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अनुसंधान का लैब से निकल लैंड पर जाना जरूरी, तभी बदलेगी समाज की तस्वीर : बंडारू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Oct 2021 12:21 AM IST
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It is necessary for research to go from the lab to the land, only then the picture of society will change: Bandaru
गुजवि में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद विद्यार्थी व अन्य। - फोटो : Hisar
हिसार। विश्वविद्यालयों में नई तकनीक, नए अनुसंधान, नए शोध और नवाचार लैब में नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे लैंड तक आना चाहिए। शोध को स्टार्टअप के माध्यम से पेटेंट तक पहुंचाएं ताकि समाज की तस्वीर को बदला जा सके। यह कहना है हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का। वह मंगलवार को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में आयोजित शीर्ष नेतृत्व और शासन विषय पर आयोजित वेबिनार में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
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इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय में विभिन्न विभागों में लैब का निरीक्षण किया। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा वह दवा है जो गरीबी को दूर कर समाज को बदल सकती है। विश्वविद्यालय को चाहिए कि भगवान राम जैसी उदान्त भावनाओं का विकास सभी विद्यार्थियों में किया जाए। ऐसी उच्च और उदान्त शिक्षा निश्चय ही नैतिक मूल्यों का उद्घाटन अवश्य करेगी।
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हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि प्रधानमंत्री देश का कुशल नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने देश के लिए कई साहसिक निर्णय लिए हैं। हरियाणा के अध्यक्ष डीपी भारद्वाज, विद्या भारती ने कहा कि जिस पर लोग विश्वास नहीं करते, उसे मैथॉलजी कहते हैं। मिथ और मिथ्या इसी से ही निकले हैं। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम से इस विषय को जोड़ते हुए राम के शासन पर दृष्टि डाली।
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राष्ट्रीयता की पहचान है हमारी संस्कृति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज कांबोज ने कहा कि भारत एक प्राचीन राष्ट्र है, जिसकी अपनी जीवंत संस्कृति है। भारत की राष्ट्रीयता की सच्ची पहचान यहां की संस्कृति ही है। कुलसचिव प्रो. अवनीश वर्मा ने विश्वविद्यालय की उच्चत्तम एवं श्रेष्ठ उपलब्धियों का अवलोकन स्लाइड के माध्यम से करवाया। इस दौरान ऑनलाइन पाठ्यक्रम की विवरणिका, टीएंडपी सेल की विवरणिका एवं डॉ. गुरप्रीत सैनी द्वारा लिखित डॉ. हेडेगेवार की जीवनी पर लिखित पुस्तक का विमोचन किया गया। राज्यपाल ने एनएसएस के उन स्वयंसेवकों को सम्मानित किया, जिन्होंने गणतंत्र दिवस में अपना श्रेष्ठ योगदान दिया। इस मौके पर शैक्षणिक मामलों के अधिष्ठाता प्रो. हरभजन बंसल, प्रो. दीपा मंगला, आयुक्त चन्द्रशेखर, उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी, जगबीर सिंह, सांसद डीपी वत्स, धर्मवीर, रतेरिया, प्रवीण पोपली, कमल सर्राफ, तरूणा जैन, अशोक सैनी, शाम सुन्दर गुप्ता, कृष्ण बिश्नोई, राजेंद्र सपरा उपस्थित रहे।

शोधार्थियों से की बातचीत
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल यूनिवर्सिटी कंप्यूटर एंड इंफोर्मेटिक्स सेंटर में शोधार्थियों से बात कर रहे थे। विश्वविद्यालय के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एक शोधार्थी मनीष कुमार ने तैयार किए कृत्रिम हाथ की प्रस्तुति दी। शोधार्थी ने बताया कि यह हाथ असली हाथ की तरह काम करेगा। पूर्णतया विकसित होने के बाद यह हाथ अपनी तरह का विश्व का सबसे सस्ता हाथ होगा। राज्यपाल ने शोधार्थी की तारीफ की और कहा कि वर्तमान समय में इस समय के कृत्रिम हाथ की कीमत 50 लाख रुपये के आस-पास है, जबकि मनीष कुमार द्वारा बनाए जा रहे कृत्रिम हाथ की कीमत मात्र 50 हजार रुपये हैं।
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