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मय्यड़-रामायण की जमीन से फिर फूटेगी आंदोलन की चिंगारी

Fri, 15 Jan 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो Updated Fri, 15 Jan 2016 11:44 PM IST
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Jaat movement will start from Mayyad-Ramayana

जाट आरक्षण के लिए एक बार फिर से मय्यड़ को चुना गया है। इस बार फरवरी से शुरू किए जाने वाले आंदोलन के लिए जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने मय्यड़ के साथ रामायण का नाम भी जोड़ा है। मय्यड़ रामायण रेलवे ट्रैक के पास रैली करने के बाद यहां धरना शुरू होगा।

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जाट आरक्षण के लिए हिसार के मय्यड़ रेलवे ट्रैक से शुरू हुआ आंदोलन सिरे चढ़ा था। इस आंदोलन के बूते जाट समाज को प्रदेश में आरक्षण हासिल हुआ। बाद में केंद्र सरकार ने भी जाटों को ओबीसी में शामिल कर आरक्षण दिया।
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पांच साल पहले हुआ था
करीब पांच साल पहले जाट आरक्षण के लिए मय्यड़ से ही धरना प्रदर्शन शुरू हुआ था। आसपास के गांवों से प्रदर्शनकारियों को बड़ा व्यापक समर्थन मिला।

हालांकि इस स्थल पर जाट समाज के दो युवा शहीद हो गए थे। इन युवाओं को श्रद्धांजलि का कार्यक्रम भी आमतौर पर यहीं रखा जाता है। 13 सितंबर को जाट समाज कार्यक्रम आयोजित कर इन परिवारों को सम्मान प्रदान करता है। जाट आरक्षण के लिए पहली चिंगारी 13 सितंबर 2010 को फूटी थी।
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इसके बाद यहां 6 मार्च 2011 में आंदोलन तेज हो गया। करीब तीन साल तक आंदोलन के बाद प्रदेश सरकार ने जाट सहित पांच जातियों को आरक्षण देने का एलान किया था। हरियाणा में आरक्षण का एलान होने के बाद केंद्र सरकार ने मार्च 2014 को जाटों को ओबीसी में शामिल करने का एलान किया था।

इसलिए चुना मय्यड़
- आसपास जाट बाहुल्य के गांव
- रेलवे ट्रैक को कब्जा करना आसान
- रेलवे ट्रैक के साथ नेशनल हाईवे को जाम करना भी आसान
- जाट आरक्षण के लिए इस स्थान को शुभ मानते हुए यहां से आगाज

अब मय्यड़ के साथ रामायण
इस बार जाट आरक्षण के लिए मय्यड़ में 13 सितंबर को रैली का आह्वान किया था। मय्यड़ के कैप्टन भूपेंद्र सिंह को सीएम मनोहरलाल खट्टर का ओएसडी बनाए जाने के बाद कुछ लोग आंदोलन से पीछे हट गए। इन लोगों ने रैली के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद रैली रामायण के एक किसान के खेत में करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद आंदोलनकारियों ने मय्यड़ के साथ रामायण का नाम भी शामिल किया।


मय्यड़ संघर्ष की भूमि रहा है। यहां जाट समाज के दो युवाओं ने शहादत दी। इस कारण आंदोलन का यहीं से शुरू किया जाएगा। जाट शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ आंदोलन शुरू होगा।
- यशपाल मलिक, अध्यक्ष, जाट आरक्षण संघर्ष समिति

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