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गांधी जयंती आज: गांधी जी से प्रभावित हो पूर्व सीएम भार्गव ने सूत कात बनाया था अपने लिए खादी का कफन

Sun, 02 Oct 2022 09:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 02 Oct 2022 09:01 AM IST
सार

सत्याग्रही ने परिजनों समेत विदेशी वस्त्र त्यागे थे। वहीं सर्वोदय भवन हिसार स्वतंत्रता सेनानियों की तपस्या का स्थान रहा है। 1969 से सर्वोदय भवन में हर सप्ताह गांधीवादी विचारों पर चर्चा हो रही है।

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Influenced by Gandhiji, former CM Dr Gopichand Bhargava had made a khadi shroud for himself
गांधी जयंती की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

विस्तार

गांधीजी से हरियाणा के हिसार जिले का गहरा नाता रहा है। आजादी की लड़ाई के दौरान हिसार जिले का हिस्सा रहे भिवानी में 20 अक्तूबर 1920 को देहाती प्रांतीय सम्मेलन व 15 फरवरी वर्ष 1921 में महिला सम्मेलन में गांधीजी ने हिस्सा लिया था। इतिहासकार डॉ. महेंद्र सिंह बताते हैं कि इन दोनों सम्मेलन ने हिसार क्षेत्र के लोगों को गांधीजी का अनुयायी बना दिया।

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सिरसा जिले के रहने वाले श्यामलाल सत्याग्रही व उनकी पत्नी चांदबाई व पुत्रवधू तारावती ने इन्हीं सम्मेलनों में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करते हुए खादी को अंगीकार कर लिया था। संयुक्त पंजाब (पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश) के पहले मुख्यमंत्री व हिसार निवासी डॉ. गोपीचंद भार्गव पर बापू का इतना गहरा असर था कि उन्होंने अपने जीवन काल में ही चरखे से सूत कातकर कफन का कपड़ा बना लिया था। 
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सर्वोदय भवन हिसार के निदेशक धर्मवीर बताते हैं कि सर्वोदय भवन स्वतंत्रता सेनानियों की तपस्या का स्थान रहा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व शहर के पहले विधायक बलवंत राय तायल व दादा गणेशीलाल के साथ काम कर चुके धर्मवीर बताते हैं कि वर्ष 1950 में डाया गांव में सर्वोदय अभियान के तहत एक सामुदायिक केंद्र बनाया गया था।
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वर्ष 1960 में जब संत विनोबा भावे हिसार आए तो उन्होंने यहां सर्वोदय भवन बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद जमीन लेकर भवन का निर्माण कराया गया। दो अक्तूबर 1969 से यहां प्रत्येक रविवार बापू के विचारों पर आधारित गोष्ठी शुरू हुई।

53 साल से प्रत्येक रविवार को हो रही विचार गोष्ठी
संत विनोबा भावे की प्रेरणा से बने सर्वोदय भवन में पिछले 53 साल से प्रत्येक रविवार को गांधी जी के विचारों पर आधारित गोष्ठी होती है। गोष्ठी आपातकाल, आरक्षण आंदोलन और कोविड काल जैसे संकट के वक्त में भी बंद नहीं हुई। 

चाहे दो लोग आएं, गोष्ठी जरूर होगी
सर्वोदय भवन में आयोजित गोष्ठी में नियमित तौर पर शामिल होते रहे डॉ. महेंद्र सिंह, धर्मवीर व सत्याग्रही बलवंत राय तायल के पुत्र नरेंद्र तायल बताते हैं कि प्रत्येक रविवार को शाम पांच से छह बजे तक गोष्ठी होती है। इमरजेंसी के दौरान तमाम आंदोलनकारी इसी गोष्ठी में पकड़े गए। पुरानी स्मृतियों पर जोर डालते हुए धर्मवीर बताते हैं कि सर्वोदय भवन से पूर्व प्रधानमंत्री देवीलाल का जुड़ाव था। जब वे उप प्रधानमंत्री थे तो एचएयू जाते वक्त अचानक ही यहां पहुंच गए थे। इमरजेंसी से पहले और बाद में जय प्रकाश नारायण भी यहां आ चुके हैं। हेमवंती नंदन बहुगुणा, सुंदरलाल बहुगुणा और उप राष्ट्रपति रहे कृष्णकांत भी सर्वोदय भवन में होने वाली विचार गोष्ठी को प्रोत्साहित कर चुके हैं। धर्मवीर बताते हैं कि वर्ष 1990 में आरक्षण आंदोलन के दौरान शहर में नौ दिन का कर्फ्यू लगा था। उस वक्त डीसी से बात की गई तो दो घंटे के लिए कर्फ्यू में छूट मिली। करीब 15-20 लोग पहुंचे और गोष्ठी हुई। 


जतन से रखा है बलवंत तायल का चरखा
आजादी की लड़ाई में गांधीजी के अनुयायी बलवंत राय तायल के पुत्र नरेंद्र तायल ने पिता की स्मृतियों को संजोकर रखा है। अब खुद बुजुर्ग हो चुके नरेंद्र तायल ने बताया कि जब उनके बड़े भाई केवल 10 दिन के थे, तब उनके पिता जेल गए थे। मां ने बेटे को गोद में लिए कटला रामलीला मैदान से उन्हें विदा किया था। आजादी के बाद विधायक बनने के बाद भी बलवंत राय तायल ने बापू के विचारों को अपने जीवनचर्या में शामिल रखा। वे अपने चरखे से सूत कातते और उसी का बना कपड़ा पहनते थे। परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था। 

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