिस की आधिकारिक गाड़ी वहां नजर नहीं आई। छठे कैमरे की कार्यप्रणाली पर पुलिस ने पहले कैमरा खराब होने और बाद में रिकॉर्डिंग संरक्षित न होने के अलग-अलग बयान दिए।
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अदालत ने कहा कि आदेश के बावजूद समय पर सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित नहीं रखना गंभीर लापरवाही है। डेटा करप्शन की जानकारी 3 अक्तूबर को मिलने के बावजूद अदालत को तुरंत सूचित नहीं किया गया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह के तहत उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं।
अब मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट कैमरों की कवरेज, रिकॉर्डिंग में व्यवधान, डेटा करप्शन के दावों और संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच करेंगे। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दो महिलाओं को 24 घंटे में पेश न करने का आरोप
मामले के अनुसार 4 अगस्त को सूर्यनगर निवासी जीवन कुंडू की 10-12 लोगों ने मारपीट कर हत्या कर दी थी। एचटीएम थाने में हत्या का केस दर्ज हुआ। इसके बाद आरोपी रमेश शर्मा, सौरभ उर्फ मोल्ड और विशाल उर्फ बाबा भाग गए थे। रमेश शर्मा की पत्नी प्रोमिला ने अदालत में बयान दिया कि पुलिस ने उसे और उसकी सास इंद्रा देवी को 4 अगस्त को दोपहर एक बजे घर से गिरफ्तार किया लेकिन 24 घंटे में अदालत में पेश नहीं किया। उन्हें 6 अगस्त को शाम 4:20 बजे अदालत में पेश किया गया।
प्रोमिला के अनुसार इस दौरान दोनों को एचटीएम और सीआईए-1 थाने में रखा गया। 5 अगस्त को उसे सीआईए थाने से सामान्य अस्पताल ले जाने के बाद महिला थाने में बंद कर दिया गया।
पुलिस ने सुरक्षा के लिए हिरासत में लेने की बात कही
पुलिस ने अदालत में पक्ष रखा कि प्रोमिला और उसकी सास को भीड़ के गुस्से तथा जान के खतरे से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर लाया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि इस संबंध में थाने के रोजनामचे में कोई प्रविष्टि दर्ज नहीं थी, जिससे पुलिस के दावे पर सवाल उठे।